- यह फैसला समूह की कंपनियों की चुनौतियों के बीच आया।
Tata Sons Share Update: टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने अपने मौजूदा कार्यकाल के बाद दोबारा चेयरमैन पद के लिए नाम आगे नहीं रखने का फैसला किया है. हालांकि वह तत्काल पद नहीं छोड़ेंगे और फरवरी 2027 तक अपने मौजूदा कार्यकाल को पूरा करेंगे. उनके उत्तराधिकारी को लेकर फिलहाल तस्वीर साफ नहीं है. जानें आज शेयर बाजार में टाटा की कंपनियों का कैसा प्रदर्शन रहा.
चंद्रशेखरन ने 1987 में टाटा समूह के साथ अपना सफर शुरू किया था. 2009 में वह TCS के CEO बने और 2017 में टाटा संस के चेयरमैन की जिम्मेदारी संभाली. उनके नेतृत्व में टाटा समूह ने एविएशन, इलेक्ट्रिक वाहन, सेमीकंडक्टर, बैटरी और डिजिटल कारोबार समेत कई नए क्षेत्रों में बड़े निवेश किए.
टाटा की कंपनियों को 68 हजार करोड़ का झटका
चंद्रशेखरन के फैसले का असर आज शेयर बाजार में भी देखने को मिला. टाटा समूह की सूचीबद्ध कंपनियों के शेयरों में व्यापक गिरावट रही और समूह की कंपनियों के संयुक्त बाजार पूंजीकरण में करीब 68 हजार करोड़ रुपए की कमी आई. TCS सबसे ज्यादा प्रभावित शेयरों में रहा, जिसमें करीब 4.8% तक की गिरावट दर्ज की गई. टाइटन, टाटा स्टील, टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स, टाटा पावर और इंडियन होटल्स समेत कई अन्य शेयर भी दबाव में रहे. हालांकि कुछ टाटा कंपनियों के शेयरों में तेजी भी देखने को मिली.
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टाटा समूह में अंदरूनी मतभेद
चंद्रशेखरन के पुनर्नियुक्ति को लेकर टाटा संस और टाटा ट्रस्ट के बीच पिछले कुछ समय से मतभेद की खबरें सामने आती रही हैं. बाजार से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, टाटा ट्रस्ट के चेयरमैन नोएल टाटा की ओर से टाटा संस की भविष्य में लिस्टिंग नहीं करने समेत कुछ शर्तों पर चर्चा हुई थी. बोर्ड प्रतिनिधित्व और समूह की भविष्य की रणनीति को लेकर भी मतभेद बताए गए. हालांकि, इन मुद्दों पर टाटा समूह की ओर से विस्तृत आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है.
टाटा संस, टाटा समूह की प्रमुख होल्डिंग कंपनी है और इसके तहत TCS, Tata Motors, Air India समेत 30 से अधिक कंपनियां आती हैं. टाटा ट्रस्ट के पास टाटा संस की करीब 66% हिस्सेदारी है.
टाटा समूह के सामने चुनौतियां !
चंद्रशेखरन का फैसला ऐसे समय आया है जब एयर इंडिया, TCS और Jaguar Land Rover समेत समूह की कई कंपनियां अलग-अलग कारोबारी चुनौतियों से गुजर रही हैं. अब बाजार की नजर 18 अगस्त की AGM और नए चेयरमैन के नाम पर होगी. विशेषज्ञों के मुताबिक, मौजूदा गिरावट को फिलहाल कारोबार में अचानक कमजोरी के बजाय leadership uncertainty की बाजार प्रतिक्रिया के तौर पर देखा जा रहा है.
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