- जियो प्लेटफॉर्म्स ने IPO के लिए सेबी को ड्राफ्ट पेपर दिए.
- महेंद्र नाहटा ने रिलायंस को 4G स्पेक्ट्रम खरीदने में सहायता की थी.
- उन्होंने 2020 में 48 करोड़ में जियो की 0.54% हिस्सेदारी खरीदी.
- उनकी 48 करोड़ की हिस्सेदारी अब 5800 करोड़ हो सकती ह.
Jio IPO News: रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड की टेलिकॉम विंग- रिलायंस जियो (Jio Platforms) ने अपने आईपीओ के लिए सेबी (SEBI) के पास ड्राफ्ट पेपर्स जमा करा दिए हैं. इस आईपीओ से बेशक कंपनी और उसके निवेशकों को फायदा होगा, लेकिन इन्हीं में से एक शख्स हैं, जिन्हें इस आईपीओ से 100 गुना ज्यादा फायदा होने जा रहा है. यहां जाने-माने कारोबारी और HFCL के प्रमोटर महेंद्र नाहटा (Mahendra Nahata) की बात की जा रही है.
कौन हैं महेंद्र नाहटा?
महेंद्र नाहटा कोई और नहीं, बल्कि वह शख्स हैं जिन्होंने रिलायंस इंडस्ट्रीज को टेलीकॉम सेक्टर में लाने में बड़ी मदद की थी. साल 2010 की बात है, जब महेंद्र नाहटा की कंपनी इन्फोटेल ब्रॉडबैंड सर्विसेज ने 12872 करोड़ रुपये ने पूरे भारत में 4G स्पेक्ट्रम को हासिल किया था. तब मुकेश अंबानी की कंपनी रिलायंस ने 4800 करोड़ रुपये में इसमें 95% की हिस्सेदारी खरीद ली, जो आगे चलकर Reliance Jio के नाम से मशहूर हुआ. तभी से नाहटा कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स में शामिल हो गए.
48 करोड़ के कैसे बनेंगे 5800 करोड़?
साल 2020 में नाहटा के परिवार ने कंपलसरी कनवर्टिबल डिबेंचर (CCDs) को इक्विटी में बदलकर महज 10 रुपये के फेस वैल्यू पर जियो प्लेटफॉर्म में 0.54% (लगभग 4.78 करोड़ शेयर) की हिस्सेदारी महज 48 करोड़ रुपये में खरीदी थी. ब्रोकरेज फर्म मोतीलाल ओसवाल ने अपनी रिपोर्ट में आगामी आईपीओ के लिए जियो प्लेटफॉर्म्स का वैल्यूएशन 114 बिलियन डॉलर (10.7 लाख करोड़) लगाया है. ऐसे में इस वैल्यूएशन के हिसाब से कंपनी में महेंद्र नाहटा की हिस्सेदारी की कीमत 5800 करोड़ रुपये बैठती है, जो उनके निवेश पर कुल 121 गुना बंपर मुनाफे के बराबर है.
DRHP में और क्या बताया गया?
Jio Platforms ने बीते शुक्रवार को IPO के लिए अपना ड्राफ्ट प्रॉस्पेक्टस फाइल किया, जिसमें 27 करोड़ यानी 270 मिलियन इक्विटी शेयर जारी करने का जिक्र है. इस प्रस्तावित इश्यू से Jio Platforms में Reliance Industries की हिस्सेदारी 66.43% से घटकर 64.5% होने की उम्मीद है.
Reliance ने अब तक फंड जुटाने के अपने टारगेट या आईपीओ के लिए प्राइस रेंज का खुलासा नहीं किया है. हालांकि, अंदाजा लगाया जा रहा है कि इससे मिलने वाली रकम का एक बड़ा हिस्सा टेलीकॉम ग्रुप के अंदर बैलेंस-शीट से जुड़े कामों के लिए इस्तेमाल किया जाएगा.
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