दिल्ली जल बोर्ड (डीजेबी) के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) के टेंडर में कथित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के मामले में गिरफ्तार आम आदमी पार्टी (आप) के नेता सत्येंद्र जैन को राउज एवेन्यू कोर्ट में पेश किया गया। उनकी जमानत याचिका पर कोर्ट में सुनवाई हुई। सत्येंद्र जैन की जमानत अर्जी पर अपना फैसला 3 सितंबर तक सुरक्षित रख लिया है। एंटी करप्शन ब्रांच (एसीबी) ने 18 अगस्त को पूर्व मंत्री रहे सत्येंद्र जैन समेत छह आरोपियों को गिरफ्तार किया था।
#WATCH | Delhi Jal Board alleged scam case: AAP leader Satyendar Jain brought to Rouse Avenue Court for a hearing on his bail application. pic.twitter.com/twCSZ1fnvT
— ANI (@ANI) August 25, 2026
बुधवार को सत्येंद्र जैन को 14 दिन के लिए जेल भेज दिया गया था। राउज एवेन्यू कोर्ट ने जैन के अलावा पूर्व सीईओ उदित प्रकाश राय समेत पांच आरोपियों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा। वहीं, मामले के एक अन्य प्रमुख आरोपी और जल बोर्ड के पूर्व संविदा सलाहकार अंकित श्रीवास्तव को दो दिन की पुलिस हिरासत में भेजा गया था।
मामले में गिरफ्तार किए गए आरोपियों में पूर्व मंत्री सतेंद्र जैन, दिल्ली जल बोर्ड के पूर्व सीईओ उदित प्रकाश राय, नागेंद्र यादव, राजा कुमार कुर्रा और पंकज वर्मा शामिल हैं। इन पांचों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। अंकित श्रीवास्तव को एसीबी की मांग पर दो दिन की पुलिस कस्टडी दी गई, ताकि जांच एजेंसी उनसे और पूछताछ कर सके तथा सबूत जुटा सके।
सुनवाई के दौरान आरोपियों की ओर से गिरफ्तारी को चुनौती दी गई थी। सतेंद्र जैन के वकील ने अदालत को बताया कि 10 मई 2024 को एफआईआर दर्ज होने के 27 महीने बाद 5 अगस्त 2026 को उन्हें पहली बार बुलाया गया और मंगलवार को फोन पर दूसरी बार संपर्क करने के बाद गिरफ्तार किया गया। दावा किया गया कि इसी मामले में ईडी ने बिना गिरफ्तारी आरोप पत्र दाखिल किया है। ईडी के ही आरोप पत्र की नकल कर वर्तमान गिरफ्तारी की गई। वकील का दावा था कि गिरफ्तारी को जायज ठहराने के लिए कोई ठोस सामग्री उपलब्ध नहीं है।
पूर्व सीईओ उदित प्रकाश राय के वकील ने भी गिरफ्तारी का विरोध करते हुए कहा कि उनके मुवक्किल वर्तमान में मिजोरम सरकार में सचिव के पद पर तैनात हैं। अन्य आरोपियों के अधिवक्ताओं ने भी गिरफ्तारी के आधार पर सवाल उठाए और कहा कि पर्याप्त सबूतों के अभाव में उन्हें हिरासत में लेना अनुचित है। हालांकि, अदालत ने एसीबी की दलीलों को स्वीकार करते हुए न्यायिक हिरासत और पुलिस कस्टडी के आदेश दिए थे।
यह है मामला
यह मामला मई 2024 में सतर्कता निदेशालय की शिकायत पर एसीबी ने दर्ज किया था। शिकायत में दिल्ली जल बोर्ड के 10 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट्स के विस्तार और नवीनीकरण की टेंडर प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं, टेंडर शर्तों में हेरफेर, आपराधिक साजिश और करोड़ों रुपये के घोटाले के गंभीर आरोप लगाए गए थे। जांच की गंभीरता को देखते हुए विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया, जो सरकारी अधिकारियों, कर्मचारियों और निजी व्यक्तियों की भूमिका की व्यापक जांच कर रहा है। एसीबी अधिकारियों के अनुसार, सतर्कता निदेशालय की 10 मई 2024 की शिकायत के आधार पर जांच शुरू हुई। जांच में विभिन्न परियोजनाओं की टेंडर प्रक्रिया और फर्जी बिलों से जुड़े कई घोटालों का खुलासा हुआ। इनमें बिना कोई वास्तविक काम किए करोड़ों रुपये के चालान प्रस्तुत कर भुगतान लेने के आरोप प्रमुख हैं।

