लोकप्रिय विषय मौसम क्रिकेट ऑपरेशन सिंदूर क्रिकेट स्पोर्ट्स बॉलीवुड जॉब - एजुकेशन बिजनेस लाइफस्टाइल देश विदेश राशिफल आध्यात्मिक अन्य
---Advertisement---

होर्मुज पर क्यों इस देश के पीएम याद दिला रहा 1970 के दशक का संकट, बोले- आपको तो पता ही होगा…

[wplt_featured_caption]

---Advertisement---

सिंगापुर के प्रधानमंत्री लॉरेंस वोंग ने होर्मुज स्ट्रेट पर बने हालात को लेकर बड़ा दावा किया है. उनके मुताबिक पिछले दो महीने से बंद चल रहे स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का असर दूरगामी होगा. कुछ-कुछ वैसा ही जैसा 1970 के दशक में हुआ था. उन्होंने हाल ही में अपनी फिक्र और हालात को लेकर स्थिति स्पष्ट की. 

वोंग ने जनता को संबोधित करते हुए कहा, ‘होर्मुज बंदी का असर सिर्फ कीमतों में बढ़ोतरी तक सीमित नहीं है, बल्कि अब आपूर्ति पर भी भारी दबाव दिखने लगा है.’ उन्होंने दावा किया कि एशिया के कई देश, जो खाड़ी देशों से ऊर्जा और अन्य जरूरी संसाधनों पर निर्भर हैं, सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं.

सिर्फ ऊर्जा तक सीमित नहीं रहेगा होर्मुज संकट

वोंग ने कहा, ‘कुछ देशों में ईंधन की कमी की खबरें पहले ही सामने आ चुकी हैं. एयरलाइंस ने उड़ानों में कटौती की है और कई फैक्ट्रियों में देरी की समस्या शुरू हो गई है. विशेषज्ञों का कहना है कि यह संकट सिर्फ ऊर्जा तक सीमित नहीं रहेगा, आने वाले समय में खाद, भोजन और अन्य जरूरी वस्तुओं की आपूर्ति पर भी असर पड़ेगा और कई चीजों की कमी देखी जा सकती है.’

सिंगापुर के पीएम ने आशंका जताई कि हालात बहुत जल्द सामान्य नहीं होने वाले. उन्होंने कहा कि अगर भविष्य में यह होर्मुज फिर से खुल भी जाता है, तब भी स्थिति तुरंत सामान्य नहीं होगी. कारण यह है कि बंदी के दौरान बंदरगाहों और ऊर्जा ढांचे को नुकसान पहुंचा है और समुद्री रास्तों से बारूदी सुरंगों को हटाने में समय लगेगा.

इसके अलावा, बीमा कंपनियों को भरोसा चाहिए होगा कि समुद्री रास्ते सुरक्षित हैं, शिपिंग कंपनियों को जोखिम उठाने का भरोसा लौटाना होगा, और यह प्रक्रिया रातों-रात नहीं होती. विशेषज्ञों का अनुमान है कि हालात सामान्य होने में कम से कम कई महीने लग सकते हैं. इसका मतलब है कि यह संकट जल्द खत्म होने वाला नहीं है, बल्कि आने वाले महीनों में दबाव और बढ़ सकता है.

वोंग ने 1970 का क्यों किया जिक्र

1970 के स्टैगफ्लेशन का भी वोंग ने जिक्र किया. उन्होंने कहा, ‘पुरानी पीढ़ी को 1970 के दशक का तेल संकट याद होगा, जब दुनिया ने स्टैगफ्लेशन का अनुभव किया था, यानी एक ऐसी स्थिति जिसमें महंगाई भी ऊंची होती है और बेरोजगारी भी बढ़ती है. इसे अर्थव्यवस्था की सबसे कठिन स्थितियों में से एक माना जाता है.’

वोंग ने चेताया, ‘अब ऐसे ही जोखिम फिर से बढ़ रहे हैं. यहां तक कि अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (आईईए) ने चेतावनी दी है कि मौजूदा संकट 1970 के दशक से भी अधिक गंभीर हो सकता है. इसी वजह से स्थिति को गंभीरता से लेते हुए तैयारी करने की जरूरत है, ताकि आने वाले समय की चुनौतियों के लिए मानसिक और आर्थिक रूप से तैयार रहा जा सके.’

यह भी पढ़ें : ट्रंप-जिनपिंग बैठक से खुलेगा होर्मुज का रास्ता? ईरान वॉर के बीच व्हाइट हाउस का आ गया बड़ा बयान

]
Source link

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

Leave a Comment