
US Iran Tension: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव के बीच एक नया मोड़ सामने आया है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को कहा कि वह ईरान के नए प्रस्ताव की समीक्षा कर रहे हैं, लेकिन उन्हें शक है कि यह प्रस्ताव स्वीकार किया जा सकेगा. ट्रंप ने साफ कहा कि ईरान ने अपने पिछले कृत्यों की पर्याप्त कीमत नहीं चुकाई है.
‘प्रस्ताव स्वीकार करना मुश्किल’
डोनाल्ड ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर पोस्ट करते हुए कहा, “मैं जल्द ही उस योजना की समीक्षा करूंगा जो ईरान ने हमें भेजी है, लेकिन मुझे नहीं लगता कि यह स्वीकार्य होगी, क्योंकि उन्होंने पिछले 47 वर्षों में मानवता और दुनिया के साथ जो किया है, उसकी बड़ी कीमत अभी तक नहीं चुकाई है.”
एयर फोर्स वन में पत्रकारों से बातचीत
पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने कहा कि उन्होंने अभी तक प्रस्ताव को पूरी तरह नहीं देखा है. उन्होंने कहा, “नहीं, मैंने अभी नहीं देखा है. मैं इसे ऊपर (एयर फोर्स वन) में देख रहा हूं… बाद में आपको बताऊंगा.”

ईरान के प्रस्ताव में क्या है?
ईरान की तसनीम न्यूज़ एजेंसी के मुताबिक, तेहरान का 14-सूत्रीय प्रस्ताव सभी मोर्चों पर “युद्ध खत्म करने” के लिए एक व्यापक ढांचा पेश करता है, जिसमें लेबनान से जुड़े तनाव भी शामिल हैं. इस प्रस्ताव में किसी अस्थायी युद्धविराम को खारिज करते हुए 30 दिनों के भीतर स्थायी समाधान की बात कही गई है.
सुरक्षा और सैन्य मांगें
ईरान ने प्रस्ताव में भविष्य में हमलों को रोकने के लिए सुरक्षा गारंटी, क्षेत्र से अमेरिकी सैनिकों की वापसी और नौसैनिक प्रतिबंधों व नाकेबंदी हटाने की मांग की है. इसके अलावा ईरान ने अपने फ्रीज किए गए फंड्स की रिहाई और प्रतिबंधों व सैन्य दबाव से जुड़े मुआवजे की भी मांग रखी है.
आर्थिक और रणनीतिक शर्तें
आर्थिक मोर्चे पर ईरान ने अमेरिका और अंतरराष्ट्रीय सभी प्रतिबंध हटाने की मांग की है. साथ ही, प्रस्ताव में होर्मुज जलडमरूमध्य के लिए एक नई व्यवस्था बनाने की बात कही गई है, जिससे समुद्री व्यापार सुचारु बना रहे.
पाकिस्तान के जरिए भेजा गया प्रस्ताव
ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने बताया कि यह प्रस्ताव पाकिस्तान के माध्यम से भेजा गया है. उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य थोपा गया युद्ध स्थायी रूप से खत्म करना है और अब फैसला अमेरिका को करना है कि वह कूटनीति चुनेगा या टकराव.
ट्रंप ने जताई सख्ती, सैन्य विकल्प भी खुला
डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान समझौता करना चाहता है, लेकिन वहां की नेतृत्व व्यवस्था “बिखरी हुई” है. उन्होंने यह भी संकेत दिया कि जरूरत पड़ने पर सैन्य कार्रवाई की जा सकती है. उन्होंने कहा, “अगर वे गलत व्यवहार करते हैं तो यह एक संभावना है.” ईरान की मिसाइल क्षमता पर ट्रंप ने कहा, “मैं इसे खत्म करना चाहूंगा. यह उनके लिए फिर से निर्माण शुरू करने का एक तरीका होगा.” इससे पहले डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि अमेरिका जल्दबाजी में कोई समझौता नहीं करेगा और कोई भी डील ऐसी होनी चाहिए जो लंबे समय तक स्थिरता सुनिश्चित करे, ताकि 2 या 5 साल बाद फिर से हालात न बिगड़ें.
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