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मानसून सत्र:विपक्ष की आपदा को अवसर बनाने की तैयारी में सरकार, तीन महीनों में कैसे पलटा सियासी गणित? – Monsoon-session-2026-opposition-unity-nda-strategy-constitutional-amendment-bills

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सोमवार से शुरू हो रहे संसद के मानसून सत्र में अचानक बदले सियासी समीकरण का असर कई मोर्चे पर दिखेगा। सत्र की शुरुआत से पहले इंडिया ब्लॉक के दो अहम दलों तृणमूल, शिवसेना यूबीटी के साथ आप में टूट के साथ बदली परिस्थितियों में द्रमुक-कांग्रेस के बीच बनी दूरी के कारण कांग्रेस के सामने विपक्षी एकता को थामे रखने की चुनौती होगी।

दूसरी ओर बीते सत्र में विपक्षी एकता के सामने पस्त मोदी सरकार राजग का कुनबा बढ़ने से नए उत्साह में होगी। मानसून सत्र महिला आरक्षण-परिसीमन के अलावा न्यायिक हिरासत के बाद प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, मंत्री के पद छोड़ने की बाध्यता से जुड़े संविधान संशोधन विधेयकों के लिए पहले से चर्चा में है। केंद्र में 2014 में सत्ता परिवर्तन के बाद मोदी सरकार का पहली बार सबसे मजबूत विपक्षी एकता से बीते बजट सत्र में सामना हुआ था। तब संख्याबल के अभाव में महिला आरक्षण व परिसीमन विधेयक पर मोदी सरकार को मुंहकी खानी पड़ी थी।

विपक्ष का कुनबा घटा, राजग का बढ़ा 

अब लोकसभा में राजग की सदस्यों की संख्या 292 से बढ़ कर 318 हो गई है। राज्यसभा में भाजपा के सदस्यों की संख्या 103 से बढ़कर 117 हो गई है। बदली परिस्थितियों में भाजपा विधायी कार्यों को अंजाम तक पहुंचाने के द्रमुक, एनसीपी (शरद) को साधने में जुटी है। एनसीपी (शरद) ने राजग में शामिल होने के संकेत भी दिए हैं।

तीन माह में बदल गए समीकरण

अप्रैल महीने में बजट सत्र के दौरान मोदी सरकार विपक्ष की चट्टानी एकता के सामने असहाय दिखी थी। हालांकि सत्र के समाप्त होते ही इसी महीने आप के राज्यसभा के सात सांसदों ने भाजपा का दामन थामा। रही सही कसर प. बंगाल व तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के नतीजे ने पूरी कर दी। नतीजों के बाद प्रमुख विपक्षी दलों तृणमूल और शिवसेना यूबीटी में बड़ी टूट हुई। इसके इतर तमिलनाडु में कांग्रेस का टीवीके के साथ जाने के फैसले के बाद डीएमके ने कांग्रेस से दूरी बना ली।

सरकार लगाएगी पूरा जोर

सरकार की योजना विपक्षी खेमे में छाए आपदा को खुद के लिए अवसर में बदलने की है। सरकार इसका लाभ उठा कर महिला आरक्षण, परिसीमन, न्यायिक हिरासत में 30 दिन रहने पर पीएम, सीएम, मंत्रियों की पद से छुट्टी, एक देश एक चुनाव से जुड़े संविधान विधेयकों को पारित कराना चाहती है।

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