पश्चिम बंगाल में चुनावी हिंसा से जुड़ी एक लंबित याचिका के संबंध में सुप्रीम कोर्ट में एक अंतरिम याचिका दायर की गई है। इस याचिका में मांग की गई है कि चल रहे विधानसभा चुनावों के दौरान और उसके बाद कानून-व्यवस्था की व्यवस्थाओं की निगरानी के लिए, सुप्रीम कोर्ट के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक उच्च-स्तरीय निगरानी समिति का गठन किया जाए। यह याचिका सनातनी संसद नाम की संस्था ने दायर की है।
याचिका में क्या?
याचिका में कहा गया है कि पश्चिम बंगाल सरकार ने कोर्ट को जो आश्वासन दिए थे, वे जमीन पर सच साबित नहीं हो रहे हैं। राज्य में अब भी हिंसा, वोटरों को डराना और संपत्ति को नुकसान पहुंचाने जैसी घटनाएं हो रही हैं। आरोप है कि सत्ताधारी दल के समर्थकों के नाम वोटर लिस्ट में गलत तरीके से जोड़े जा रहे हैं, चाहे वे इसके योग्य हों या नहीं।
अर्जी में 2021 के विधानसभा चुनाव जिक्र
इस अर्जी में साल 2021 के विधानसभा चुनाव के बाद हुई हिंसा का विस्तार से जिक्र है। याचिकाकर्ता ने मानवाधिकार आयोग और कलकत्ता हाई कोर्ट की रिपोर्ट का हवाला दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक, उस समय हत्या, बलात्कार और आगजनी जैसी भयानक घटनाएं हुई थीं। जांच में यह भी सामने आया कि 60 फीसदी मामलों में पुलिस ने एफआईआर तक दर्ज नहीं की थी। पीड़ितों को अब तक पूरा मुआवजा भी नहीं मिला है।
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अर्जी के मुताबिक, पुराने मामलों के कई आरोपी अब भी जमानत पर बाहर हैं, जिससे वोटरों के मन में डर बैठा हुआ है। याचिका में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के मार्च में दिए गए एक भाषण का भी जिक्र है। कहा गया है कि यह भाषण पुरानी हिंसा की याद दिलाता है और लोगों को डराने का काम करता है।
कोर्ट से की गई मांग
कोर्ट से मांग की गई है कि संवेदनशील इलाकों में पर्याप्त केंद्रीय सुरक्षा बलों (CAPF) की तैनाती की जाए। निगरानी कमेटी की मंजूरी के बिना पुलिस अफसरों के तबादले न हों। हत्या और दुष्कर्म जैसे गंभीर अपराधों की जांच के लिए एसआईटी (SIT) बनाई जाए। हर जिले में फास्ट-ट्रैक कोर्ट बने ताकि मामलों का फैसला जल्दी हो सके। इसके अलावा गवाहों की सुरक्षा और चुनाव ड्यूटी पर तैनात अधिकारियों की सुरक्षा के लिए भी कड़े कदम उठाने की अपील की गई है।
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