अमेरिका ने भारत, इंडोनेशिया और लाओस से आने वाले सोलर सेल और पैनल पर बड़ा झटका दिया है. U.S. Department of Commerce ने इन देशों से होने वाले सोलर आयात पर भारी एंटी-डंपिंग ड्यूटी और काउंटरवेलिंग ड्यूटी लगाई है. भारत के सोलर उत्पादों पर 123.04 फीसदी का एंटी-डंपिंग ड्यूटी लगाया गया है.
अमेरिका का कहना है कि इन देशों के निर्माता अमेरिकी बाजार में सोलर उत्पाद कम कीमत पर बेच रहे थे और उन्हें सरकारों से ऐसी सब्सिडी मिल रही थी जिससे अमेरिकी कंपनियों को नुकसान हो रहा था. इस फैसले के बाद अब भारतीय सोलर कंपनियों के लिए अमेरिका में अपने प्रोडक्ट बेचना महंगा हो जाएगा.
सोलर पैनल पर कितना टैक्स लगा?
भारतीय प्रोडक्ट्स के लिए 123.04 फीसदी एंटी-डंपिंग ड्यूटी लगाया गया है. इंडोनेशिया के लिए ये 94.36 फीसदी और लाओस के लिए 65.43 फीसदी है. इसके अलावा काउंटरवेलिंग ड्यूटी भी लागू होगा.
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अमेरिका ने क्यों लिया ये फैसला?
अमेरिका में कुछ घरेलू सोलर कंपनियों ने भारत समेत इन देशों से आने वाले सस्ते सोलर प्रोडक्ट्स को लेकर शिकायत की थी. अमेरिकी जांच में पाया गया कि इन देशों के निर्माता अपने प्रोडक्ट्स को अमेरिकी बाजार में बहुत कम कीमत पर बेच रहे थे. साथ ही, अमेरिका ने आरोप लगाया कि इन देशों की सरकारों की तरफ से मिलने वाली सब्सिडी से भी प्रोडक्ट को फायदा मिल रहा है.
कंपनियों पर क्या असर होगा?
इस फैसले का सबसे ज्यादा असर उन भारतीय कंपनियों पर पड़ेगा जो अमेरिकी बाजार में सोलर सेल और मॉड्यूल निर्यात करती हैं. अगर किसी कंपनी के उत्पाद पर 100 फीसदी से ज्यादा का शुल्क लगता है तो अमेरिकी बाजार में उसका दाम काफी बढ़ सकता है. कंपनियों के सामने अब दो ऑप्शन होंगे, या तो इस लागत का कुछ हिस्सा खुद उठाएं या फिर इसे अमेरिकी खरीदारों पर डालें.
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क्या भारत में सोलर पैनल महंगे होंगे?
अमेरिका का ये शुल्क सीधे भारत में बिकने वाले सोलर पैनल पर लागू नहीं होता है. यानी सिर्फ इस फैसले की वजह से भारत में घरेलू ग्राहकों के लिए सोलर पैनल की कीमत तुरंत बढ़ना जरूरी नहीं है.
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