नरवाल रोहिंग्या बस्ती में कार्रवाई के चौथे दिन शुक्रवार को भी झुग्गियां खाली करने और बचे सामान समेटने का सिलसिला जारी रहा। बस्ती खाली होने के साथ अब प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों के सामने अगली चुनौती यहां से निकल रहे परिवारों की बिखरी हुई आवाजाही और नए ठिकानों की निगरानी की है।

अमर उजाला की पड़ताल में सामने आया है कि नरवाल से हटने वाले कुछ रोहिंग्या शहर के पुराने मोहल्लों में किराये के कमरे तलाश रहे हैं। इसमें एक स्थानीय एजेंट मदद कर रहा है। सुजवां, बठिंडी, बाहु फोर्ट, लद्दाखी कॉलोनी, ऊपरी ठठर, पुंछ कॉलोनी, गुढ़ा ब्राह्मणा और चिनौर में कमरे तलाशने की जानकारी मिली है। इनमें से कुछ के कमरा किराये पर लेने की भी सूचना है।
हालात की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने मकान मालिकों को चेतावनी दी है कि बिना सत्यापन किसी रोहिंग्या को घर या कमरा किराये पर दिया तो कार्रवाई की जाएगी। अब इन इलाकों में नए ठिकानों की जानकारी जुटाने और सत्यापन की प्रक्रिया तेज करने की तैयारी है। सूत्रों के अनुसार, पुलिस संबंधित क्षेत्रों में सर्च ऑपरेशन भी कर सकती है। नरवाल से निकलने के बाद परिवार अलग-अलग स्थानों पर बिखर रहे हैं, ऐसे में उनकी आवाजाही और नए ठिकानों का पता लगाना सुरक्षा एजेंसियों के लिए चुनौती बन रहा है।
करीब 12 परिवार नरवाल से निकलने के बाद जंगल में भी तंबू लगाकर बसने की कोशिश कर रहे थे। प्रशासन और पुलिस ने मौके पर पहुंचकर उन्हें वहां से हटाया। नरवाल खाली होने के बाद सभी परिवार एक ही स्थान पर जाने के बजाय अलग-अलग ठिकाने तलाश रहे हैं।
पुरानी बस्तियों पर भी नजर
सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार जम्मू शहर में रोहिंग्याओं की सुजवां, बठिंडी, बाहु फोर्ट, लद्दाखी कॉलोनी, ऊपरी ठठर, पुंछ कॉलोनी, गुढ़ा ब्राह्मणा और चिनौर में पहले से ही मौजूदगी है। ऐसे में नरवाल से निकलने वाले परिवारों के इन इलाकों में पहुंचने की कोशिश पर पुलिस ने निगरानी बढ़ा दी है।
बिखराव से बढ़ेगी निगरानी की चुनौती
नरवाल में सैकड़ों परिवार एक सीमित क्षेत्र में रह रहे थे। वहां कार्रवाई के दौरान पुलिस और प्रशासन की टीमें मौके पर मौजूद रहीं और बाहर निकलने वाले परिवारों पर नजर रखी गई। अब परिवार अलग-अलग मोहल्लों में किराये के कमरों, रिश्तेदारों व अस्थायी ठिकानों की तलाश में हैं। ऐसे में उनकी पहचान, दस्तावेज का सत्यापन और वास्तविक निवास स्थान की निगरानी पहले की तुलना में अधिक महत्वपूर्ण हो जाएगी। इसी वजह से पुलिस का फोकस अब केवल खाली कराई गई बस्ती तक सीमित न रहकर संभावित नए ठिकानों तक बढ़ रहा है।
सुरक्षा एजेंसियों के लिए चुनौती सिर्फ नए ठिकानों की पहचान तक सीमित नहीं है। प्रशासन की कार्रवाई के बाद परिवारों के दूसरे शहरों और राज्यों की ओर जाने की संभावनाएं भी सामने आई हैं। सूत्रों के अनुसार कुछ परिवार हरियाणा, हैदराबाद और बेंगलुरु जाने की तैयारी में भी हैं।

