नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) ने लातूर के कोचिंग सेंटर के मालिक और पेपर लीक मामले के आरोपी शिवराज मोटेगांवकर के बेटे को दो साल तक नीट- यूजी परीक्षा में बैठने से रोक दिया है। इस साल के नीट- यूजी पेपर लीक मामले में सीबीआई की ओर से गिरफ्तार किए गए मोटेगांवकर अभी न्यायिक हिरासत में हैं।
एनटीए ने क्या बताया है?
एनटीए की 19 सितंबर की सूचना के अनुसार, इस साल की शुरुआत में हुई परीक्षा के लिए उनके बेटे आदित्य मोटेगांवकर का रिजल्ट रोक दिया गया है और उसे नीट- यूजी 2027 में बैठने के लिए भी अयोग्य घोषित कर दिया गया है।
केमिस्ट्री के सवाल के लिए कितने पैसे दिए थे?
सीबीआई के अनुसार, शिवराज मोटेगांवकर ने कथित तौर पर केमिस्ट्री के सवाल हासिल करने के लिए पीवी कुलकर्णी को 5 लाख रुपये दिए थे। कुलकर्णी एनटीए के उस पैनल में शामिल थे, जिसने परीक्षा के लिए सवाल तैयार किए थे। एजेंसी का आरोप है कि उनका बेटा कुलकर्णी की कोचिंग क्लास में जाता था, जहां ये सवाल दिए जाते थे।
अपने बचाव में क्या बोला?
21 जून को नीट- यूजी का दोबारा टेस्ट कराने के बाद, एनटीए ने आदित्य मोटेगांवकर का रिजल्ट रोक दिया और कथित अनियमितताओं पर उनसे स्पष्टीकरण मांगा। अपने जवाब में, उन्होंने परीक्षा के दौरान किसी भी अनुचित तरीके का इस्तेमाल करने से इनकार किया। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें भेजा गया नोटिस 3 मई की परीक्षा में कथित अनियमितताओं से संबंधित था और सवाल उठाया कि बाद में हुए दोबारा टेस्ट में उनका रिजल्ट क्यों रोका गया।
क्या है पूरा मामला?
नेशनल एलिजिबिलिटी-कम-एंट्रेंस टेस्ट (अंडरग्रेजुएट), या नीट- यूजी, मेडिकल की पढ़ाई करने के इच्छुक छात्रों के लिए एनटीए द्वारा आयोजित किया जाता है। 12 मई को, एनटीए ने पेपर लीक के आरोपों के बाद मेडिकल कोर्स में एडमिशन के लिए 3 मई को आयोजित नीट- यूजी को रद्द कर दिया था। 21 जून को दोबारा परीक्षा आयोजित की गई थी।
सीबीआई ने पिछले महीने दिल्ली की विशेष फास्ट-ट्रैक कोर्ट में अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंपी थी। यह कोर्ट पेपर लीक और सार्वजनिक परीक्षाओं में अन्य अनुचित तरीकों के इस्तेमाल से जुड़े आपराधिक मामलों की सुनवाई करती है।


