
Iran Supreme Leader Bold Statement: ईरान के सर्वोच्च नेता ने गुरुवार को बयान जारी किया है. उन्होंने कहा है कि वह अपनी परमाणु और मिसाइल क्षमताओं की रक्षा करेगा. ईरान के सर्वोच्च नेता का यह बयान काफी सख्ती भरा नजर आता है. यह बयान ऐसे वक्त आया है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक डील के जरिए इस मामले को सुलझाना चाहते हैं. हालांकि, उनके इरादों को लेकर फिलहाल कुछ कहा नहीं जा सकता है.
ईरान का सर्वोच्च नेता का पद संभालने के बाद अपनी परंपरा के अनुसार अयातुल्ला मोजतबा खामेनेई ने एक लिखित बयान दिया. इसे ईरान के सरकारी टीवी एंकर ने पढ़कर सुनाया. उन्होंने अपने पत्र में कहा कि फारस की खाड़ी में अमेरिकियों की एकमात्र जगह इसके पानी की गहराइयों में है. इस क्षेत्र के इतिहास में एक नया अध्याय लिखा जा रहा है.
खामेनेई ने अपने पत्र में कहा है कि ईश्वर की मदद और शक्ति से फारस की खाड़ी क्षेत्र का उज्जवल एक ऐसा भविष्य होगा, जिसमें अमेरिका नहीं होगा. एक ऐसा भविष्य यहां लोगों की प्रगति, सुख-सुविधा और समृद्धि को समर्पित होगा.
उन्होंने कहा कि हम और फारस की खाड़ी तथा ओमान की खाड़ी के पार रहने वाले हमारे पड़ोसी एक साझा नियति से जुड़े हैं. जो विदेशी हजारों किलोमीटर दूर से यहां आकर लालच और द्वेष के साथ काम करते हैं, उनके लिए इस क्षेत्र में कोई जगह नहीं है. सिवाय इसके पानी की गहराइयों के.
तनाव के बीच ईरान के सुप्रीम नेता के बयान के क्या मायने हैं?
हालांकि, ईरान के नेता का यह पत्र ऐसे समय आया है, जब अमेरिका ने नाकेबंदी कर ईरान के जहाजों को समुद्र में जाने से रोक दिया है. इससे ईरान के तेल व्यापार पर प्रेशर पड़ा है. गुरुवार को ट्रेडिंग के दौरान जून डिलीवरी के लिए बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड की कीमत बढ़कर $126 प्रति बैरल तक पहुंच गई. ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि ईरान हॉर्मुज पर कंट्रोल बनाए हुए हैं. इस वजह से दुनिया के तेल व्यापार पर भी प्रेशर है. ट्रंप इसी को लेकर लगातार कोशिश कर रहे हैं, इसका जवाब कैसे दिया जाए.
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 28 फरवरी को ईरान और इजरायल की संयुक्त कार्रवाई के दौरान हुए हमले में उनके पिता पूर्व सुप्रीम नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मृत्यु हो गई थी. इसी दौरान अयातुल्ला मोजतबा खामेनेई भी घायल हो गए थे.
अमेरिकी की हॉर्मुज में नाकेबंदी का उद्देश्य क्या है?
इधर, अमेरिकी नाकेबंदी का उद्देश्य ईरान को अपना तेल बेचने से रोकना है. इससे उसे राजस्व के महत्वपूर्ण स्रोत से वंचित किया जा सके. साथ ही, यह संभावित रूप से एक ऐसी स्थिति भी पैदा कर सकती है जहां तेहरान को तेल का उत्पादन बंद करना पड़े, क्योंकि उसके पास तेल को जमा करने के लिए कोई जगह नहीं बचेगी. इस बीच, हॉर्मुज के बंद होने से ट्रंप पर दबाव बढ़ गया है. क्योंकि अहम मध्यावधि चुनावों से पहले तेल और गैसोलीन की कीमतें आसमान छू रही हैं.
यह भी पढ़ें:
ईरान-अमेरिका के बीच घिस रहा पाकिस्तान? अफगानिस्तान पर कर रहा उकसावे वाली कार्रवाई, आखिर क्यों?

