त्योहारों का समय आते ही चीनी के बढ़ते दामों ने लोगों की नाक में दम कर दिया है. कुछ जगहों पर चीनी 70 रुपये किलो से ज्यादा बिक चुकी है, लेकिन अब इसकी कीमत करीब 60 रुपये किलो है. दाम कम करने के लिए सरकार ने चीनी को ड्यूटी फ्री आयात की मंजूरी दी है. इसके साथ ही महाराष्ट्र की चीनी मिलों से 15 दिन पहले गन्ने की पेराई शुरू करने को कहा गया है. अब देखना होगा कि इस फैसले से आम लोगों को चीनी के दामों में कितनी राहत मिलती है.
महाराष्ट्र देश का सबसे बड़ा चीनी बनाने वाला राज्य है. सोलापुर और मराठवाड़ा यहां के प्रमुख गन्ना बनाने वाले इलाके हैं. लेकिन, 15 अक्टूबर से बड़े स्तर पर गन्ने की कटाई शुरू करना आसान नहीं होगा. महाराष्ट्र के चीनी अधिकारी संजय भोसले के मुताबिक, राज्य में गन्ने की कटाई के लिए बड़ी संख्या में मजदूर दूसरे राज्यों से आते हैं. मध्य प्रदेश के साथ दूसरे राज्यों के मजदूर आमतौर पर दशहरा और दिवाली के बाद महाराष्ट्र पहुंचते हैं. इस साल दशहरा 20 अक्टूबर को है, इसलिए 15 अक्टूबर से ही बड़ी संख्या में मजदूरों का मिलना मुश्किल हो सकता है.
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जल्दी पेराई से कम चीनी की रिकवरी
समय से पहले पेराई शुरू करने पर सबसे बड़ी परेशानी चीनी की रिकवरी को लेकर है. रिकवरी यानी एक फिक्स मात्रा के गन्ने से कितनी चीनी निकलती है. संजय भोसले के अनुसार, 15 अक्टूबर से 15 नवंबर के बीच पेराई शुरू होने पर रिकवरी 7 से 7.5% तक गिर सकती है. वहीं नवंबर के बाद ये आमतौर पर 8% से ऊपर रहती है. सोलापुर में रिकवरी 8 से 11% तक पहुंच सकती है.
रिकवरी कम होने से चीनी मिलों को बड़ा फाइनेंशियल नुकसान हो सकता है. ऐसे में मिलों के लिए जल्दी पेराई शुरू करना जोखिम भरा हो सकता है.
किसानों की कमाई पर भी असर
गन्ने की जल्दी कटाई का असर किसानों पर भी पड़ सकता है. पूरी तरह तैयार होने से पहले गन्ना काटने पर उसके वजन और क्वालिटी में कमी आ सकती है. इससे किसानों की पैदावार और कमाई दोनों पर असर हो सकता हैं.
राज्य के कई हिस्सों में इस साल आम बारिश नहीं हुई है. इससे गन्ने की पैदावार पर असर पड़ रहा है. ऐसे में कमजोर फसल की जल्दी कटाई करने से किसानों की परेशानी ज्यादा हो सकती है.
क्या चीनी के दाम सच में घटेंगे
सरकार को उम्मीद है कि जल्दी पेराई से बाजार में नई चीनी जल्द आएगी और कीमतें नीचे आएंगी. लेकिन सिर्फ जल्दी पेराई से खुदरा कीमत तुरंत कम होना फिक्स नहीं है. अगर गन्ने से निकलने वाली चीनी की मात्रा कम हुई और मिलों को नुकसान हुआ, तो वो कितनी चीनी बाजार में उतारेंगी, ये भी बड़ा सवाल है.
फिलहाल सरकार के सामने चुनौती है कि खरीदने वाले लोगों को महंगी चीनी से राहत मिले, लेकिन किसानों और चीनी मिलों पर इसका बोझ नहीं हो.
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