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पेंटागन का बड़ा कबूलनामा:चीन-रूस की मिसाइलों के सामने अमेरिकी रक्षा सिस्टम बेदम, गोल्डन डोम बनेगा गेम चेंजर? – Us Defense System Powerless Against Chinese-russian Missiles, Will Golden Dome Be A Game Changer?

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क्यों बढ़ी चिंता?

अधिकारियों ने बताया कि खासतौर पर चीन तेजी से हाइपरसोनिक मिसाइल तकनीक विकसित कर रहा है, जो पारंपरिक इंटरसेप्टर सिस्टम से बच निकलती हैं। इससे अमेरिका की सुरक्षा व्यवस्था में बड़ा गैप सामने आया है। अमेरिकी स्पेस फोर्स के जनरल माइकल ए गुएटलीन ने चेतावनी देते हुए कहा कि अब स्थिति बदल चुकी है और अमेरिका की सुरक्षा पहले जैसी मजबूत नहीं रही।

गोल्डन डोम- अमेरिका की नई रक्षा योजना

इन खतरों से निपटने के लिए अमेरिका एक महत्वाकांक्षी रक्षा परियोजना गोल्डन डोम पर काम कर रहा है।

इस योजना के तहत:

इस परियोजना की अनुमानित लागत 175 से 185 अरब डॉलर (करीब 14-15 लाख करोड़ रुपये) बताई जा रही है और 2028 तक इसकी शुरुआती क्षमता विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस योजना को आगे बढ़ा रहे हैं और इसके लिए करीब 1.5 ट्रिलियन डॉलर के रक्षा बजट का समर्थन किया जा रहा है।

रक्षा उत्पादन में भी बड़ी कमजोरी

अमेरिकी मिसाइल डिफेंस एजेंसी के निदेशक हीथ ए कोलिन्स ने कहा कि:

  • वर्षों की कम निवेश नीति से रक्षा उत्पादन क्षमता कमजोर हो गई है।
  • इंटरसेप्टर मिसाइलों के उत्पादन में कैपेसिटी डेब्ट बन गया है।
  • सप्लाई चेन को मजबूत करने में समय लगेगा।

उन्होंने चेताया कि अगर बड़े पैमाने पर युद्ध होता है, तो अमेरिका के लिए लंबे समय तक रक्षा बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

परियोजना को लेकर राजनीतिक विवाद हुआ तेज

इस महंगे गोल्डन डोम प्रोजेक्ट को लेकर अमेरिका में राजनीतिक विवाद भी तेज हो गया है। सीनेटर एंगस किंग ने सवाल उठाया कि इतने बड़े खर्च वाले कार्यक्रम में कांग्रेस की निगरानी को सीमित क्यों किया जा रहा है, जबकि यह राष्ट्रीय बजट पर बड़ा असर डाल सकता है। वहीं, अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य तेजी से बदल चुका है और अब केवल डिटरेंस यानी डर के सहारे सुरक्षा संभव नहीं रह गई है। उनका तर्क है कि आज कई परमाणु ताकतें सक्रिय हैं, मिसाइल तकनीक पहले से कहीं ज्यादा उन्नत हो चुकी है और साइबर व इलेक्ट्रॉनिक युद्ध जैसे नए खतरे भी सामने आ चुके हैं। ऐसे में अमेरिका अब ‘डिटरेंस + एक्टिव डिफेंस’ की संयुक्त रणनीति पर काम कर रहा है, जिसमें हमलों को रोकने के साथ-साथ सक्रिय रूप से उन्हें निष्क्रिय करने की क्षमता भी विकसित की जा रही है।

इसके बावजूद अमेरिका फिलहाल अपने मौजूदा रक्षा ढांचे पर ही काफी हद तक निर्भर है, जिसमें एजिस सिस्टम से लैस नौसैनिक जहाज, थाड और पैट्रियट मिसाइल सिस्टम जैसे प्लेटफॉर्म शामिल हैं। ये सभी मिलकर एक बहु-स्तरीय रक्षा प्रणाली बनाते हैं, लेकिन अधिकारियों का मानना है कि भविष्य के जटिल और हाई-टेक खतरों के सामने ये व्यवस्था पर्याप्त साबित नहीं हो सकती।

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