
- महंगे प्रीमियम के बावजूद आठ फीसदी हेल्थ क्लेम खारिज हुए।
- IRDAI ने क्लेम खारिज करने पर ठोस कारण बताना अनिवार्य किया।
- पॉलिसीधारकों को अब अस्वीकृति के सही कारण जानने में मदद मिलेगी।
- बीमा कंपनियों को कैशलेस अनुरोध एक घंटे में निपटाना होगा।
Health Insurance: आजकल की बढ़ती बीमारियों को देखते हुए हेल्थ इंश्योरेंस लेना बेहद जरूरी हो गया है. कोरोना महामारी के बाद हेल्थ इंश्योरेंस लेने वालों की संख्या तेजी से बढ़ी है. महंगे इलाज से बचने के लिए लोग महंगा प्रीमियम चुकाकर हेल्थ इंश्योरेंस ले रहे हैं. वहीं, कंपनियां साल दर साल प्रीमियम महंगा भी करती जा रही है. इसके बावजूद बहुत सारे लोगों को क्लेम नहीं मिल रहा है. एक रिपोर्ट के मुताबिक, FY25 में लगभग हर 12 में से एक हेल्थ इंश्योरेंस क्लेम को खारिज कर दिया गया.
आंकड़ा क्या बताता है?
एक आंकड़े के अनुसार, 2024-25 में इंश्योरेंस कंपनियों ने साल के दौरान 3.26 करोड़ हेल्थ इंश्योरेंस क्लेम दाखिल किए और 94,248 करोड़ का भुगतान किया. हालांकि, करीब 8% क्लेम खारिज कर दिए गए, जिसका मतलब है कि क्लेम करने वाले लगभग हर 12 पॉलिसीहोल्डर्स में से एक को भुगतान नहीं मिला.
क्रेडिट कार्ड चोरी होते ही करें ये काम, नहीं तो खाली हो सकता है अकाउंट, जानें
IRDAI ने क्या कहा है?
अब, इंश्योरेंस रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया (IRDAI) ने कड़ा कदम उठाया है. IRDAI ने रेगुलेटर के नए सुधारों के तहत साफ कहा कि कंपनियों को क्लेम रिजेक्ट करने पर मजबूत कारण बताना होगा और उन खास पॉलिसी शर्तों का जिक्र करें, जिनके आधार पर क्लेम रिजेक्ट का फैसला लिया गया है. यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब क्लेम प्रक्रिया करने के समय में सुधार के बावजूद क्लेम से जुड़ी शिकायतें बढ़ रही हैं.
क्या होगा फायदा?
इसमें सख्ती के बाद पॉलिसीहोल्डर्स के लिए यह पता लगाना आसान हो जाएगा कि क्लेम रिजेक्ट होना सही है या नहीं, और जरूरत पड़ने पर वह शिकायत रोक थाम वाले चैनलों या इंश्योरेंस ओम्बड्समैन के जरिए इस मामले को आगे बढ़ा सकते हैं. यह सुधार रेगुलेटर द्वारा शुरू किए गए क्लेम से जुड़े कई आइडिया पर आधारित है. अब इंश्योरेंस कंपनियों के लिए जरूरी है कि वे कैशलेस प्री-ऑथराइजेशन रिक्वेस्ट को एक घंटे के भीतर प्रोसेस करें और अस्पतालों से फाइनल रिक्वेस्ट मिलने के तीन घंटे के भीतर डिस्चार्ज के फ़ैसले की जानकारी दें.
NCR में बसेंगे 4 नए शहर, 5 साल में खर्च होंगे 5000 करोड़, क्या है ‘नमो सिटीज’ का मास्टरप्लान

