महाराष्ट्र के पालघर में एक अस्पताल के अंदर इलाज को लेकर विवाद हो गया। मामला एक घायल गोविंदा के सीटी स्कैन से जुड़ा था। दही हांडी कार्यक्रम के दौरान मानव पिरामिड बनाते समय गोविंदा पथक के पांच सदस्य घायल हुए थे। इसके बाद उन्हें इलाज के लिए अस्पताल लाया गया। इनमें एक व्यक्ति के सिर और रीढ़ में चोट लगी थी। डॉक्टरों ने उसकी जांच के लिए सीटी स्कैन कराने की सलाह दी थी। इसी जांच और इलाज को लेकर बाद में विवाद बढ़ गया।
अस्पताल प्रशासन का आरोप है कि कुछ लोग अस्पताल पहुंचे और डॉक्टरों तथा कर्मचारियों के साथ बदसलूकी की। इस दौरान एक कर्मचारी को थप्पड़ मारने का भी आरोप लगाया गया है। मामले में पुलिस ने कुल 17 लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है। इनमें शिवसेना के पालघर जिलाध्यक्ष कुंदन संखे, शहर प्रमुख राहुल घरत और विधायक राजेंद्र गावित के बेटे रोहित गावित का नाम भी शामिल है।
क्या है पूरा मामला?
अस्पताल के मुताबिक, डॉक्टरों ने घायल व्यक्ति के सिर और रीढ़ की चोट को देखते हुए सीटी स्कैन और आगे इलाज की सलाह दी थी। अस्पताल ने इलाज का अनुमानित खर्च करीब 20 हजार रुपये बताया था। इसके मुकाबले आयोजकों की तरफ से 10 हजार रुपये जमा किए गए थे। इसी बीच मरीज को डिस्चार्ज करने और सीटी स्कैन कराने को लेकर बात बिगड़ गई। मामले को लेकर शिवसेना के कुछ पदाधिकारी भी अस्पताल पहुंचे।
अस्पताल की शिकायत के अनुसार, इसके बाद वहां मौजूद डॉक्टरों और कर्मचारियों से कथित तौर पर गाली-गलौच की गई। एक कर्मचारी को थप्पड़ मारने का आरोप भी लगाया गया। अस्पताल प्रशासन ने दावा किया कि विवाद सिर्फ बातचीत तक नहीं रहा, बल्कि अस्पताल को नुकसान पहुंचाने की धमकी भी दी गई। यही वजह रही कि अस्पताल की तरफ से पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई।
अस्पताल प्रशासन का कहना है कि घटना की सीसीटीवी रिकॉर्डिंग मौजूद है। अस्पताल प्रशासन ने यह फुटेज पुलिस को भी सौंप दिया है। फिलहाल पुलिस ने अस्पताल की शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर लिया है। दूसरी तरफ, इस मामले में आरोपों का सामना कर रहे पक्ष की अपनी अलग दलील है।
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पुलिस ने 17 लोगों पर कौन-कौन सी कार्रवाई की?
इस मामले में पुलिस ने 17 लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है। आरोपियों पर भारतीय न्याय संहिता यानी बीएनएस की अलग-अलग धाराएं लगाई गई हैं। इनमें किसी को चोट पहुंचाने, अपमान करने और आपराधिक धमकी से जुड़ी धाराएं शामिल हैं। इसके अलावा अवैध रूप से किसी जगह में प्रवेश करने और गैरकानूनी जमावड़े से जुड़ी धाराएं भी लगाई गई हैं। मामले में महाराष्ट्र के मेडिकल सेवा से जुड़े कानून की धाराएं भी शामिल की गई हैं।
शिवसेना नेता कुंदन संखे ने आरोपों पर क्या कहा?
शिवसेना के पालघर जिलाध्यक्ष कुंदन संखे ने अस्पताल प्रशासन के आरोपों से इनकार किया है। उन्होंने कहा कि अस्पताल में विवाद की वजह कुछ और थी। संखे ने कहा कि घायल गोविंदा पथक के सदस्यों को अस्पताल से डिस्चार्ज नहीं किया जा रहा था। इसी बात को लेकर वह मरीजों के इलाज और डिस्चार्ज के बारे में बात करने अस्पताल पहुंचे थे। उन्होंने कहा कि वहां मामूली विवाद हुआ था। यानी इस मामले में अस्पताल प्रशासन और शिवसेना नेता का पक्ष अलग-अलग है। अस्पताल प्रशासन जहां डॉक्टरों और कर्मचारियों से बदसलूकी, थप्पड़ मारने और धमकी देने का आरोप लगा रहा है, वहीं संखे इन आरोपों को खारिज कर रहे हैं। अब पुलिस की जांच से यह पता चलेगा कि अस्पताल में उस दौरान वास्तव में क्या हुआ था और विवाद किस तरह बढ़ा।
मामले से जुड़ी बड़ी बातें
- दही हांडी के दौरान मानव पिरामिड बनाते समय गोविंदा पथक के पांच सदस्य घायल हुए थे। घायलों में एक व्यक्ति के सिर और रीढ़ में चोट लगी थी, जिसके लिए सीटी स्कैन की सलाह दी गई थी।
- अस्पताल के मुताबिक इलाज का अनुमानित खर्च करीब 20 हजार रुपये था, जबकि 10 हजार रुपये जमा किए गए थे। सीटी स्कैन और घायल गोविंदा को अस्पताल से डिस्चार्ज करने को लेकर विवाद बढ़ने की बात सामने आई है।
- अस्पताल ने डॉक्टरों और कर्मचारियों से कथित गाली-गलौच के साथ साथ एक कर्मचारी को थप्पड़ मारने का आरोप लगाया है। अस्पताल का दावा है कि कुछ लोग आईसीयू में पहुंचे और मरीजों को बाहर जाने के लिए कहा। पुलिस ने 17 लोगों के खिलाफ बीएनएस और महाराष्ट्र के मेडिकल सेवा कानून के तहत केस दर्ज किया है।


