Gulf Countries Meeting amid Middle East Tesnion: मिडिल ईस्ट में तनाव को लेकर कतर ने खाड़ी देश के नेताओं के साथ बैठक में आग्रह किया है. इसमें कहा गया है कि वैश्विक नजर से सबसे खास जलमार्ग स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज प्रेशर बनाने के लिए उपयोग नहीं किया जाना चाहिए.
कतर की तरफ से यह आग्रह विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता डॉ. माजिद बिन मोहम्मद अल-अंसारी ने किया है. उन्होंने कहा कि यह एक प्राकृतिक मार्ग है. इसे राजनीतिक या सैन्य संघर्ष का बंधक नहीं बनाया जा सकता है.
इसके अलावा कतर ने चेतावनी भरे लहजे में कहा है कि ईरान-अमेरिका की जंग में इस महत्वपूर्ण जलमार्ग का इस्तेमाल दबाव बनाने के लिए अस्वीकार्य है. साथ ही आह्वान किया कि दुनिया के एनर्जी सेक्टर की सुरक्षा पर इसका प्रभाव पड़ेगा. साथ ही तत्काल सुरक्षित नौवहन फिर शुरु करने की अपील की गई.

हॉर्मुज में हजारों की संख्या में फंसे हैं जहाज
यह टिप्पणियां ऐसे वक्त आई हैं, जब वैश्विक तेल का 20 प्रतिशत हिस्सा खतरे में है. हजारों की संख्या में जहाज फंसे हुए हैं. इससे बीमा कंपनियों को युद्ध से होने वाले जोखिम और नुकसान कवरेज को रद्द करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है. साथ ही प्रीमियम लागत में भी इजाफा हुआ है.
मिडिल ईस्ट में बने हालात और हॉर्मुज पर सैन्य रुकावट को लेकर गल्फ देशों की खाड़ी सहयोग परिषद यानी GCC के सदस्य देशों की बैठक हुई. इसी बैठक में हॉर्मुज को खोलने की बात कही गई है. ये प्रस्ताव नौवाहन को व्यापक परमाणु चर्चाओं से अलग रखा हुआ है.
इंटरनेशनल प्रेशर में हुई गल्फ देशों की बैठक
अब ऐसे में सवाल उठ रहा है कि सोमवार को हुई गल्फ देशों की बैठक किसी इंटरनेशनल प्रेशर के चलते हुई है? इसकी वजह है अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप जो हॉर्मुज को फिर से खोलने की ईरानी योजना पर समीक्षा कर रहे हैं.
इधर, जलमार्ग बंद रहने पर सैन्य कार्रवाई की धमकी भी अमेरिका की तरफ से दी गई है. कतर के अधिकारियों ने बताया कि स्थिति गंभीर बनी हुी है. यह आशंका है कि हॉर्मुज बंद रहना एक स्थिर संघर्ष में बदल सकता है. यह दीर्घकालिक क्षेत्रीय स्थिरता को प्रभावित करेगा.
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