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फैक्ट्री रीसेट करने ने नहीं मिटता पूरा डेटा:69% भारतीय पुराना स्मार्टफोन बेचने से कतरा रहे, डेटा लीक का है डर – 70 Percent Indian Consumers Not Willing To Sell Old Smartphone Due To Data Privacy Threat Cashify Survey

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अगर आप नया स्मार्टफोन खरीदना चाहते हैं तो पुराने हैंडसेट को बेचकर नया खरीदने के बारे में जरूर सोचते होंगे। भारत में कई कंपनियां एक्सचेंज ऑफर में नया स्मार्टफोन बेचती हैं। लेकिन एक हालिया रिसर्च में सामने आया है कि ज्यादातर भारतीय अपने पुराने स्मार्टफोन को बेचने से बच रहे हैं।

लोग पुराना स्मार्टफोन बेचकर नया खरीदने के बजाए उसे घर पर ही रखना पसंद कर रहे हैं। इसकी वजह पुराने हैंडसट से लगाव नहीं बल्कि एक चीज को लेकर डर है, जिसके चलते लोग पुराना स्मार्टफोन बेचने से कतराते हैं।




70 percent Indian consumers not willing to sell old smartphone due to data privacy threat cashify survey

फोन रीसेल करने से प्राइवेसी जाने का डर
– फोटो : एआई जनरेटेड


फोन रीसेल करने से प्राइवेसी जाने का डर

  • मोबाइल रिसेलिंग प्लेटफॉर्म कैशिफाई (Cashify) के एक ताजा सर्वे ने भारत के सेकंड-हैंड स्मार्टफोन बाजार की एक बड़ी सच्चाई को उजागर किया है। 8,000 लोगों पर किए गए इस सर्वे के मुताबिक, 69% भारतीय महज इसलिए अपना पुराना फोन नहीं बेचते क्योंकि उन्हें अपनी प्राइवेसी छिनने का डर सताता है।
  • आंकड़े बताते हैं कि 56.6% लोगों ने कभी न कभी अपना फोन बेचा या एक्सचेंज किया है, जो यह दर्शाता है कि पुराने फोन का बाजार अब मुख्यधारा का हिस्सा बन चुका है। लेकिन इसके बावजूद, 74% उपभोक्ताओं के मन में यह खौफ बना रहता है कि फोन बिकने के बाद उनके निजी डेटा का गलत इस्तेमाल हो सकता है।


70 percent Indian consumers not willing to sell old smartphone due to data privacy threat cashify survey

भरोसेमंद नहीं रीसेलिंग
– फोटो : एआई जनरेटेड


बढ़ रही है भागीदारी, लेकिन भरोसा नहीं

  • कैशिफाई के सह-संस्थापक नकुल कुमार का कहना है कि स्मार्टफोन रीसेल बाजार में लोगों की भागीदारी और जागरूकता दोनों बढ़ रही हैं, लेकिन डेटा सुरक्षा की जिम्मेदारी अब भी पूरी तरह उपभोक्ताओं पर ही है।
  • उन्होंने कहा कि आज के स्मार्टफोन में वर्षों का निजी, वित्तीय और पहचान से जुड़ा डेटा मौजूद होता है। ऐसे में जब रीसेल बाजार का आकार बढ़ रहा है, तो डेटा सुरक्षा को सिर्फ व्यक्ति की जिम्मेदारी मानना सही नहीं होगा। संगठित प्लेटफॉर्म और इस क्षेत्र से जुड़े सिस्टम को इसे अपनी प्राथमिक जिम्मेदारी बनाना चाहिए।


70 percent Indian consumers not willing to sell old smartphone due to data privacy threat cashify survey

प्राइवेसी की बढ़ी अहमियत
– फोटो : AI


अब कीमत से ज्यादा मायने रखती है प्राइवेसी

  • सर्वे के मुताबिक, जब लोग अपना स्मार्टफोन बेचने के लिए प्लेटफॉर्म चुनते हैं तो 45.3% लोग डेटा प्राइवेसी और सुरक्षा को सबसे महत्वपूर्ण मानते हैं। इसके विपरीत केवल 29.5% लोग कीमत को प्राथमिकता देते हैं।
  • यह बदलाव दिखाता है कि अब उपभोक्ता सिर्फ अधिक पैसे पाने पर ध्यान नहीं दे रहे, बल्कि यह भी सोच रहे हैं कि फोन सौंपने के बाद उनके डेटा का क्या होगा।

 

डेटा डिलीशन सर्टिफिकेट की बढ़ी मांग

  • सर्वे के अनुसार, 68.6% लोग ऐसे रीसेल प्लेटफॉर्म पर अधिक भरोसा करते हैं जो प्रमाणित सुरक्षित डेटा डिलीशन की सुविधा प्रदान करते हैं। वहीं, 83.3% लोगों का कहना था कि स्मार्टफोन बेचते समय डेटा डिलीशन सर्टिफिकेट मिलना बेहद जरूरी है।
  • दिलचस्प बात यह है कि 50.8% लोग सुरक्षित डेटा डिलीशन की गारंटी के लिए अतिरिक्त शुल्क देने को भी तैयार हैं। हालांकि, कैशिफाई का मानना है कि डेटा सुरक्षा कोई वैकल्पिक सुविधा नहीं, बल्कि संगठित प्लेटफॉर्म की मूल जिम्मेदारी होनी चाहिए।


70 percent Indian consumers not willing to sell old smartphone due to data privacy threat cashify survey

फैक्ट्री रीसेट करना काफी नहीं
– फोटो : एआई जनरेटेड


क्या फैक्ट्री रीसेट काफी है?

  • सर्वे में शामिल 83.3% लोगों ने कहा कि वे फोन बेचने से पहले फैक्ट्री रीसेट करते हैं। हालांकि, 41.1% लोगों ने कहा कि केवल फैक्ट्री रीसेट करने से डेटा हमेशा के लिए खत्म नहीं होता। और भी हैरान करने वाली बात यह है कि 31% लोगों ने दावा किया कि वे किसी फोन से डिलीट किए गए डेटा को दोबारा रिकवर करने में सफल रहे हैं।
  • कैशिफाई के सह-संस्थापक और सीईओ मंदीप मनोचा के अनुसार, अधिकांश लोग डेटा डिलीट करने, फैक्ट्री रीसेट करने और सुरक्षित डेटा मिटाने की प्रक्रिया के बीच का अंतर नहीं समझते। उन्होंने बताया कि फैक्ट्री रीसेट करने पर फोन से फाइलों और एप्स की सामान्य पहुंच हट जाती है, लेकिन कई मामलों में स्टोरेज में मौजूद मूल डेटा पूरी तरह नष्ट नहीं होता। 
  • विशेष रिकवरी टूल्स की मदद से उसे दोबारा हासिल किया जा सकता है। इसके विपरीत, प्रमाणित और सुरक्षित डेटा डिलीशन प्रक्रिया स्टोरेज में मौजूद जानकारी को इस तरह ओवरराइट करती है कि उसे दोबारा प्राप्त करना लगभग असंभव हो जाता है।


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