पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और विमान ईंधन की कीमतों में तेज बढ़ोतरी के कारण वैश्विक एयरलाइन उद्योग का मुनाफा 2026 में लगभग आधा रह जाने का अनुमान है। यह जानकारी इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन (आईएटीए) की ताजा वित्तीय रिपोर्ट में दी गई है।
आईएटीए के अनुसार, 2026 में दुनिया भर की एयरलाइंस का संयुक्त शुद्ध लाभ 23 अरब डॉलर रहने की उम्मीद है। यह 2025 के अनुमानित 45 अरब डॉलर के मुकाबले लगभग आधा है और पहले लगाए गए 41 अरब डॉलर के अनुमान से भी काफी कम है।
एयरलाइंस का मुनाफा आधा रहने की उम्मीद
आईएटीए के महानिदेशक विली वाल्श ने कहा, “पश्चिम एशिया में युद्ध से पैदा हुई बाधाओं और ईंधन लागत में वृद्धि ने एयरलाइन उद्योग के परिदृश्य को कमजोर किया है।” उन्होंने कहा, “वैश्विक स्तर पर एयरलाइंस की लाभप्रदता 2025 की तुलना में आधी होने की उम्मीद है। मुनाफा 45 अरब डॉलर से घटकर 23 अरब डॉलर रह जाएगा और लाभ मार्जिन 4.2 प्रतिशत से घटकर 2.0 प्रतिशत पर आ जाएगा।”
आईएटीए के मुताबिक, 2026 में उद्योग का शुद्ध लाभ मार्जिन 2 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जबकि 2025 में यह 4.2 प्रतिशत था। प्रति यात्री शुद्ध लाभ भी 9.10 डॉलर से घटकर 4.50 डॉलर रह जाने का अनुमान है। संस्था ने कहा कि एयरलाइंस के सामने सबसे बड़ी चुनौती ईंधन लागत में भारी उछाल है। 2026 में जेट ईंधन की औसत कीमत 152 डॉलर प्रति बैरल रहने का अनुमान है, जो 2025 के 90 डॉलर प्रति बैरल के औसत स्तर से लगभग 70 प्रतिशत अधिक है।
पिछले साल की तुलना में कम ही रहेगा लाभ
वॉल्श ने कहा, “जेट ईंधन की कीमतों में 70 प्रतिशत की तेज वृद्धि का असर सभी एयरलाइंस के मुनाफे पर पड़ रहा है।” उन्होंने कहा, “कुछ अतिरिक्त लागत किरायों में बदलाव और परिचालन दक्षता बढ़ाकर वसूली जा रही है, लेकिन यह पिछले वर्ष के स्तर की लाभप्रदता बनाए रखने के लिए पर्याप्त नहीं होगी।”
मुनाफे में गिरावट के बावजूद, एयरलाइन उद्योग की कुल आय 2026 में रिकॉर्ड 1.165 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है, जो 2025 के 1.065 ट्रिलियन डॉलर की तुलना में 9.4 प्रतिशत अधिक होगी। यात्रियों की संख्या 2.4 प्रतिशत बढ़कर 5.1 अरब तक पहुंचने का अनुमान है, जबकि उपलब्ध सीटों में से 84 प्रतिशत सीटें भरने का रिकॉर्ड स्तर हासिल होने की संभावना है।
यात्री टिकटों से होने वाली आय 839 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है। ईंधन लागत के झटके की आंशिक भरपाई के लिए एयरलाइंस द्वारा किरायों में बढ़ोतरी किए जाने से टिकट यील्ड में 7 प्रतिशत वृद्धि की संभावना जताई गई है।
1.117 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकती है परिचालन लागत
हालांकि, आईएटीए ने चेतावनी दी है कि परिचालन खर्च आय की तुलना में अधिक तेजी से बढ़ेंगे। कुल उद्योग लागत 13 प्रतिशत बढ़कर 1.117 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकती है। इसमें सबसे बड़ा योगदान ईंधन खर्च का होगा, जो लगभग 40 प्रतिशत बढ़कर 350 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है।
संस्था ने कहा कि एयरलाइन उद्योग पहले से ही कम लाभ मार्जिन पर काम करता रहा है, इसलिए यह स्थिति उसके लिए अतिरिक्त चुनौती लेकर आई है। वॉल्श ने कहा, “एयरलाइंस ईंधन मूल्य झटके का सबसे अधिक भार उठा रही हैं।”
उन्होंने कहा, “प्रति यात्री शुद्ध लाभ घटकर 4.50 डॉलर रह जाने का अनुमान है, जो पिछले वर्ष का आधा है। मौजूदा परिस्थितियों में यह उद्योग की मजबूती को दिखाता है। लेकिन इससे फीफा विश्व कप के अधिकांश आयोजक स्थलों पर एक हॉट डॉग भी नहीं खरीदा जा सकता और यदि अन्य लागतें या कर बढ़ते हैं तो यह बहुत कम सुरक्षा प्रदान करता है।”
आईएटीए ने गिनाए जोखिम
क्षेत्रीय स्तर पर आईएटीए ने कहा कि पश्चिम एशिया को छोड़कर सभी प्रमुख एयरलाइन बाजारों के लाभ में रहने की उम्मीद है। पश्चिम एशिया में एयरलाइंस को उड़ान व्यवधान, हवाई क्षेत्र पर प्रतिबंध और संघर्ष के कारण ट्रांजिट यातायात में कमी की वजह से घाटे का सामना करना पड़ सकता है।
वॉल्श ने कहा, “युद्ध शुरू होने के बाद खाड़ी क्षेत्र की एयरलाइंस को लगभग पूर्ण हवाई क्षेत्र बंदी जैसी परिचालन अनिश्चितताओं का सामना करना पड़ा है।” उन्होंने कहा, “ये एयरलाइंस कनेक्टिविटी बनाए रखने के लिए शानदार काम कर रही हैं, लेकिन वित्तीय असर से बचना संभव नहीं है।”
आईएटीए ने 2026 में एयरलाइन उद्योग के सामने धीमी वैश्विक आर्थिक वृद्धि, बढ़ती महंगाई, विमान आपूर्ति श्रृंखला में बाधाएं और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं को भी प्रमुख जोखिमों के रूप में चिन्हित किया है।
