दिल की बीमारियों का खतरा सभी उम्र के लोगों में देखा जा रहा है। हाल के वर्षों में आपने भी 30 से कम उम्र के लोगों में हार्ट अटैक और इससे मौत की खबरें जरूर पढ़ी-सुनी होंगी। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, इन जोखिमों को देखते हुए सभी लोगों को अपनी दिल की सेहत को लेकर अलर्ट रहने की जरूरत है। हार्ट से जुड़े किसी भी संकेत को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
दिल की बीमारी का नाम सुनते ही ज्यादातर लोगों के दिमाग में हार्ट अटैक, ब्लॉकेज या हाई ब्लड प्रेशर आता है। पर क्या आप जानते हैं कि दिल में होने वाली सूजन भी एक गंभीर समस्या है, जिसके मामले तेजी से बढ़ते जा रहे हैं। इसे नजरअंदाज करना जानलेवा जोखिमों को बढ़ाने वाला हो सकता है।
दिल में सूजन की समस्या को मेडिकल की भाषा में मायोकार्डिटिस कहा जाता है। वैसे तो इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं, हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि वायरल संक्रमण, शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली की गड़बड़ी और कुछ दूसरी स्थितियां भी सूजन को बढ़ाने वाली हो सकती हैं। आ
इए जान लेते हैं कि कैसे पता किया जा सकता है कि कहीं आपके दिल में भी तो सूजन नहीं हो गई है?

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हृदय रोगों का बढ़ता खतरा
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दिल की बीमारियों का बढ़ता जोखिम
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, हार्ट से संबंधित किसी भी समस्या पर बेहद गंभीरता से ध्यान देते रहने की जरूरत होती है। चूंकि बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी दिल की बीमारियों का शिकार हो रहे हैं इसलिए कम उम्र से ही अलर्ट हो जाना चाहिए।
- मायोकार्डिटिस के लक्षण वैसे तो आपको बहुत आम से लग सकते हैं, इसमें छाती में दर्द या भारीपन से लेकर सांस लेने में कठिनाई और थकान-कमजोरी बनी रहती है। पर अगर इन संकेतों पर समय रहते ध्यान न दिया जाए या फिर इसका इलाज न हो पाए तो इससे दिल के पंप करने की क्षमता पर असर पड़ सकता है, जिससे समय के साथ हार्ट फेलियर का जोखिम बढ़ जाता है।

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हार्ट की समस्याएं
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दिल में सूजन का क्या मतलब है?
दिल में सूजन को आसान भाषा में समझें तो इसका मतलब है कि हृदय की मांसपेशियों के अंदर सूजन और उससे जुड़े बदलाव होने लगते हैं। कार्डियक सारकॉइडोसिस में शरीर की सूजन संबंधी बीमारी हृदय को भी प्रभावित कर सकती है।
- यह समस्या कई बार शुरुआत में बिना किसी स्पष्ट लक्षण के रहती है, इसलिए लोगों को पता ही नहीं चल पाता कि दिल की मांसपेशियों में बदलाव शुरू हो चुके हैं?
- एम्स के अध्ययन में मरीजों की औसत उम्र 38 साल थी। इनमें 68.4 फीसदी को धड़कनों के तेज या अनियमित होने और 52.63 फीसदी को सांस फूलने की शिकायत थी। एमआरआई में 63.15 फीसदी मरीजों में मायोकार्डिटिस बीमारी से जुड़े संकेत मिले।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, इस बीमारी की केवल लक्षणों के आधार पर पहचान कर पाना मुश्किल हो सकता है। इसलिए हृदय की विस्तृत जांच महत्वपूर्ण हो जाती है। अगर आपमें लगातार धड़कनों की अनियमितता की समस्या बनी हो, बिना स्पष्ट कारण के सांस फूलती हो तो डॉक्टर से मिलकर कारणों का पता लगाना जरूरी हो जाता है।

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हार्ट की समस्याएं
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दिल में सूजन से क्या होते हैं खतरे?
दिल की मांसपेशियों में सूजन को नजरअंदाज करना नुकसानदायक हो सकता है, क्योंकि बीमारी बढ़ने पर हृदय के काम करने का तरीका प्रभावित हो सकता है।
- कार्डियक सारकॉइडोसिस जैसी बीमारी में सूजन के कारण दिल की विद्युत गतिविधि में गड़बड़ी हो सकती है। इससे धड़कनों के अनियमित या बहुत तेज होने का खतरा रहता है। कुछ मरीजों में दिल की पंपिंग की क्षमता भी कम हो सकती है।
- गंभीर स्थितियों में दिल की सूजन हार्ट फेलियर जैसी गंभीर स्थिति का कारणबन सकती है। जिसमें हृदय शरीर की जरूरत के मुताबिक खून पंप नहीं कर पाता।

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दिल की धड़कनों में होने वाली समस्याएं
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क्या इसकी पहचान हो सकती है?
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, दिल में सूजन की समस्या की पहचान के लिए समय पर जांच जरूरी है। हालांकि कुछ लक्षणों पर आपको लगातार नजर रखने की जरूरत होती है।
- आमतौर पर मरीजों को, छाती में दर्द या भारीपन, सांस लेने में कठिनाई, अत्यधिक थकान और कमजोरी के साथ दिल की धड़कन अनियमित होने की समस्या हो सकती हैं। हालांकि ये लक्षण दिल की दूसरी बीमारियों में हो सकती है।
- इस समस्या का पता लगाने के लिए कार्डियक एमआरआई जैसे टेस्ट की सलाह दी जाती है, इससे हृदय की मांसपेशियों में होने वाले सूक्ष्म बदलावों को भी देखा जा सकता है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
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