दुनियाभर में डीजल की सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ रही है. कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और ग्लोबल मार्केट में डीजल की कमी ने इसकी कीमतों पर दबाव बढ़ा दिया है. इसका असर अब भारत में भी दिखाई देने लगा है. देश में बल्क डीजल की कीमत में सीधे 14.60 रुपए प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई है.
हालांकि, आम ग्राहक के लिए अभी पेट्रोल पंप पर बिकने वाले डीजल की कीमत में इतनी बड़ी बढ़ोतरी नहीं हुई है. लेकिन अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में डीजल और कच्चे तेल की कीमतों का दबाव लंबे समय तक बना रहता है तो आने वाले समय में इसका असर ट्रांसपोर्ट से लेकर रोजमर्रा के सामान तक पर पड़ सकता है.
बल्क डीजल हुआ कितना महंगा?
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक बल्क डीजल की कीमत 138.97 रुपए से बढ़कर 153.57 रुपए प्रति लीटर हो गई है. यानी एक लीटर पर सीधे 14.60 रुपए का इजाफा हुआ है.
पेट्रोल पंप का डीजल मिलेगा सस्ता?
बल्क डीजल और नॉर्मल पेट्रोल पंप पर मिलने वाले डीजल की कीमत में काफी ज्यादा अंतर है. दिल्ली में सरकारी तेल कंपनियों के पेट्रोल पंप पर डीजल करीब 95.64 रुपए प्रति लीटर है, जबकि बल्क डीजल की कीमत 153.57 रुपए प्रति लीटर पहुंच गई है. यानी दोनों के बीच करीब 58 रुपए प्रति लीटर का अंतर है.
इसी वजह से कुछ कमर्शियल ग्राहक बल्क खरीदने के बजाय नॉर्मल पेट्रोल पंप से डीजल लेने लगे हैं. इससे पेट्रोल पंपों पर डीजल की मांग बढ़ जाती है.
क्यों बढ़ रहा डीजल का संकट?
ग्लोबल मार्केट में डीजल की सप्लाई भी तंग होती जा रही है. कई देशों में डीजल का स्टॉक कम है और रिफाइनरियों पर दबाव बढ़ा हुआ है. रूस से डीजल की सप्लाई पर लगी पाबंदियों और अलग-अलग देशों में सप्लाई रूट से जुड़ी दिक्कतों ने भी बाजार पर असर डाला है. ऐसे में डीजल कम होने पर उसकी कीमत बढ़ रही है. यही वजह है कि दुनिया के कई बाजारों में डीजल क्रैक स्पीड काफी ऊंचे स्तर पर पहुंच गया है.
क्रैक स्पीड क्या है?
रिफाइनरी कच्चा तेल खरीदकर उससे डीजल और पेट्रोल जैसे ईंधन बनाती है और क्रैक स्पीड ये बताता है कि कच्चे तेल की लागत और उससे तैयार होने वाले ईंधन की कीमत के बीच रिफाइनरी को कितना मार्जिन मिल रहा है. अगर डीजल की कीमत कच्चे तेल की तुलना में तेजी से बढ़ती है तो क्रैक स्पीड बढ़ जाता है.
तेल कंपनियों पर बढ़ रहा दबाव
अब सवाल ये है कि अगर डीजल महंगा है तो भारत में लोगों को इसका असर क्यों नहीं दिख रहा है? इसकी एक बड़ी वजह सरकारी तेल कंपनियों की कीमत तय करने की रणनीति है.
कंपनियां अंतरराष्ट्रीय बाजार में लागत बढ़ने के बावजूद घरेलू पंप पर पेट्रोल-डीजल की कीमत को नहीं बढ़ा रही हैं. इससे उनकी मार्जिन पर दबाव पड़ रहा है. यानी कंपनियों के लिए कच्चा तेल और ईंधन महंगा पड़ रहा है, लेकिन वो ग्राहकों से उतनी कीमत नहीं वसूल रही हैं.
आपके बजट पर कैसे पड़ेगा असर?
अगर ग्लोबल डीजल संकट और महंगा कच्चा तेल लंबे समय तक बना रहता है तो इसका असर सिर्फ पेट्रोल पंप पर नहीं पड़ने वाला है. डीजल महंगा होने का सबसे पहला असर ट्रांसपोर्ट लागत पर पड़ता है. ट्रक, बस और दूसरी कमर्शियल गाड़ियां डीजल पर चलती हैं.
ईंधन महंगा होने पर माल ढुलाई की लागत बढ़ सकती है. इसके बाद इसका असर सब्जी, फल, दूध, किराना जैसे सामान की कीमतों पर भी पड़ सकता है.
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