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‘रोने दो, पानी मत छोड़ो…’ IWT पर भारत के साथ खड़ा हुआ अफगानिस्तान, पाकिस्तान की जमकर की बेइज्जती

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सिंधु जल संधि को लेकर भारत के सख्त रुख ने पाकिस्तान की बेचैनी बढ़ा दी है, जहां इस्लामाबाद लगातार अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है, वहीं पाकिस्तान के पड़ोसी और लंबे समय से प्रतिद्वंद्वी रहे अफगानिस्तान में बड़ी संख्या में सोशल मीडिया यूजर्स भारत के फैसले का खुलकर समर्थन कर रहे हैं. कई अफगान नागरिकों का कहना है कि आतंकवाद को संरक्षण देने वाले पाकिस्तान के खिलाफ भारत को अपने फैसले पर कायम रहना चाहिए.

अफगान सोशल मीडिया पर भारत के समर्थन में पोस्ट
अफगानिस्तान में जीवन, न्याय, शिक्षा, समानता, स्वतंत्रता, एकता, प्रगति और शांति को बढ़ावा देने का दावा करने वाले एक एक्स हैंडल ‘फजल अफगान’ ने भारत के समर्थन में पोस्ट करते हुए लिखा, ‘प्रिय भारत, सिंधु जल को निलंबित रखिए. टीम 93 हजार को रोने दें. आतंकवाद और पानी साथ-साथ नहीं बह सकते.’ यह पोस्ट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है और कई अन्य अफगान यूजर्स भी इसी तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं.

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’93 हजार’ का जिक्र क्यों?
फजल अफगान ने अपनी पोस्ट के साथ एक वीडियो भी साझा किया, जिसमें भीड़ के बीच कुछ सैन्य वर्दियों की पतलून हवा में लहराती दिखाई दे रही हैं. पोस्ट में दावा किया गया कि यह वीडियो पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) का है, जहां लोग पाकिस्तानी सेना के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं. वीडियो के साथ कैप्शन लिखा गया, ‘सब कुछ अस्थायी है, लेकिन टीम 93 हजार की पैंट उतारने का समारोह ही स्थायी है.’

क्या है ’93 हजार’ का संदर्भ?
’93 हजार’ का संदर्भ 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध से जुड़ा है. 16 दिसंबर 1971 को तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) में करीब 93,000 पाकिस्तानी सैनिकों ने भारतीय सेना और मुक्ति वाहिनी के सामने आत्मसमर्पण किया था. ढाका के रेसकोर्स मैदान में पाकिस्तान के लेफ्टिनेंट जनरल ए.ए.के. नियाज़ी ने भारतीय लेफ्टिनेंट जनरल जगजीत सिंह अरोड़ा के सामने आत्मसमर्पण पत्र पर हस्ताक्षर किए थे.

सिंधु जल संधि पर भारत के फैसले से पाकिस्तान की चिंता
भारत द्वारा सिंधु जल संधि को लेकर अपनाए गए ताजा रुख के बाद पाकिस्तान लगातार अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान इस मुद्दे की ओर खींचने की कोशिश कर रहा है. इस्लामाबाद का कहना है कि यदि संधि को बहाल नहीं किया गया तो क्षेत्रीय जल सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय नियम-आधारित व्यवस्था पर असर पड़ सकता है.

पाकिस्तान ने इस मुद्दे पर एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन भी आयोजित किया, जहां उसने दावा किया कि सिंधु जल संधि का भविष्य वैश्विक व्यवस्था के लिए भी महत्वपूर्ण है. वहीं, पाकिस्तान में गर्मियों के दौरान संभावित जल संकट को लेकर भी चिंता जताई जा रही है.

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भारत ने CoA के फैसले को किया खारिज
भारत ने हाल ही में सिंधु जल संधि से जुड़े मामले में हेग स्थित कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन (Court of Arbitration) की कार्यवाही और उसके एकतरफा निर्णय को स्वीकार करने से इनकार किया. भारत का कहना है कि यह प्रक्रिया संधि के प्रावधानों के अनुरूप नहीं है और उसकी स्थिति पहले से स्पष्ट है.


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