एक वक्त था जब बायजू को भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम का सबसे चमकता सितारा और सफलता की गारंटी माना जाता था। कंपनी के संस्थापक रविंद्रन बायजू देश के स्टार्टअप कल्चर के पोस्टर ब्वॉय थे। लेकिन आज यह कंपनी दिवालिया हो चुकी है और इसके संस्थापक भारी कानूनी विवादों में घिरे हैं। खबर है कि सिंगापुर की एक अदालत ने अवमानना से जुड़े एक मामले में उन्हें छह महीने की सजा सुनाई है।
आखिर एक छोटे से क्लासरूम से शुरू होकर 22 अरब डॉलर तक पहुंचने वाली इस कंपनी और इसके मुखिया का यह हश्र कैसे हुआ? आइए आसान सवाल-जवाब के जरिए इस पूरे मामले को समझते हैं।
सवाल: बायजू और उसके संस्थापक की मौजूदा स्थिति क्या है?
जवाब: कभी 22 अरब डॉलर की भारी-भरकम वैल्यूएशन वाली यह कंपनी आज पूरी तरह से दिवालिया हो चुकी है। हालात इतने खराब हैं कि कंपनी के संस्थापक बायजू रवींद्रन ने खुद एक मौके पर स्वीकार किया कि अब कंपनी की वैल्यूएशन ‘जीरो’ यानी शून्य हो गई है। इसके अलावा, संपत्ति का खुलासा न करने से जुड़े अदालत की अवमानना के एक मामले में सिंगापुर की अदालत ने रवींद्रन को छह महीने की जेल की सजा भी सुनाई है।
सवाल: एक शिक्षक से अरबपति बनने तक बायजू रवींद्रन का सफर कैसे शुरू हुआ?
जवाब: केरल के अझीकोड में जन्मे रवींद्रन के माता-पिता दोनों शिक्षक थे। वे एक शिपिंग कंपनी में इंजीनियर के तौर पर काम करते थे और खाली समय में अपने दोस्तों को कैट (सीएटी) परीक्षा की तैयारी कराते थे। गणित की मुश्किल पहेलियों को चुटकियों में सुलझाने की उनकी कला इतनी मशहूर हुई कि जल्द ही उनके क्लासरूम स्टेडियम में बदल गए। इसी लोकप्रियता को भुनाते हुए साल 2015 में उन्होंने बायजू लर्निंग एप लॉन्च किया और जल्द ही यह देश भर में मशहूर हो गया।

