महाराष्ट्र के नासिक में स्थित आईटी कंपनी टीसीएस की स्थानीय यूनिट में काम करने वाली महिला कर्मचारियों के साथ कथित यौन उत्पीड़न और जबरन धर्म परिवर्तन का बड़ा मामला सामने आया था। इस मामले में पुलिस ने नौ अलग-अलग एफआईआर (FIR) दर्ज की हैं। इसकी जांच के लिए एक विशेष जांच दल (एसआईटी) बनाया गया है।
आरोप है कि कंपनी की एक महिला कर्मचारी निदा खान अपने सहकर्मियों को इस्लामी रीति-रिवाजों का पालन करने, नमाज पढ़ने और मांसाहारी (नॉनवेज) भोजन खाने के लिए दबाव डालती थी। इस केस में अब तक एक महिला ऑपरेशंस मैनेजर समेत आठ लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। टीसीएस ने भी इन आरोपों पर सख्त एक्शन लेते हुए आरोपी कर्मचारियों को निलंबित (सस्पेंड) कर दिया है।
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निदा खान की जमानत का विरोध क्यों?
- नासिक कोर्ट के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश के.जी. जोशी की अदालत में निदा खान की अग्रिम जमानत (गिरफ्तारी से बचने की अर्जी) पर सुनवाई हुई।
- सरकारी वकील अजय मिसर ने जमानत का कड़ा विरोध करते हुए कहा कि मामले की गहराई तक जाने के लिए निदा खान की पुलिस हिरासत में पूछताछ बहुत जरूरी है।
- पुलिस का मानना है कि निदा के तार मालेगांव के उन गुटों से जुड़े हो सकते हैं, जो धर्म परिवर्तन का काम करते हैं।
- सरकारी वकील ने अदालत को बताया कि इसके पीछे विदेशी फंडिंग और वित्तीय लेन-देन का भी बड़ा नेटवर्क हो सकता है, जिसका खुलासा होना अभी बाकी है।
पीड़िता के साथ कैसा व्यवहार किया गया?
अभियोजन पक्ष (सरकारी वकील) ने अदालत को बताया कि निदा खान अच्छी तरह जानती थी कि पीड़िता अनुसूचित जनजाति (ST) समुदाय से आती है। आरोप है कि पीड़िता को जबरन बुर्का और हिजाब पहनने के लिए मजबूर किया गया और उससे ‘कलमा’ पढ़वाया गया। इतना ही नहीं, पीड़िता का नाम बदलकर ‘हानिया’ रख दिया गया था। पुलिस के मुताबिक, मुख्य आरोपी दानिश शेख और पीड़िता के बीच संबंधों की जानकारी निदा को थी और उन्होंने पीड़िता को मलेशिया में बसाने की पूरी साजिश रची थी। इन सभी सबूतों को जुटाने के लिए पुलिस ने निदा खान का मोबाइल फोन और डायरी जब्त कर ली है, जिनकी फॉरेंसिक जांच की जा रही है।
निदा खान के वकील ने अदालत में क्या दलीलें दीं?
बचाव पक्ष के वकील राहुल कासलीवाल ने अदालत में कहा कि भारत के कई राज्यों में धर्म परिवर्तन विरोधी कानून हैं, लेकिन महाराष्ट्र में फिलहाल ऐसा कोई विशिष्ट कानून लागू नहीं है। हालांकि, इसी बीच महाराष्ट्र विधानसभा ने हाल ही में धर्म स्वातंत्र्य विधेयक, 2026 पारित किया है, जिसमें धोखाधड़ी या जबरन धर्मांतरण पर सात साल की सजा और एक लाख रुपये जुर्माने का प्रावधान है। निदा खान ने अपनी दो महीने की गर्भावस्था (प्रेग्नेंसी) का हवाला देते हुए 18 अप्रैल को अदालत से अग्रिम जमानत मांगी थी। फिलहाल, कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद 2 मई तक के लिए फैसला सुरक्षित रख लिया है।
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