Nana Patekar Lifestyle: नाना पाटेकर केवल एक शानदार अभिनेता ही नहीं थे, बल्कि वे जिंदगी को अपनी शर्तों पर खुलकर जीने वाले इंसान थे. 8 अक्टूबर को 75 वर्ष की उम्र में कार्डियक अरेस्ट के कारण उनका निधन हो गया. परदे पर अपनी दमदार डायलॉग डिलीवरी और आंखों ही आंखों में माहौल बदल देने वाले नाना, असल जिंदगी में बेहद सादगी पसंद इंसान थे.
वे हमें सिखा गए कि चमक-धमक वाली इस दुनिया में रहते हुए भी जमीन से जुड़कर और सादगी के साथ जीवन कैसे जिया जाता है. आइए जानते नाना पाटेकर की लाइफस्टाइल के बारे में.
मानसिक शांति और हॉबीज को समय
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, नाना पाटेकर का मानना था कि काम ही सब कुछ नहीं होता, जिंदगी में खुद के लिए वक्त निकालना भी बहुत जरूरी है. वे एक बेहतरीन कुक थे और अपने दोस्तों व परिवार के लिए खाना बनाना बेहद पसंद करते थे.
इसके अलावा जानवर पालना, पौधे लगाना और गांव के लोगों के साथ बिना किसी दिखावे के वक्त बिताना उन्हें मानसिक सुकून देता था. उन्होंने कभी भी अपने काम को अपनी पूरी पहचान नहीं बनने दिया.

नाना पाटेकर का कुकिंग पैशन
नाना पाटेकर जितने बेहतरीन अभिनेता थे, उतने ही शानदार और शौकीन कुक भी. उन्हें अपने दोस्तों और मेहमानों के लिए खुद खाना पकाना बेहद पसंद था. वे खास तौर पर पारंपरिक मराठी व्यंजन, मटन और सी-फूड बहुत स्वादिष्ट बनाते थे. वे रेडीमेड के बजाय सिलबट्टे पर पिसे ताजे मसालों का इस्तेमाल करते थे. शूटिंग के दौरान भी वे पूरी यूनिट के लिए खुद खाना बनाकर ले जाते थे.
साधारण जीवन और जमीन से जुड़ाव
बॉलीवुड के बड़े सितारों की गाड़ियों और बंगलों वाली लाइफस्टाइल से दूर नाना पाटेकर को गांव और मिट्टी की खुशबू से प्यार था. वे मुंबई के शोर-शराबे को छोड़कर अपने 12-14 एकड़ के फार्महाउस में वक्त बिताना ज्यादा पसंद करते थे.
वहां वे खेती करते थे, गायों और बैलों की देखभाल करते थे और साधारण कपड़े पहनते थे. उनका मानना था कि असली शांति और सुकून महलों में नहीं, बल्कि कुदरत के करीब रहने (Nana Patekar Lifestyle) में मिलता है.
दूसरों की मदद करने का जज्बा
नाना पाटेकर की लाइफस्टाइल का एक बड़ा हिस्सा समाज सेवा से जुड़ा था. साल 2015 में जब महाराष्ट्र के किसान सूखे की मार झेल रहे थे, तब उन्होंने मकरंद अनासपुरे के साथ मिलकर 'नाम फाउंडेशन' की शुरुआत की.
वे सिर्फ पैसों से मदद नहीं करते थे, बल्कि खुद गांव-गांव जाकर किसानों से मिलते थे और उन्हें ढांढस बंधाते थे. उनकी लाइफस्टाइल (Nana Patekar Lifestyle) हमें यह सीख देती है कि जब आपके पास क्षमता हो, तो समाज के लिए कुछ करना ही जिंदगी को सही मायने में अर्थ देता है.

दिखावे से दूरी और निडर अंदाज
आज के समय में जहां लोग सोशल मीडिया और कैमरे के सामने अपनी लाइफस्टाइल को परफेक्ट दिखाने की कोशिश में लगे रहते हैं, वहीं नाना पाटेकर हमेशा बिल्कुल साफ और बेबाक रहे.
उन्हें कभी स्टारडम का घमंड नहीं हुआ. इंटरव्यू हो या आम बातचीत, वे बिना किसी झिझक के अपनी बात कहते थे. वे स्क्रीन पर जितने दमदार थे, कैमरे के पीछे उतने ही सरल और सच्चे इंसान थे.
सादगी में ही असली खूबसूरती
तीन नेशनल अवॉर्ड, फिल्मफेयर अवॉर्ड्स और पद्मश्री पाने के बाद भी नाना पाटेकर कभी अपनी जड़ों को नहीं भूले. उनका जीवन इस बात का सबसे बड़ा सबूत है कि लाइफस्टाइल का मतलब सिर्फ महंगे कपड़े, गाड़ियां या पार्टी करना नहीं होता.
असली लाइफस्टाइल वह है, जिसमें सादगी हो, दूसरों के प्रति सहानुभूति हो और अपने काम के प्रति ईमानदारी हो. नाना पाटेकर आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनका सादा और अर्थपूर्ण जीवन हमेशा हमारे लिए एक प्रेरणा बना रहेगा.
यह भी पढ़ें: एक्टिंग और ड्रामा से पहले क्या करते थे नाना पाटेकर, जानें कहां से हुई पढ़ाई
The post सादगी भरा जीवन और कुकिंग का जुनून, जानिए पर्दे के पीछे नाना पाटेकर का असली अंदाज appeared first on Prabhat Khabar.


