बांग्लादेश ने भारत से अपनी पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के प्रत्यर्पण को लेकर जल्द सकारात्मक प्रतिक्रिया देने की उम्मीद जताई है। बांग्लादेश सरकार ने कहा कि वह भारत में मौजूद उन सभी आरोपियों की वापसी चाहता है, जो देश में सजा पा चुके हैं या गंभीर अदालती मुकदमों का सामना कर रहे हैं। 78 वर्षीय शेख हसीना पिछले साल अगस्त में हिंसक छात्र विरोध प्रदर्शनों के बाद अपनी सरकार गिरने पर अचानक भारत आ गई थीं। तब से वह भारत में ही रह रही हैं।

नवंबर में एक विशेष अदालत ने उन्हें मानवता के खिलाफ अपराधों के मामले में उनकी अनुपस्थिति में ही मौत की सजा सुनाई थी। शेख हसीना ने इन सभी अदालती फैसलों और आपराधिक आरोपों को पूरी तरह राजनीति से प्रेरित बताते हुए खारिज किया है। हाल ही में शेख हसीना ने खुद ही दिसंबर तक स्वेच्छा से वतन वापसी की बात कही थी।
क्या शेख हसीना की वापसी पर होगी तुरंत गिरफ्तारी?
बांग्लादेश की विदेश राज्य मंत्री शमा ओबैद इस्लाम ने इस संवेदनशील मामले पर सरकार का रुख पूरी तरह साफ कर दिया है। उन्होंने मीडिया को बताया कि शेख हसीना के पास अब कानूनन आत्मसमर्पण करने का कोई कानूनी विकल्प नहीं बचा है। सजायाफ्ता होने के कारण, बांग्लादेश की धरती पर कदम रखते ही उन्हें तुरंत गिरफ्तार कर लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि देश का कानून यही मांग करता है। दूसरी ओर, प्रधानमंत्री के सूचना और रणनीति सलाहकार जाहेद उर रहमान ने उनके लौटने की योजना का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि अदालत चाहे तो पुराने फैसले की समीक्षा कर सकती है या उन्हें बरी भी कर सकती है, लेकिन उन्हें न्याय का सामना तो करना ही होगा। सरकार पर इस संभावित वापसी को लेकर कोई राजनीतिक दबाव नहीं है।
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मामले से जुड़े पांच मुख्य बिंदु
- प्रत्यर्पण की मांग: बांग्लादेश ने भारत को बार-बार पत्र भेजकर शेख हसीना और अन्य आरोपियों को राजनयिक चैनलों के माध्यम से जल्द सौंपने का अनुरोध किया है।
- मौत की सजा का एलान: बांग्लादेश की विशेष अदालत ने शेख हसीना को प्रदर्शनकारियों पर हुई हिंसक कार्रवाई के लिए दोषी मानते हुए मौत की सजा सुनाई है।
- वापसी की योजना: शेख हसीना दिसंबर तक स्वैच्छिक रूप से बांग्लादेश लौटने की ठोस योजना बना रही हैं।
- तुरंत जेल का नियम: कानून के मुताबिक, सजा मिलने के बाद आरोपी सीधे सरेंडर नहीं कर सकता, इसलिए उन्हें आते ही जेल भेजा जाएगा।
- अदालती समीक्षा की उम्मीद: सरकार का मानना है कि अदालत चाहे तो बाद में फैसले को बदल सकती है, लेकिन वर्तमान में गिरफ्तारी तय है।
क्या इस विवाद से प्रभावित होंगे भारत-बांग्लादेश के रिश्ते?
विदेश राज्य मंत्री ने कहा कि शेख हसीना के मुद्दे को भारत और बांग्लादेश के द्विपक्षीय संबंधों में किसी भी तरह की बाधा के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने भरोसा जताया कि इस मामले से दोनों देशों के मजबूत और ऐतिहासिक रिश्तों पर कोई विपरीत असर नहीं पड़ेगा। भारत और बांग्लादेश के आपसी संबंध बेहद मजबूत और बहुआयामी हैं, जो निरंतर आगे बढ़ते रहेंगे।

