नॉर्वे में प्रधानमंत्री मोदी ने जिस पत्रकार के सवाल को इग्नोर किया, उसको लेकर हंगामा मचा हुआ है. हालांकि इस पर भारतीय विदेश मंत्रालय ने अपना रुख स्पष्ट कर दिया है. हेले लिंग ने सोशल मीडिया पर लिखा था कि वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम इंडेक्स में नॉर्वे पहले नंबर पर है, वहीं भारत 157वें नंबर पर है और वो फिलिस्तीन, यूएई और क्यूबा से कंप्टीशन कर रहा है. नॉर्वे की पत्रकार को अब भारत में राजनीतिक विश्लेषक तहसीन पूनावाला ने जवाब दिया है.
तहसीन पूनावाला ने एक्स पर Helle Lyng को जवाब देते हुए लिखा कि वर्तमान में सरकार के विरोधी होने के नाते भारत को लेकर मेरा तर्क थोड़ा अलग है. उन्होंने लिखा, ‘भारत में हर कोई मीडिया से अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और जवाबदेही की और भी अधिक मांग करेगा, इसमें कोई संदेह नहीं है, लेकिन हम निश्चित रूप से फ़िलिस्तीन, UAE या क्यूबा नहीं हैं, बल्कि उनसे बहुत दूर हैं.’
I am amongst the voice of the opposition in INDIA & everyday I attack the government on television & social media, am severely critical of the PM & his ministers and no one has ever taken any action against me. I find it offensive you compare my country’s press freedom with… https://t.co/nS8ZyPeO3o
— Tehseen Poonawalla Official 🇮🇳 (@tehseenp) May 18, 2026
राजनीतिक विश्लेषक ने नॉर्वे की पत्रकार से आगे कहा कि अगर आप मेरे इंस्टाग्राम या ट्विटर पोस्ट या कल के टीवी कमेंट्री को ही देख लें तो मैंने मंत्रियों को बिना रीढ़ वाला बताया है. टैक्स रेड को टैक्स टेररिज्म कहा है. मंत्रियों को भाई-भतीजावाद से प्रेरित बताया है और फिर भी मुझे कोई गिरफ्तार नहीं करता.’

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पूनावाला ने कहा, ‘हमें अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के लिए और भी अधिक प्रयास करना चाहिए और यही एक युवा भारत चाहता है, लेकिन भारत एक स्वतंत्र देश है, एक समृद्ध लोकतंत्र है, जहां सरकार चाहे कितनी भी कोशिश कर ले अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर अंकुश नहीं लगा सकती, ऐसा करना बेहद मुश्किल होगा! आपको शुभकामनाएं और कृपया भारत अवश्य पधारें. आपके सभी प्रयासों के लिए शुभकामनाएं.’
नॉर्वे की पत्रकार ने क्या कहा था?
नॉर्वे की पत्रकार ने पीएम मोदी की ओर से सवाल नहीं लेने पर कहा था कि मुझे उनसे ऐसी उम्मीद नहीं थी. वीडियो शेयर कर Helle Lyng ने कहा, ‘वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम इंडेक्स में नॉर्वे पहले स्थान पर है, जबकि भारत 157वें स्थान पर है, जहां वह फिलिस्तीन, यूएई और क्यूबा से कंप्टीशन कर रहा है. जिन शक्तियों के साथ हम सहयोग करते हैं, उनसे सवाल करना हमारा कर्तव्य है.’
Primeminister of India, Narendra Modi, would not take my question, I was not expecting him to.
Norway has the number one spot on the World Press Freedom Index, India is at 157th, competing with Palestine, Emirates & Cuba.
It is our job to question the powers we cooperate… pic.twitter.com/vZHYZnAvev
— Helle Lyng (@HelleLyngSvends) May 18, 2026
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विवाद बढ़ने के बाद पत्रकार ने दी सफाई
हालांकि विवाद बढ़ने के बाद Helle Lyng ने सफाई भी दी. उन्होंने लिखा, ‘मैंने कभी नहीं सोचा था कि मुझे यह लिखना पड़ेगा, लेकिन मैं किसी भी तरह की विदेशी जासूस नहीं हूं, जिसे किसी विदेशी सरकार ने भेजा हो. मेरा काम पत्रकारिता है और मैं मुख्य रूप से नॉर्वे में काम करती हूं.’
I never thought I would have to write this, but I am not a foreign spy of any sort, sent out by any foreign government.
My work is journalism, primarily in Norway now.
— Helle Lyng (@HelleLyngSvends) May 18, 2026
MEA ने इस विवाद पर क्या कहा?
इस घटना के बाद विदेश मंत्रालय की प्रेस वार्ता में वही पत्रकार फिर मौजूद रहीं. उन्होंने MEA सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज से पूछा कि दुनिया भारत पर भरोसा क्यों करे और क्या भारत में मानवाधिकार उल्लंघन बंद होंगे. उन्होंने यह भी पूछा कि क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारतीय मीडिया के कठिन सवालों का जवाब देना शुरू करेंगे.
इसका जवाब देते हुए सिबी जॉर्ज ने कहा कि भारत केवल एक देश नहीं, बल्कि पांच हजार साल पुरानी निरंतर सभ्यता है. उन्होंने कहा कि किसी भी देश की पहचान उसकी आबादी, सरकार, संप्रभुता और क्षेत्र से होती है और भारत इन सभी मूल्यों के साथ दुनिया में मजबूती से खड़ा है. जॉर्ज ने कहा कि भारत ने दुनिया को बहुत कुछ दिया है और कोरोना महामारी के समय भारत ने खुद को दुनिया से अलग नहीं किया, बल्कि जरूरतमंद देशों की मदद के लिए आगे आया. यही भरोसा दुनिया को भारत पर विश्वास दिलाता है.
