संसद के मानसून सत्र में लगातार हंगामे और नारेबाजी को लेकर संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस सांसदों पर चर्चा से भागने, सदन में हंगामा करने और अपशब्दों का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘दिमागी नक्सल’ वाले बयान पर भी विपक्षी सांसदों को घेरने की कोशिश की।
मानसून सत्र के बर्बाद होने पर क्या कहा?
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा, जब कोई व्यक्ति काम नहीं करने का पक्का मन बना लेता है, तो उसे मनाने की कितनी भी कोशिश कर लें, कोई फर्क नहीं पड़ता। यह स्थिति कांग्रेस पार्टी की वजह से बनी है। हम बच्चों की बात नहीं कर रहे हैं कि उन्हें खींचकर ला सकें और जबरदस्ती बैठा सकें। हम ज्यादा से ज्यादा उनसे अनुरोध या विनती ही कर सकते हैं। हमने कांग्रेस पार्टी से बार-बार संसद में आने और बहस करने के लिए कहा। लेकिन वे ऐसा करना ही नहीं चाहते थे। ऐसा लगता है कि अब कांग्रेस सांसद मानते हैं कि उनकी भूमिका सिर्फ हंगामा करना, चिल्लाना और अपशब्द कहना है।
उन्होंने कहा, अगर कोई सांसद सिर्फ हंगामा करना चाहता है, तो उसके सांसद होने की जरूरत ही क्या है? वह सड़कों पर जाकर प्रदर्शन कर सकता है। मेरा मानना है कि कांग्रेस सांसदों ने खुद को यह समझ लिया है कि उनका काम बोलना नहीं, बल्कि हंगामा करना और अपशब्दों का इस्तेमाल करना है।
ये भी पढ़ें: भाजपा संसदीय बोर्ड में अगला बड़ा सवाल- योगी या फडणवीस…? एक के पास जनाधार, दूसरे के पास रणनीति
अमित शाह से बयान की मांग पर क्या बोले रिजिजू?
संसद में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बयान की कांग्रेस की मांग पर रिजिजू ने कहा, कांग्रेस पार्टी संसद का सामना करने से डर गई। इसी वजह से उन्होंने चर्चा से भागने का बहाना बनाया। जब सरकार हर सवाल का जवाब देने और स्थिति व दूसरी सभी जानकारियां समझाने के लिए तैयार थी, तब कांग्रेस पार्टी भागने लगी, सिर्फ इसलिए क्योंकि वह सच्चाई का सामना करने की स्थिति में नहीं थी।
गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ विपक्ष के प्रदर्शन पर संसदीय कार्य मंत्री ने कहा, हम पहले दिन से कह रहे थे कि हम चर्चा चाहते हैं। लेकिन उन्होंने इसे मानने से साफ इनकार कर दिया। वे सिर्फ बहाने बना रहे थे। संसद का सत्र शुरू होने से पहले ही उन्होंने नारेबाजी शुरू कर दी थी।
उन्होंने कहा, समस्या यह है कि कांग्रेस सांसद और कई दूसरे सांसद मेरे पास आकर कहते हैं कि संसद को चलाने के लिए मैं कुछ करूं। मैं उनसे पूछता हूं- मुझसे क्यों कह रहे हैं? राहुल गांधी से जाकर बात करो। आखिर संसद में कांग्रेस के सदस्य वही करते हैं, जो राहुल गांधी कहते हैं।
‘राहुल गांधी की ब्रिगेड का काम हंगामा करना’
उन्होंने आगे कहा, कांग्रेस के कई सांसद मेरे पास आकर अपनी नाराजगी और दुख जाहिर कर चुके हैं कि कोई चर्चा नहीं हो रही है। राहुल गांधी ने एक ‘ब्रिगेड’ बना रखी है, जिसका एकमात्र काम हंगामा करना और गालियां देना है। जो सांसद वास्तव में अपनी बात रखना चाहते हैं, उन्हें नारेबाजी करने वालों के सिर्फ समर्थक बनाकर छोड़ दिया गया है। यह सही नहीं है, यह लोकतंत्र के लिए अच्छा नहीं है।
