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नॉर्थ इजरायल में तबाही, सेना पर प्रेशर और थका देने वाले युद्ध…सत्ता से बेदखली का समय, बेंजामिन नेतन्याहू की उलटी गिनती शुरु

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Israel Election End Era of Netanyahu: एक तरफ मिडिल ईस्ट की जंग है, जिसे इजरायल ने अमेरिका के साथ मिलकर छेड़ी है, तो दूसरी तरफ इजरायल का अगला चुनावी अभियान जोरों पर है. ऐसे में माना जा रहा है, प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू सत्ता से बाहर हो सकते हैं. यहां राजनीतिक उठापटक, दलबदल, जातीय आधार पर लोगों से की जा रही खुली अपीलें, चुनावी अभियानों की पहचान बन गई हैं. माना जा रहा है कि 7 अक्टूबर 2023 में आई प्राकृतिक आपदा और उसके बाद युद्धों की वजह से बने हालात के चलते जनता उनकी जवाबदेही तय करने के लिए अग्रिम पंक्ति में खड़ी नजर आ रही है. 

इजरायल में आम चुनाव अगले कुछ महीनों, यानी अक्टूबर में होने हैं. बेंजामिन के समर्थन में एक धड़े का कहना है कि देश की सुरक्षा के लिए नेतन्याहू ही सबसे पहली पसंद हैं, लेकिन इस दावे पर ग्रहण लगता नजर आ रहा है. इसकी वजह है, लोगों का मानना है कि गाजा, लेबनान और ईरान से ढाई सालों में हुई आक्रमक कार्रवाई की वजह से लोगों में निराशा का भाव है. एक तरह से इनका नतीजा कुछ नहीं निकला, और यह बेहद ही थका देने वाले युद्ध रहे. 

इजरायल रक्षा बल यानी IDF पर काफी प्रेशर इन युद्धों की वजह से पड़ा है. लगातार ईरान की तरफ से हुए मिसाइलों से हमलों ने लेबनान बॉर्डर के पास ज्यादातर उत्तरी हिस्से को तबाह कर दिया है. यह रहने लायक भी नहीं है. वहीं, ईरान की सत्ता में इजरायल की कार्रवाई के बाद से किसी तरह का फर्क नहीं आया है. ईरान अब पहले के मुकाबले, परमाणु शक्ति विकसित करने के लिए पहले ज्यादा ताकतवर नजर आ रहा है. 

यह भी पढ़ेंः ‘बेहद खफा हैं नेतन्याहू’, ईरान को लेकर भिड़ गए ट्रंप और इजरायली पीएम, अमेरिकी मीडिया का दावा

इजरायल पहले कभी इतना असुरक्षित नहीं रहा, जानें एक्सपर्ट्स की राय

दिस वीक इन एशिया के मुताबिक, इजरायल-अमेरिका जियो-पॉलिटिक्स एक्सपर्ट्स शाइल बेन एफ्रैम ने माना है कि इजरायल कभी भी इतना असुरक्षित नहीं रहा है. सुरक्षा की कसौटी पर खरा उतरना ही, इजरायल के लिए मुख्य लक्ष्य है. ऑपिनियन पोल्स की मानें तो दो तिहाई इजरायल के लोग मानते हैं, नेतन्याहू को दोबारा चुनाव नहीं लड़ना चाहिए.

युद्ध की विफलता के अलावा नेतन्याहू पर भ्रष्टाचार, धोखाधड़ी और रिश्वतखोरी के भी आरोप हैं. ऐसे में विपक्ष इन मुद्दों को लेकर भी हमलावर है. इसके अलावा 8 अक्टूबर को सिक्योरिटी इंटेल की विफलता भी नेतन्याहू की छवि को नुकसान पहुंचा रहा है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि नेतन्याहू ने खुद को मिस्टर सिक्योरिटी यानी सुरक्षा के मसीहा के रूप में पेश किया. उनका जीवन का मिशन ईरान को हराना रह गया है. लेकिन नॉर्थ इजरायल अब रहने लायक नहीं है. ईरान ने लगातार मिडिल इजरायल पर भी कई दफा हमले किए हैं. सेना के पास बहुत काम और देश कूटनीतिक रूप से भी अलग-थलग पड़ गया है.

क्या नेतन्याहू की पॉलिसी- फूट डाल और राज करो ? 

लोग नेतन्याहू की पॉलिसी को फूट डालो और राज करो की कसौटी पर तौल रहे हैं. ऐसी रणनीतियां वोट दिलाने में कामयाब साबित हो सकती है. लेकिन सवाल है कि क्या अन्य गठबंधन बन पाएगा. पूर्व प्रधानमंत्री नफ्ताली बेनेट इस महीने येश अतीद पार्टी के नेता यायर लैपिड के साथ चुनावी गठबंधन को एक्टिव किया है. यह ऐसा गठबंधन रह चुका है, जिसने 2021 के मध्य से लेकर 2022 के अंत तक सत्ता संभाली थी. अब उनका नया गठबंधन खुद को वैकल्पिक सरकार के तौर पर पेश कर रहा है. हालांकि, विपक्षी एकता में फिलहाल कमी देखने को मिल रही है. 

वहीं, याशर पार्टी के नेता और IDF के पूर्व चीफ ऑफ स्टाफ गैड आइजनकोट ने बेनेट के उस कथित प्रस्ताव को ठुकरा दिया है, जिसमें उन्हें गठबंधन का डिप्टी चीफ बनाने की पेशकश की गई थी. उन्होंने एक अन्य गुट बनाया है. ऐसे में विरोधी खेमे में इस तरह की फूट नेतन्याहू के लिए सत्ता का रास्ता बनाते नजर आ रही है. इसी कमजोरी का फायदा लगातार अपने 6 कार्यकाल से नेतन्याहू उठाते नजर आए हैं. इजरायल में सत्ता पाने के लिए नेसेट जो संसद है, जिसमें 120 सदस्यों वाली संसद में सीट जीतने के लिए किसी भी पार्टी को 3.25 प्रतिशत की न्यूनतम सीमा पार करनी होती है.

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