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उत्तर-पूर्वी दिल्ली में 2020 में हुए सांप्रदायिक दंगों के दौरान इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) के अधिकारी अंकित शर्मा की बेहद क्रूरता से हत्या कर दी गई थी। इस मामले में कड़कड़डूमा कोर्ट ने न्याय करते हुए पूर्व आम आदमी पार्टी (आप) पार्षद ताहिर हुसैन सहित पांच दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। इस फैसले ने एक बार फिर 24 फरवरी 2020 के उस खौफनाक दिन की यादें ताजा कर दी हैं, जब दंगाइयों ने इंसानियत की सारी हदें पार करते हुए एक होनहार अधिकारी की बेरहमी से जान ले ली थी।

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दिल्ली दंगा 2020
– फोटो : फाइल फोटो
24 फरवरी 2020 के उस काले दिन का पूरा घटनाक्रम
नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के समर्थकों और विरोधियों के बीच शुरू हुई झड़पों ने 24 फरवरी को भयानक सांप्रदायिक दंगों का रूप ले लिया था (इन दंगों में 53 लोगों की जान गई थी)। इसी दिन शाम करीब 5 बजे आईबी अधिकारी अंकित शर्मा किराने का सामान और घरेलू उपयोग की चीजें खरीदने के लिए अपने घर से निकले थे। बाहर सड़कों पर भीड़ उग्र थी। हालात बिगड़ते देख अंकित शर्मा ने आगे आकर भीड़ को शांत करने की कोशिश की। उन्होंने दंगाइयों से कानून अपने हाथ में न लेने का आग्रह किया। लेकिन उग्र भीड़ ने उनकी एक न सुनी और उन्हें पकड़ लिया।

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अंकित शर्मा का आईडी कार्ड
– फोटो : अमर उजाला
पोस्टमार्टम रिपोर्ट- शरीर पर 51 घाव
दंगाइयों की दरिंदगी का अंदाजा अंकित शर्मा की पोस्टमार्टम रिपोर्ट से लगाया जा सकता है। हत्यारे इतने बेरहम थे कि उन्होंने अंकित के सिर, चेहरे, छाती, पीठ और कमर पर धारदार हथियारों से अनगिनत वार किए। रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि उनके शरीर पर धारदार हथियारों और कुंद बल के कारण 51 चोटों के निशान थे। हत्यारों ने उन्हें तब तक मारा जब तक उनकी जान नहीं निकल गई। इसके बाद, दरिंदगी की सारी हदें पार करते हुए उनके शव को चांद बाग पुलिया के पास एक गंदे नाले में फेंक दिया गया।

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दिल्ली हिंसा
– फोटो : अमर उजाला
पिता की तलाश और शव की बरामदगी
जब अंकित कई घंटों तक घर नहीं लौटे, तो उनके परेशान पिता ने दयालपुर पुलिस स्टेशन में बेटे की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई। तलाश के दौरान उनका क्षत-विक्षत शव नाले से बरामद हुआ। उन्हें तुरंत जीटीबी अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। अंकित के पिता ने अपनी शिकायत में ताहिर हुसैन और उसके साथियों को बेटे की हत्या का सीधा जिम्मेदार ठहराया था।

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पूर्व आप पार्षद ताहिर हुसैन
– फोटो : अमर उजाला
दोषियों को मिली उम्रकैद
इस मामले की सुनवाई करते हुए कड़कड़डूमा कोर्ट के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश प्रवीण सिंह ने अपना फैसला सुनाया है। कोर्ट ने पांचों दोषियों ताहिर हुसैन, नजीर, आसिम, जावेद और अनास को हत्या और दंगा भड़काने का दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है। इन्हें आईपीसी की धारा 188, 153ए, 147, 148, 149, 365 (अपहरण) और 302 (हत्या) के तहत दोषी ठहराया गया है (हालांकि 120बी और 129 से बरी कर दिया गया)।

