अमेरिका में काम करने वाले भारतीयों की मुश्किल बढ़ने वाली है, खासतौर से वो भारतीय जो H1-B वीजा पर अमेरिका गए हुए हैं. ऐसा इसलिए क्योंकि ट्रम्प प्रशासन ने किसी भी ऐसे भारतीय की नौकरी जाने के बाद मिलने वाली 60 दिन की ग्रेस पीरियड को खत्म करने का प्रस्ताव दिया है. हालांकि, अभी ये नियम लागू नहीं हुआ है और फिलहाल मौजूदा 60 दिन की सुविधा जारी है.
अमेरिकी डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी (DHS) ने इस सुविधा को खत्म करने का प्रस्ताव तैयार किया है. इस प्रस्ताव को 27 अगस्त को व्हाइट हाउस के ऑफिस ऑफ इन्फॉर्मेशन एंड रेग्युलेटरी अफेयर्स (OIRA) से रिव्यू की मंजूरी मिल गई है.
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क्या होगा इस फैसले का असर?
अगर ये प्रस्ताव अंतिम नियम बन जाता है, तो नौकरी जाने के बाद विदेशी कर्मचारियों के पास अमेरिका में रुककर दूसरी नौकरी तलाशने के लिए 60 दिनों का समय भी नहीं रहेगा. अभी अगर किसी H-1B कर्मचारी की नौकरी चली जाती है, तो वो ग्रेस पीरियड के दौरान दूसरी कंपनी तलाश सकता है. नई कंपनी उसके लिए H-1B आवेदन कर सकती है और नियमों की शर्तें पूरी होने पर कर्मचारी अमेरिका में रहते हुए नई नौकरी शुरू कर सकता है.
इसके अलावा ग्रेस पीरियड खत्म होने पर नौकरी जाने के बाद कर्मचारी के इमिग्रेशन स्टेटस पर तुरंत असर पड़ सकता है. हालांकि, फिलहाल केवल प्रस्ताव रखा गया है, इस पर अभी अंतिम फैसला आना बाकी है. ऐसे में इसके सटीक नियमों के बारे में अभी कुछ कहना जल्दबाजी होगी.

भारतीयों पर पड़ेगा ज्यादा असर
इस प्रस्ताव का असर सबेसे ज्यादा भारतीय प्रोफेशनल्स पर पड़ेगा. क्योंकि H-1B वीजा पाने वालों में भारतीयों की बड़ी हिस्सेदारी है. वित्त वर्ष 2024 में मंजूर हुए H-1B पीटिशन में 71% आवेदक भारत में जन्मे लोगों के थे. इसलिए H-1B कर्मचारियों के लिए नौकरी बदलना मुश्किल होने पर भारतीय टेक्नोलॉजी और अन्य कुशल प्रोफेशनल्स पर इसका बड़ा असर पड़ सकता है.
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अभी क्या मिलती है सुविधा?
फिलहाल जो नियम हैं उसके मुताबिक अगर किसी योग्य विदेशी कर्मचारी की अमेरिका में नौकरी चली जाती है, तो उसे अधिकतम 60 दिनों तक अमेरिका में रहने का मौका मिलता है. ये अवधि उसके मौजूदा वीजा की वेलिडिटी खत्म होने से पहले भी खत्म हो सकती है. इस दौरान कर्मचारी काम नहीं कर सकता, लेकिन उसे दूसरी नौकरी तलाशने, नया वीजा या इमिग्रेशन स्टेटस लेने या अमेरिका छोड़ने की तैयारी करने का समय मिलता है.
ये सुविधा H-1B के अलावा H-1B1, L-1, O-1, E-1, E-2, E-3 और TN जैसी कुछ अन्य श्रेणियों के विदेशी कर्मचारियों पर भी लागू होती है. कर्मचारियों के साथ उनके आश्रित परिवार के सदस्यों पर भी इसका असर पड़ सकता है.
