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4 लाख की सैलरी, फिर भी बच्चा नहीं कर रहा कपल, होम लोन ने बदला जीवन

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इन दिनों कई कपल्स अपने परिवार बढ़ाने के सपने को लेकर थोड़े से वोकल है. यानी कि इस फैसले वो खुदपर थोपते नहीं हैं बल्कि उसको लेकर प्रॉपर सोच-विचार करते हैं और फिर फैमिली प्लानिंग करते हैं. इस सोच-विचार में बच्चे की जिम्मेदारी, फाइनेंशियल स्टेबिलिटी जैसी और भी कई चाजें आती हैं. जैसे अब हाल ही में एक कपल की कहानी सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रही है, जिसमें कपल ने अपने होम लोन के चलते बच्चा पैदा करने की प्लानिंग को होल्ड कर दिया है.

दरअसल SEBI-रजिस्टर्ड इन्वेस्टमेंट एडवाइजर विवेक एसजी ने अपने ऑफिशियल LinkedIn पर एक पोस्ट शेयर की है. जिसमें उन्होंने बताया है कि एक कपल ने उनसे दिसंबर 2028 तक करीब 70 लाख रुपये जुटाने के लिए सलाह मांगी थी. इसी समय तक उनके नए फ्लैट का पजेशन मिलने की उम्मीद है. इस बचत के लिए ही कपल ने अपनी फैमिली प्लानिंग को कुछ समय के लिए टाल दिया है.

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सवा दो लाख की बचत हर महीने
विवेक के मुताबिक, पति की मंथली सैलरी 2.35 लाख रुपये है और वो 84,000 रुपये बचाते हैं. वहीं पत्नी की कमाई 1.61 लाख रुपये है और वो 1.31 लाख रुपये बचाती हैं. इस तरह दोनों मिलकर हर महीने करीब 2.15 लाख रुपये बचा रहे हैं. कपल को घर खरीदने के लिए पत्नी के पिता से पहले ही 2 करोड़ रुपये मिल चुके हैं. घर की कीमत 4 करोड़ रुपये है. इसके अलावा पजेशन के समय रजिस्ट्रेशन और इंटीरियर के लिए करीब 70 लाख रुपये की जरूरत होगी.

28 महीने, 70 लाख का लक्ष्य
विवेक ने पोस्ट में बताया कि, अगर कपल अगले 28 महीनों तक अपनी पूरी मासिक बचत शॉर्ट-टर्म डेट इंस्ट्रूमेंट्स में निवेश करता है, तो वे करीब 65 लाख रुपये जमा कर सकते हैं. यानी 70 लाख के लक्ष्य से वो थोड़े ही पीछे रहेंगे. लेकिन इसके लिए उन्हें अगले 28 महीनों तक अपनी लगभग पूरी बचत सिर्फ घर से जुड़े खर्चों के लिए लगानी होगी. इसका मतलब है कि इस दौरान वे इमरजेंसी फंड, रिटायरमेंट और बच्चे की प्लानिंग के लिए अलग से पैसा नहीं बचा पाएंगे.

EMI या फैमिली प्लानिंग?
घर खरीदने के लिए 2 करोड़ रुपये का होम लोन लिया जाएगा. अगर ब्याज दर 8.5% और लोन की अवधि 20 साल मानी जाए, तो उनकी मासिक EMI करीब 1,73,565 रुपये बनेगी. यही कपल की सबसे बड़ी चिंता है. ऐसे में अगर पत्नी मैटरनिटी लीव, नौकरी जाने, करियर ब्रेक या परिवार में किसी की बीमारी के कारण काम करना बंद कर देती है, तो पति की बचत करीब 84,000 रुपये रह जाएगी, जबकि EMI 1.73 लाख रुपये होगी. इसका मतलब है कि हर महीने करीब 89,000 रुपये कम पड़ जाएंगे.

इसी के चलते कपल ने फैसला किया है कि जब तक होम लोन की EMI पूरी नहीं हो जाती है तब तक वो फैमिली प्लानिंग के बारे में कुछ भी नहीं सोचेंगे.

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सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस
विवेक के इस पोस्ट पर सोशल मीडिया यूजर्स भी अलग- अलग तरह की प्रतिक्रिया दे रहे हैं. कई लोगों का कहना है कि बैंक से लोन मिलने का मतलब ये नहीं है कि वो लोन लेना आर्थिक रूप से सही भी है. बैंक आपकी लोन चुकाने की क्षमता के आधार पर रकम मंजूर करता है, लेकिन परिवार की दूसरी जरूरतों और भविष्य की योजनाओं का फैसला आपको खुद करना होता है. तो वहीं कई लोगों का य भी कहना है कि महंगा घर खरीदने के बाद बच्चे का खर्च उठाना मुश्किल लगना सिर्फ पैसों का सवाल नहीं, बल्कि प्राथमिकताओं का भी मामला हो सकता है.

विवेक ने भी दी राय
वहीं इस पूरे विषय पर पोस्ट शेयर करने वाले विवेक ने भी अपनी राय दी है. उन्होंने साफ किया है कि उनकी बात घर खरीदने के खिलाफ नहीं है. उनका कहना है कि घर खरीदने से पहले ये देखना जरूरी है कि अगर कुछ समय के लिए एक व्यक्ति की आय बंद हो जाए तो क्या परिवार EMI और दूसरे जरूरी खर्च संभाल सकता है. उन्होंने ये भी कहा कि ऐसा घर खरीदना चाहिए जिससे एक की ही आय से संभाली जा सके. 

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