सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की याचिका पर तुरंत सुनवाई के लिए मंजूरी दे दी। इस याचिका में तृणमूल कांग्रेस का नाम और पार्टी का चुनाव चिह्न फ्रीज करने के चुनाव आयोग के फैसले को चुनौती दी गई है। टीएमसी की तरफ से पेश हुए वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्य कांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच के सामने तुरंत सुनवाई की मांग की थी।
सिब्बल ने कहा, ‘वे एक नोटिफिकेशन जारी करते हैं और नोटिफिकेशन के बीच में ही वे चुनाव चिह्न को फ्रीज कर देते हैं। यह क्या हो रहा है? हम चाहते हैं कि इस मामले को तुरंत सूचीबद्ध किया जाए।’
चुनाव आयोग ने क्या दिया था फैसला?
चुनाव आयोग ने शुक्रवार को ममता बनर्जी और ऋतब्रत बनर्जी के विरोधी गुटों को अलग-अलग नाम और चुनाव चिह्न आवंटित किए थे। इससे एक दिन पहले आयोग ने अपने अंतरिम फैसले में दोनों गुटों को ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम का इस्तेमाल करने से रोक दिया था और विवाद पर अंतिम फ़ैसला होने तक पार्टी के चुनाव चिह्न को फ्रीज कर दिया था।
सुप्रीम कोर्ट में दायर अपनी याचिका में बनर्जी ने चुनाव आयोग और पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी को प्रतिवादी बनाया है। 18 सितंबर को बनर्जी ने तृणमूल कांग्रेस का नाम और ‘जोड़ा घास-फूल’ चुनाव चिह्न फ्रीज़ करने के चुनाव आयोग के फ़ैसले की आलोचना की थी। उन्होंने पार्टी की पहचान खोने की तुलना एक माँ के अपने बच्चे को खोने के दर्द से की थी और इसे देश के लोकतांत्रिक इतिहास में एक ‘काला दिन’ बताया था।


