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मेटा स्मार्ट ग्लास: अब नोटिफिकेशन लाइट को छिपाकर नहीं बना सकते वीडियो, बढ़ रहे प्राइवेसी उल्लंघन के मामले – Now You Cant Record Video Hiding Notification Light On Meta Ai Glasses Updates Privacy Guidelines

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सार

मेटा के स्मार्ट चश्मों से प्राइवेसी उल्लंघन के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। ज्यादातर शिकायतें छुपकर वीडियो बनाने और उसे इंटरनेट पर अपलोड करने से जुड़े हैं। मेटा ने साल 2025 में 70 लाख से ज्यादा एआई स्मार्ट ग्लास की बिक्री की हैं। ऐसे में इन चश्मों से जुड़े प्राइवेसी उल्लंघन के बढ़ते मामले वाकई में चिंताजनक हैं।

स्मार्ट गैजेट्स हमारी जिंदगी को आसान बनाते हैं, लेकिन जब बात निजता की आती है, तो कई बार ये खतरे की घंटी भी साबित होते हैं। वियरेबल टेक्नोलॉजी के बढ़ते चलन के बीच स्मार्ट चश्मों से बिना इजाजत वीडियो रिकॉर्ड करने के मामले तेजी से बढ़ रहे थे। इस गंभीर समस्या और यूजर्स की लगातार उठ रही चिंताओं को देखते हुए टेक दिग्गज मेटा ने अपने लोकप्रिय एआई ग्लास में कई अहम सुरक्षा अपडेट किए हैं। इन बदलावों का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी व्यक्ति सार्वजनिक जगहों पर दूसरों की सहमति के बिना उनका वीडियो न बना सके।

कैमरे की लाइट से छेड़छाड़ करने पर रिकॉर्डिंग होगी बंद

  • मेटा के इन स्मार्ट चश्मों में एक एलईडी लाइट दी गई है, जो वीडियो रिकॉर्डिंग शुरू होने पर जलने लगती है। इससे सामने वाले व्यक्ति को पता चल जाता है कि उसे कैमरे में कैद किया जा रहा है। हाल ही में कंपनी ने इस सिस्टम को और भी सख्त बना दिया है।
  • नए अपडेट के अनुसार, अगर कोई यूजर रिकॉर्डिंग के दौरान इस लाइट को किसी चीज से ढकने या उससे छेड़छाड़ करने की कोशिश करता है, तो कैमरे का रिकॉर्डिंग फंक्शन अपने आप डिसेबल हो जाएगा। पहले के सिस्टम में रिकॉर्डिंग शुरू करने से पहले लाइट को ब्लॉक करना पड़ता था, लेकिन अब रिकॉर्डिंग शुरू होने के बाद भी अगर लाइट को छिपाने की कोशिश की गई, तो वीडियो बनना तुरंत रुक जाएगा।

बिना इजाजत वीडियो बनाने के मामलों ने बढ़ाई चिंता

  • इन चश्मों के गलत इस्तेमाल की खबरें पिछले कुछ समय से लगातार आ रही थीं। हाल ही में एक ऐसा मामला सामने आया था जहां एक महिला को सोशल मीडिया पर अपना ही एक वीडियो मिला, जिसे उसकी जानकारी और अनुमति के बिना किसी अनजान व्यक्ति ने स्मार्ट चश्मे से रिकॉर्ड किया था।
  • इसके अलावा प्रैंक और आपत्तिजनक कंटेंट बनाने वाले भी इन चश्मों का जमकर दुरुपयोग कर रहे हैं। इन घटनाओं पर संज्ञान लेते हुए मेटा ने ऐसे हजारों पोस्ट हटा दिए हैं और नियमों का उल्लंघन करने वाले हैशटैग और सर्च टर्म्स को भी ब्लॉक कर दिया है।

डेटा प्राइवेसी विवाद से मेटा पर बढ़े मुकदमे

मेटा पर यह दबाव सिर्फ यूजर्स की शिकायतों तक सीमित नहीं है। कंपनी को मार्च महीने में दायर किए गए एक क्लास-एक्शन मुकदमे का भी सामना करना पड़ रहा है। स्वीडिश मीडिया की एक जांच में यह आरोप लगाया गया था कि कंपनी इन चश्मों से रिकॉर्ड किए गए कंटेंट को स्टोर कर रही है और अपने एआई मॉडल को प्रशिक्षित करने के लिए उसे मानव समीक्षकों के पास भेज रही है। प्राइवेसी से जुड़े इन गंभीर दावों के बावजूद बाजार में इन चश्मों का दबदबा कायम है और साल 2025 में मेटा ने इसके 70 लाख से अधिक यूनिट्स बेचे थे।

जागरूकता के लिए मेटा चला रही अभियान

लोगों के बीच विश्वास बहाल करने और सुरक्षा को पुख्ता करने के लिए मेटा अब एक बड़ा जागरूकता अभियान चला रही है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और बिलबोर्ड्स के जरिए आम जनता को यह बताया जा रहा है कि जब कोई व्यक्ति स्मार्ट चश्मे से रिकॉर्डिंग करता है, तो उसकी पहचान कैसे की जाए। साथ ही कंपनी ने इंटरनेट से उन सभी पोस्ट और ट्यूटोरियल्स को भी हटाना शुरू कर दिया है, जिनमें इन स्मार्ट चश्मों की सुरक्षा से छेड़छाड़ करने के तरीके बताए गए थे।

भारत में भी दर्ज हुए मामले

हाल ही में एक कंटेंट क्रिएटर पर मेटा स्मार्ट चश्मे से बिना अनुमति के रिकॉर्डिंग करने और वीडियो पोस्ट करने का एक मामला सामने आया है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि मेटा के स्मार्ट चश्मे से उसकी वीडियो रिकॉर्ड कर इंस्टाग्राम रील के तौर पर पोस्ट कर दी गई। उसके साथ यह घटना 24 अगस्त को दिल्ली के खान मार्केट के पास हुई। इस मामले में मेटा और कंटेट क्रिएटर को दिल्ली हाई कोर्ट के तरफ से नोटिस भेजा गया है। शिकायतकर्ता का यह भी आरोप है कि इंस्टाग्राम पर वीडियो को रिपोर्ट करने के बावजूद उसे नहीं हटाया गया।

मेटा ने कहा- रिकॉर्डिंग पर नहीं लग सकती रोक

इंस्टाग्राम प्रमुख एडम मोसेरी ने भी हाल में कहा था कि मेटा लोगों को दूसरों की रिकॉर्डिंग करने से पूरी तरह नहीं रोक सकता। हालांकि, कंपनी यह सुनिश्चित करने की कोशिश करती है कि रिकॉर्डिंग के दौरान संकेत देने वाली लाइट सक्रिय रहे, ताकि दूसरों को पता चल सके कि उनकी रिकॉर्डिंग हो रही है।

सार्वजनिक जगहों पर रिकॉर्डिंग के लिए क्या है कानून?

संविधान का अनुच्छेद 19(1)(a) नागरिकों को अभिव्यक्ति और सूचना इकट्ठा करने की आजादी देता है। हालांकि, यह आजादी असीमित नहीं है। अगर रिकॉर्डिंग से किसी के अधिकारों का उल्लंघन होता है, तो कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

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