जबलपुर के बरगी डैम में हुए क्रूज हादसे को लेकर सामने आ रही तकनीकी जानकारी में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। मध्यप्रदेश पर्यटन निगम के एडवाइजर (पूर्व नौसेना अधिकारी) कमांडर राजेंद्र निगम ने दावा किया है कि यह हादसा किसी सामान्य तकनीकी खराबी से नहीं, बल्कि असामान्य प्राकृतिक परिस्थितियों के कारण हुआ। उन्होंने बताया कि यह क्रूज आधुनिक तकनीक से बना था और इसकी डिजाइन काफी स्थिर मानी जाती है। इस तरह के क्रूज को पलटना आसान नहीं होता, यहां तक कि भारी मशीनों से भी इसे हिलाना मुश्किल होता है। इसके बावजूद जिस तरह यह हादसा हुआ, वह असाधारण स्थिति को दर्शाता है।
क्या बनी थी स्थिति?
कमांडर निगम के अनुसार, हादसे के वक्त तेज आंधी-तूफान के बीच पानी में दो विपरीत दिशा की लहरें (वेव) बनीं। एक लहर नीचे की ओर दबाव बना रही थी और दूसरी लहर ने जहाज के निचले हिस्से (हल) को ऊपर की ओर उठा दिया। इसी दौरान 50 से 60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवा चली। इन तीनों स्थितियों के एक साथ बनने से संतुलन बिगड़ गया और क्रूज पलट गया। उन्होंने इसे “बरमूडा ट्रायंगल जैसी दुर्लभ स्थिति” बताया।
पढ़ें: गर्दन तक पानी, ठंड से कंपकंपाता शरीर और थमने को थीं सांसें; कैसे मौत के मुंह से बाहर आए रियाज?
तकनीकी रूप से मजबूत था क्रूज
कमांडर निगम ने बताया कि क्रूज में जॉन डियर का 4-स्ट्रोक इंजन लगा था। यह प्रदूषण नियंत्रण मानकों के अनुरूप था और नियमित मेंटेनेंस और प्रशिक्षण की व्यवस्था भी की जाती थी। उन्होंने बताया कि क्रूज को वर्ष 2006 में हैदाराबाद बोट बिल्डर्स से खरीदा था, जिसकी लागत करीब 90 लाख रुपये बताई गई। कमांडर निगम ने बताया कि क्रूज संचालन में अंतरराष्ट्रीय मानकों जैसे IMO (अंतर्राष्ट्रीय मैरिटाइम संगठन) और अन्य सुरक्षा प्रोटोकॉल का ध्यान रखा जाता है। इसके साथ ही प्रदूषण नियंत्रण और बीमा जैसी आवश्यक व्यवस्थाएं भी लागू थीं।
फिर भी क्यों हुआ हादसा?
पूर्व नौसेना अधिकारी कमांडर निगम ने बताया कि यह घटना एक “रेयरेस्ट ऑफ रेयर” प्राकृतिक परिस्थिति का परिणाम हो सकती है, जहां तेज हवा, लहरों का असामान्य दबाव और जल की गति एक साथ मिलकर संतुलन बिगाड़ देती है। बता दें इस मामले में सरकार ने हादसे की जांच के आदेश दे दिए हैं।


