04 अक्तूबर 1964! आज से ठीक 62 साल पहले सिनेमा जगत में एक खूबसूरत घटना घटी। 19 साल का एक नवयुवक मायानगरी में दाखिल हुआ। बॉम्बे सेंट्रल स्टेशन पहुंचा। जेब खाली थी, मगर आंखों में बड़े-बड़े सपने थे। उसके पास कुछ नहीं था, मगर खूब सारा जज्बा था और एक जादुई कलम थी। मेहनत करना उसने चुना और आज दुनिया उस नवयुवक को जावेद अख्तर के नाम से जानती है। शब्दों के मामले में उन्होंने जादू किया है। मगर, इसके पीछे संघर्ष का लंबा दौर रहा, जिसे आज दिग्गज अभिनेत्री और जावेद अख्तर की पत्नी शबाना आजमी ने साझा किया है।

