
लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी मंगलवार को प्रधानमंत्री आवास 7, लोक कल्याण मार्ग पहुंचे, जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में देश के अगले केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) निदेशक के चयन से जुड़ी अहम बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने चयन प्रक्रिया पर कड़ा विरोध दर्ज कराया और औपचारिक रूप से असहमति नोट भी सौंपा।

#WATCH | Lok Sabha LoP and Congress MP Rahul Gandhi arrives at 7, Lok Kalyan Marg, the official residence of the Prime Minister Narendra Modi, to attend a meeting to select the next Director of the CBI. pic.twitter.com/hnOg3JzyOg
— ANI (@ANI) May 12, 2026
‘विपक्ष का नेता कोई रबर स्टैम्प नहीं’
राहुल गांधी ने स्पष्ट कहा कि विपक्ष का नेता कोई रबर स्टैम्प नहीं है। उन्होंने कहा कि वे अपनी संवैधानिक जिम्मेदारी से समझौता नहीं कर सकते और किसी भी पक्षपातपूर्ण प्रक्रिया में भाग लेकर उसे वैधता नहीं दे सकते।
चयन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि सरकार लगातार सीबीआई का राजनीतिक उपयोग कर रही है, जिससे यह संस्था विपक्षी नेताओं, पत्रकारों और आलोचकों को निशाना बनाने का माध्यम बनती जा रही है। उन्होंने कहा कि इसी कारण चयन समिति में विपक्ष के नेता की भूमिका सुनिश्चित की गई थी, लेकिन उन्हें प्रभावी भागीदारी से वंचित किया जा रहा है।
जानकारी नहीं देने का आरोप
राहुल गांधी के अनुसार, उन्हें पात्र उम्मीदवारों की आवश्यक जानकारी जैसे सेल्फ-अप्रेजल रिपोर्ट और 360-डिग्री असेसमेंट उपलब्ध नहीं कराई गई। उन्होंने कहा कि 69 उम्मीदवारों की फाइलें पहली बार बैठक के दौरान देखने को दी गईं, जिससे उनका सही मूल्यांकन संभव नहीं था। उन्होंने इसे चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता के खिलाफ बताते हुए कहा कि यह कदम पहले से तय उम्मीदवार को चुनने की ओर इशारा करता है।
टॉप बॉस की दौड़ में शामिल जीपी सिंह
सीबीआई के नए निदेशक की दौड़ में कई आईपीएस अधिकारियों का नाम सामने आ रहा है। इनमें एक आईपीएस तो ऐसे हैं, जिन्हें केंद्र सरकार के दो पावरफुल मंत्रियों का साथ मिल रहा है। अब देखना ये है कि पीएमओ किसके नाम को हरी झंडी देता है। इनमें पहला नाम सीआरपीएफ डीजी जीपी सिंह का है। वे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के विश्वासपात्र हैं। सीआरपीएफ में आने से पहले वे असम के डीजीपी रहे हैं। असम में उग्रवाद और उसके बाद सीआरपीएफ में रहते हुए माओवाद को समाप्त करने में उनका खास योगदान रहा है। जीपी सिंह, दो सप्ताह से भी अधिक समय तक पश्चिम बंगाल चुनाव में सड़कों पर उतरे रहे। बंगाल में निष्पक्ष और भय मुक्त मतदान के लिए उन्होंने दिन-रात अपने जवानों के साथ कड़ी मेहनत की है। अब उन्हें इसका इनाम मिल सकता है।
कब लगेगी नए निदेशक के नाम पर मुहर?
केंद्र सरकार ने पिछले साल सीबीआई निदेशक प्रवीण सूद का कार्यकाल एक साल के लिए बढ़ा दिया था। सीबीआई का नया निदेशक कौन होगा, इसके लिए हाई पावर कमेटी की बैठक हुई है, जिसमें नए निदेशक के नाम पर मुहर लगेगी। इस कमेटी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत शर्मा शामिल हैं। प्रवीण सूद को 2023 में दो वर्ष के लिए सीबीआई चीफ बनाया गया। मंत्रिमंडल की नियुक्ति समिति (एसीसी) ने सूद को सेवा विस्तार देकर उनका कार्यकाल एक वर्ष के लिए बढ़ा दिया था। साल 2021 में केंद्र सरकार दो अध्यादेशों को मंजूरी देकर सीबीआई और ईडी के निदेशकों के कार्यकाल को दो साल से बढ़ाकर पांच साल करने की अनुमति दी थी। इसके मुताबिक, दो साल का तय कार्यकाल पूरा होने के बाद इन्हें एक-एक वर्ष के लिए तीन सेवा विस्तार दिए जा सकते हैं। सूत्रों का कहना है कि फिलहाल प्रवीण सूद को दूसरा सेवा विस्तार मिलने के आसार बहुत कम नजर आ रहे हैं।
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