Income Tax Refund News: अगर टीडीएस कट गया है, लेकिन टैक्स देनदारी नहीं बनती तो क्या बिना आईटीआर भरे रिफंड मिल सकता है? इस मामले को लेकर दाखिल एक पीआईएल पर दिल्ली हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार से जवाब मांगा है.
पीआईएल में इनकम टैक्स एक्ट 2025 की धारा 433 पर सवाल उठाया गया है. इस नियम के तहत TDS रिफंड लेने के लिए आईटीआर दाखिल करना अनिवार्य है. याचिकाकर्ता का कहना है कि जिन लोगों की टैक्स देनदारी शून्य है और जिन्हें रिटर्न भरना जरूरी नहीं है, उन्हें केवल रिफंड हासिल करने के लिए आईटीआर दाखिल करने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए.
याचिका में क्या मांग की गई है?
याचिकाकर्ता ने कोर्ट से अपील की है कि जिन लोगों की टैक्स देनदारी नहीं बनती, उन्हें बिना बिना आईटीआर दाखिल किए टीडीएस रिफंड की सुविधा दी जाए. इसके लिए केंद्र सरकार और सीबीडीटी को ऑटोमैटिक टीडीएस रिफंड सिस्टम शुरू करने का निर्देश देने की मांग की गई है, ताकि आईटीआर से छूट प्राप्त लोगों को सिर्फ रिफंड के लिए रिटर्न दाखिल न करना पड़े.
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किन लोगों को होगा फायदा?
याचिका के मुताबिक, मौजूदा नियमों से सीनियर सिटिजन, कम आय वाले कर्मचारियों और अन्य लोगों को परेशानी होती है, जिन्हें टीडीएस रिफंड के लिए भी आईटीआर दाखिल करना पड़ता है. याचिका में कहा गया है कि सरकार के पास पहले से ही पैन, आधार, फार्म 26AS और टीडीएस रिकॉर्ड मौजूद है. इसलिए पात्र लोगों का रिफंड स्वतः जारी किया जा सकता है.
2.35 करोड़ लोगों का हवाला
याचिका के अनुसार, करीब 2.35 करोड़ लोगों का टीडीएस क्रेडिट दर्ज था, लेकिन उन्होंने आईटीआर नहीं भरा. समिति ने छोटे करदाताओं के लिए टीडीएस रिफंड हेतु आईटीआर की अनिवार्यता हटाने की सिफारिश की थी.
क्या अभी बिना ITR रिफंड मिलेगा?
अभी तक नियमों में कोई बदलाव नहीं किया गया है. कोर्ट या सरकार की ओर से कोई नया निर्णय आने तक TDS रिफंड के लिए मौजूदा प्रक्रिया ही जारी रहेगी. जिन मामलों में ITR दाखिल करना जरूरी है, वहां करदाताओं को रिटर्न भरना होगा.
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