राजस्थान में वर्ष 2022 की प्राध्यापक/स्कूल व्याख्याता (कृषि विज्ञान) भर्ती परीक्षा के पेपर लीक मामले में स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) ने बड़ा खुलासा करते हुए तत्कालीन आरपीएससी सदस्य बाबूलाल कटारा समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया है कि संगठित गिरोह ने फर्जी डिग्री, बैकडेट मार्कशीट और लीक प्रश्नपत्रों के जरिए अभ्यर्थियों को सरकारी नौकरी दिलाने का खेल रचा था।

गोपनीय सूचना के आधार पर जांच शुरू
एसओजी के एडीजी विशाल बंसल ने बताया कि गोपनीय सूचना के आधार पर जांच शुरू की गई थी। जांच में सामने आया कि ओपीजेएस विश्वविद्यालय से बैकडेट में बीएड और एमएससी एग्रीकल्चर की फर्जी मार्कशीट तैयार कर अभ्यर्थियों को भर्ती प्रक्रिया में अवैध लाभ पहुंचाया गया।
एसओजी थाने में मुकदमा दर्ज
इस मामले में 5 मार्च 2026 को एसओजी थाने में मुकदमा दर्ज किया गया था। जांच के दौरान सबसे पहले अनिता चौधरी का नाम सामने आया, जो फागी के एक सरकारी विद्यालय में कृषि विज्ञान व्याख्याता के पद पर कार्यरत थी। जांच में पाया गया कि उसने फर्जी एमएससी एग्रीकल्चर मार्कशीट के आधार पर नौकरी हासिल की थी। पूछताछ से बचने के लिए उसके फरार होने के बाद मामला और गंभीर हो गया।
ओपीजेएस यूनिवर्सिटी से फर्जी मार्कशीट तैयार होती थी
इसके बाद एसओजी ने सीकर जिले के श्रीमाधोपुर क्षेत्र के दिवराला स्थित राजकीय विद्यालय में कार्यरत कृषि विज्ञान व्याख्याता अशोक कुमार यादव को गिरफ्तार किया। जांच में सामने आया कि उसने भी ओपीजेएस विश्वविद्यालय से फर्जी बीएड और एमएससी एग्रीकल्चर की अंकतालिकाएं तैयार करवाई थीं। आवश्यक योग्यता नहीं होने के बावजूद उसने गलत जानकारी देकर आवेदन किया और भर्ती परीक्षा की मेरिट में तीसरा स्थान हासिल कर लिया।
अंक देखकर एसओजी को हुआ संदेह
जांच में यह भी सामने आया कि अशोक यादव की शैक्षणिक क्षमता सामान्य थी। सामान्य ज्ञान के पेपर में उसे 150 में से केवल 68 अंक मिले, जबकि कृषि विज्ञान विषय में 300 में से 239 अंक हासिल हुए। दोनों पेपरों के अंकों में भारी अंतर ने एसओजी को संदेह की ओर अग्रसर किया।
सात लाख रूपये में खरीदा था सॉल्व्ड प्रश्नपत्र
पूछताछ में अशोक यादव ने स्वीकार किया कि उसने पेपर माफिया अनिल उर्फ शेर सिंह मीणा गिरोह के सदस्य विनोद रेवाड़ से 7 लाख रुपये में सॉल्व्ड प्रश्नपत्र खरीदने का सौदा किया था। कृषि विज्ञान का पेपर परीक्षा से एक दिन पहले 10 अक्टूबर 2022 को उपलब्ध कराया गया था।
60 लाख रुपये लेकर प्रश्नपत्र उपलब्ध कराया
एसओजी जांच में खुलासा हुआ कि विनोद रेवाड़ को यह पेपर अनिल उर्फ शेर सिंह मीणा से मिला था। बाद में अनिल मीणा को गिरफ्तार किया गया। पूछताछ में उसने बताया कि कृषि विज्ञान का प्रश्नपत्र तत्कालीन आरपीएससी सदस्य बाबूलाल कटारा ने 60 लाख रुपये लेकर उपलब्ध कराया था। जांच एजेंसी के अनुसार, उस समय आरपीएससी में विभिन्न विषयों के प्रश्नपत्र तैयार करने की जिम्मेदारी अलग-अलग सदस्यों को दी गई थी और कृषि विज्ञान का पेपर बाबूलाल कटारा के जिम्मे था। आरोप है कि प्रश्नपत्र तैयार होने के बाद उसे सरकारी आवास पर ले जाया गया, जहां उसके भांजे विजय डामोर ने उसे रजिस्टर में उतारा और बाद में वह पेपर अनिल मीणा तक पहुंचाया गया।
एसओजी को जांच में यह भी पता चला कि विजय डामोर खुद इसी भर्ती परीक्षा में भूगोल विषय का अभ्यर्थी था। आरोप है कि उसने सामान्य ज्ञान और भूगोल के पेपर हासिल करने के लिए अलग सौदा किया था। हालांकि, दावा किया गया है कि परीक्षा से पहले उसने मोबाइल पर भेजे गए पेपर नहीं देखे, जिससे उसे फायदा नहीं मिल सका।
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अनिल उर्फ शेर सिंह मीणा ने पूछताछ में बताया कि प्रश्नपत्रों की प्रतियां तैयार कर विनोद रेवाड़, भूपेंद्र सारण और सुरेश ढाका सहित गिरोह के अन्य सदस्यों को भी दी गई थीं। इनके जरिए अन्य अभ्यर्थियों तक पेपर पहुंचाए गए और करोड़ों रुपये की अवैध वसूली की गई।
फिलहाल एसओजी ने बाबूलाल कटारा, विजय डामोर और अनिल उर्फ शेर सिंह मीणा को गिरफ्तार कर लिया है। एजेंसी अब यह जांच कर रही है कि बाबूलाल कटारा के कार्यकाल में RPSC की अन्य परीक्षाओं में भी कहीं अनियमितताएं तो नहीं हुईं।

