संसद परिसर में मकर द्वार के बाहर एक दिलचस्प राजनीतिक नजारा देखने को मिला। टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी गद्दार लिखे पोस्टर लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। तभी वहां कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा पहुंचीं। इसके बाद दोनों के बीच पुरानी यादों और शिकायतों को लेकर हल्की-फुल्की बहस छिड़ गई। प्रियंका गांधी के साथ निर्दलीय सांसद पप्पू यादव भी थे।

आखिर पूरा मामला क्या है?
दरअसल, टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी को संसद से निलंबित किया गया था। वह मकर द्वार के बाहर विरोध प्रदर्शन कर रहे थे। तभी प्रियंका गांधी उनके पास पहुंचीं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, ‘आप लोगों ने कांग्रेस के नेताओं को तोड़ा और टीएमसी में मिला लिया।’ प्रियंका का इशारा उन कांग्रेस नेताओं की तरफ था, जो समय-समय पर पार्टी छोड़कर तृणमूल कांग्रेस में शामिल हुए हैं।
1997 के इतिहास पर क्या हुआ पलटावार?
प्रियंका के तंज पर कल्याण बनर्जी चुप नहीं रहे। उन्होंने तुरंत पलटवार किया और इतिहास की याद दिलाई। कल्याण बनर्जी ने कहा, ‘ममता बनर्जी को तो 1997 में कांग्रेस से बाहर निकाल दिया गया था। उनका कहना था कि ममता जी अपनी मर्जी से अलग नहीं हुई थीं, बल्कि उन्हें पार्टी से निकाला गया था। उसके बाद ही उन्होंने ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस बनाई। उन्होंने यह भी कहा कि मैं खुद युवा कांग्रेस में था। कांग्रेस ने पुराने नेताओं को किनारे लगा दिया, इस लिए आज पार्टी का ये हाल है। इस बीच पप्पू यादव कुछ कहने के लिए आगे बढ़े तो कल्याण बनर्जी ने कहा कि ‘पप्पू यादव सुनो’।
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राजीव गांधी के जिक्र पर दोनों में कैसी बनी सहमति?
बातचीत के दौरान प्रियंका गांधी ने अपने पिता और पूर्व प्रधानमंत्री का जिक्र किया। उन्होंने कहा, ‘राजीव गांधी ने हमेशा ममता बनर्जी को आगे बढ़ाया और बढ़ावा दिया।’ इस बात पर कल्याण बनर्जी ने भी सहमति जताई। उन्होंने माना कि अपने शुरुआती दिनों में ममता बनर्जी को राजीव गांधी का बहुत समर्थन मिला था। 1984 में जब ममता ने दिग्गज कम्युनिस्ट नेता सोमनाथ चटर्जी को हराया था, तब राजीव गांधी ने ही उन्हें पार्टी में आगे बढ़ाया था।
टीएमसी सांसदों की बगावत के बाद बनर्जी का प्रदर्शन
हाल के दिनों में तृणमूल कांग्रेस के भीतर सांसदों की बगावत और पार्टी छोड़कर अन्य दलों में शामिल होने या नया गुट बनाने की खबरों ने राजनीतिक सरगर्मियों को बढ़ा दिया है। पार्टी नेतृत्व से असंतुष्ट कुछ सांसदों द्वारा अन्य राजनीतिक दलों, विशेषकर एनसीपीआई जैसे गुटों में विलय की कोशिशों को TMC ने ‘विश्वासघात’ करार दिया है। संसद परिसर में ‘गद्दार’ लिखे पोस्टरों के साथ विरोध प्रदर्शन इसी अंदरूनी खींचतान और नाराजगी का नतीजा है, जहां पार्टी अपने बागी नेताओं पर सार्वजनिक रूप से निशाना साधकर कड़ा राजनीतिक संदेश देने की कोशिश कर रही है।

