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दुनिया को भनक भी नहीं लगी, ईरान वॉर से पहले ही चीन जमा करने लगा था तेल, वो भी कम कीमत पर

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China’s Crude Oil Reserves: ईरान पर 28 फरवरी से अमेरिका और इजरायल के हमले से पूरी दुनिया तनाव में है. जंग शुरू होने और अहम एनर्जी शिपिंग रूट होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) की नाकेबंदी से वैश्विक स्तर पर उथल-पुथल सी मची हुई है.

कच्चे तेल की कीमतें बढ़ती जा रही हैं, पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ रहे हैं, लॉजिस्टिक्स पर खर्च बढ़ रहा है, आयात पर खर्च ज्यादा बैठ रहा है, महंगाई भी बढ़ती जा रही है. इस बीच, एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है.  

चीन ने बढ़ाया तेल का भंडार

इस हफ्ते जारी अमेरिकी सरकार की डेटा के मुताबिक, चीन ने ईरान में जंग शुरू होने से पहले ही अपने यहां तेल का जखीरा जमा कर लिया था, जो किसी भी दूसरे देश के मुकाबले कहीं ज्यादा है. डेटा में बताया गया है कि पिछले साल यह जखीरा तेजी से बढ़ा है. यह ऐसे समय में एक रणनीतिक फायदे के तौर पर साबित हो रहा है, जब ग्लोबल एनर्जी मार्केट्स में तनाव का माहौल है.

इन मामलों में भी आगे चीन 

US एनर्जी इन्फॉर्मेशन एडमिनिस्ट्रेशन (EIA) की डेटा से पता चला कि चीन ने साल 2025 में हर दिन औसतन 11 लाख बैरल कच्चा तेल अपने भंडार में जोड़ा. दिसंबर 2025 तक चीन के पास लगभग 1.4 लाख अरब बैरल तेल का स्टॉक था. सरकारी डेटा से यह भी संकेत मिला कि फरवरी के आखिर में ईरान युद्ध शुरू होने से पहले तक चीन ने अपने भंडारों को बढ़ाना जारी रखा.

चीन का यह भंडार अमेरिका के रणनीतिक पेट्रोलियल रिजर्व (SPR) से 3 गुना से भी ज्यादा बड़ा है. जहां अमेरिका के पास 40 करोड़ बैरल तेल का भंडार है. वहीं, चीन ने अपने यहां 140 करोड़ बैरल तेल का पहाड़ खड़ा कर दिया. तेल के अलावा, चीन का दुनियाभर में 70 परसेंट से ज्यादा सोलर, विंड और इलेक्ट्रिक वाहन सप्लाई चेन पर भी कंट्रोल है.

सस्ते में खरीदा तेल

चीन ने रूस, ईरान और वेनेजुएला जैसे ऐसे देशों से सस्ते रेट पर तेल खरीदा, जिन पर पश्चिमी देशों ने प्रतिबंध लगा रखा है. एक्सपर्ट्स का ऐसा मानना है कि चीन ने इसलिए यह कदम उठाया क्योंकि वह नहीं चाहता था कि युद्ध की वजह से उसकी अर्थव्यवस्था पर कोई असर न पड़े. चीन ने उस वक्त तेल खरीदा, जब अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में तेल की कीमतें 60 डॉलर प्रति बैरल के आसपास थी.

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