राहुल गांधी के उस दावे पर कि सरकार जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन को लेकर जवाबदेही तय करने के लिए तैयार नहीं है, रिजिजू ने कहा, आपने शुरू से ही संसदीय प्रक्रिया देखी है और यह भी देखा है कि राहुल गांधी सदन के अंदर किस तरह का व्यवहार करते हैं। क्या वह विपक्ष के नेता जैसे नजर आते हैं? राहुल गांधी से मुझे कोई निजी समस्या नहीं है। हम बातचीत करते हैं और मिलते भी हैं। लेकिन विपक्ष के नेता को इस तरह काम करना चाहिए कि उनके पद की गरिमा और सम्मान बना रहे। उन्हें उसी के अनुसार सदन में बोलना चाहिए। राहुल गांधी ने जिस खास तरह की शैली को अपनाया है, उनके सांसद भी उसी तरह व्यवहार करने लगे हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश नीति पर राहुल गांधी की टिप्पणी पर रिजिजू ने कहा, राहुल गांधी ने नाटकीय अंदाज में प्रधानमंत्री का मजाक उड़ाने की कोशिश की। लेकिन आखिर में वह खुद ही मजाक का पात्र बन गए। उन्होंने अपने व्यक्तित्व और छवि को बहुत नुकसान पहुंचाया है। इससे उबरना उनके लिए मुश्किल होगा।
समाजवादी पार्टी के इस आरोप पर कि सरकार कथित राम मंदिर चढ़ावा मामले और दूसरे मुद्दों पर बहस करने से इनकार कर रही थी, संसदीय कार्य मंत्री ने कहा, हम वास्तव में छात्र आंदोलन पर चर्चा के लिए तैयार थे। सभी मुद्दों पर एक साथ चर्चा नहीं की जा सकती।
‘दिमागी नक्सल’ वाले विवाद पर क्या कहा?
पीएम मोदी के दिमागी नक्सल वाले बयान पर विवाद को लेकर रिजिजू ने कहा, एक तरह से कांग्रेस पार्टी खुद को माओवादी और नक्सली संगठन में बदल चुकी है। पहले (कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष) सोनिया गांधी की अध्यक्षता वाली राष्ट्रीय सलाहकार परिषद में ऐसी विचारधारा रखने वाले लोगों का दबदबा था। लेकिन अब पूरी कांग्रेस पार्टी ही माओवादी पार्टी में बदलती हुई दिखाई दे रही है। पहले ही मुस्लिम लीग जैसी बन चुकी कांग्रेस अब माओवादी पार्टी बनने की दिशा में भी आगे बढ़ रही है। प्रधानमंत्री की बात का मतलब यह है।
‘यही बात (पूर्व प्रधानमंत्री) मनमोहन सिंह भी कह चुके थे कि माओवाद और नक्सलवाद देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा खतरा हैं और उन्हें खत्म करना जरूरी है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश के खिलाफ हथियार उठाकर लड़ने वाले नक्सलियों को काफी हद तक खत्म कर दिया गया है। लेकिन उनकी विचारधारा शहरी इलाकों में अभी भी मौजूद है और उससे भी निपटना जरूरी है।’
उन्होंने आगे कहा, कांग्रेस को लगा कि यह बात उनके बारे में है। मैंने साफ तौर पर समझाया कि नक्सलवाद का मतलब क्या है और ‘दिमागी नक्सल’ कौन हैं। ये वे लोग हैं जो देश को टुकड़ों में बांटने की बात करते हैं, अनुच्छेद 370 का समर्थन करते हैं या पूर्वोत्तर को अलग करने की मांग करते हैं।
रिजिजू ने कहा, उन्हें उन परिवारों के प्रति कोई सहानुभूति नहीं होती, जिनके लोग नक्सलवाद का शिकार होते हैं। चाहे वे सेना, सीआरपीएफ, एसएसबी, बीएसएफ, आईटीबीपी, सीआईएसएफ या एनएसजी के जवान हों, ये माओवादी और बौद्धिक नक्सली ऐसे लोगों के मारे जाने पर जश्न मनाते हैं। यही मेरा मतलब ‘दिमागी नक्सल’ से है और यह सोचकर हैरानी होती है कि क्या कांग्रेस भी इसी विचारधारा को मानती है।

