देश में सड़क हादसों की भयावह तस्वीर के बीच भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) अब गंभीर घायलों को वक्त पर इलाज (गोल्डन ऑवर में) मुहैया कराने की दिशा में बड़ा बदलाव करने जा रहा है। एनएचएआई ने अपने अधीन आने वाले 80 हजार किलोमीटर लंबे राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क में करीब 16 हजार किलोमीटर ऐसे हिस्सों की पहचान की है जहां दुर्घटनाओं की आशंका सबसे अधिक है। इनमें 278 ऐसे स्थान भी शामिल हैं जहां हादसे के बाद एंबुलेंस पहुंचने में 20 से 30 मिनट तक लग रहे हैं। अब इन जगहों पर एंबुलेंस रिस्पॉन्स टाइम घटाकर 10 मिनट करने की योजना पर काम शुरू किया गया है।
एनएचएआई के चेयरमैन संतोष कुमार यादव का कहना है कि कि हाईवे सुरक्षा को केवल सड़क निर्माण तक सीमित नहीं रखा जा सकता। दुर्घटना के बाद त्वरित मेडिकल सहायता सुनिश्चित करना अब प्राथमिकता बन गया है। इसके लिए हाईवे पर एंबुलेंस नेटवर्क, लाइव ट्रैकिंग और रियल टाइम मॉनिटरिंग की नई व्यवस्था लागू की जाएगी। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की रोड एक्सीडेंट्स इन इंडिया-2023 रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2023 में राष्ट्रीय राजमार्गों पर 1.50 लाख से अधिक सड़क दुर्घटनाएं हुईं, जिनमें 63 हजार से ज्यादा लोगों की मौत हुई।
देश के कुल सड़क नेटवर्क में राष्ट्रीय राजमार्गों की हिस्सेदारी कम होने के बावजूद सड़क हादसों में मौतों का बड़ा हिस्सा इन्हीं मार्गों पर दर्ज हो रहा है। इसी खतरे को देखते हुए एनएचएआई अब दुर्घटना की आशंका वाले कॉरिडोर की अलग मैपिंग कर रहा है। खास तौर पर उन हिस्सों पर फोकस किया जा रहा है जहां दुर्घटना के बाद चिकित्सा सहायता पहुंचने में ज्यादा समय लगता है। अधिकारियों के अनुसार कई मामलों में घायल व्यक्ति की मौत अस्पताल पहुंचने से पहले ही हो जाती है। इसलिए गोल्डन ऑवर के भीतर इलाज उपलब्ध कराना सबसे बड़ी चुनौती है।
एंबुलेंस की लाइव ट्रैकिंग की मिलेगी सुविधा
नई योजना के तहत एंबुलेंस की लाइव ट्रैकिंग सुविधा शुरू की जाएगी। यह व्यवस्था एप आधारित कैब सेवा की तरह काम करेगी। दुर्घटना की सूचना मिलते ही कंट्रोल रूम और संबंधित एजेंसियां यह देख सकेंगी कि नजदीकी एंबुलेंस कहां है, कितनी देर में पहुंचेगी और कौन सा मार्ग सबसे तेज होगा। इससे रिस्पॉन्स सिस्टम अधिक पारदर्शी और तेज बनने की उम्मीद है।
- एनएचएआई दुर्घटना की आशंका वाले क्षेत्रों में एंबुलेंस की रणनीतिक तैनाती भी करेगा। इसके अलावा कोहरे, ओवरस्पीडिंग और गलत लेन में ड्राइविंग जैसे जोखिम वाले कारणों की रियल टाइम मॉनिटरिंग पर भी काम हो रहा है। हाईवे पर डिजिटल निगरानी और डेटा आधारित सुरक्षा प्रबंधन को नए रोड सेफ्टी मॉडल का हिस्सा बनाया जा रहा है।
एंबुलेंस की संख्या में किया जा रहा इजाफा
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के 2023-24 के आंकड़ों के अनुसार, राष्ट्रीय राजमार्गों पर 1,074 एंबुलेंस तैनात हैं। मंत्रालय के मानकों के मुताबिक हर 50-60 किमी पर एक एंबुलेंस उपलब्ध होनी चाहिए। इस आधार पर एनएचएआई के करीब 80 हजार किमी लंबे हाईवे नेटवर्क के लिए 1,300 से 1,600 एंबुलेंस की जरूरत मानी जा रही है। इस पर भी एनएचएआई काम कर रहा है। एम्बुलेंस में स्ट्रेचर, 50 से अधिक दवाएं और ड्रेसिंग सामग्री उपलब्ध रहती है, जिसमें आईवी फ्लूइड, आपातकालीन इंजेक्शन आदि शामिल हैं।


