
Parenting Tips: हर एक बच्चे का स्वभाव एक-दूसरे से बिलकुल ही अलग होता है. कुछ बच्चे ऐसे होते हैं जो दूसरों से जल्दी और आसानी से घुल-मिल जाते हैं, जबकि कुछ बच्चे ऐसे भी होते हैं जिन्हें नए लोगों के बीच खुलने में काफी ज्यादा समय लग जाता है. ऐसे में कुछ माता-पिता इसलिए और भी ज्यादा परेशान हो जाते हैं क्योंकि उनका बच्चा घर पर तो सभी से खूब बातें करता है लेकिन घर से बाहर निकलते है चुप रहने लग जाता है. अगर आपके बच्चे की भी यही आदत है, तो बिलकुल भी जरूरी नहीं है कि यह कोई बड़ी समस्या का संकेत हो. कई बार इसके पीछे कुछ नॉर्मल कारण भी होते हैं जिनके बारे में आपको समझ होना जरूरी हो जाता है. आज इस आर्टिकल में हम आपको विस्तार से बताने वाले हैं कि आपके बच्चे का ऐसा करना किस बात की तरफ इशारा करता है.
शर्मीला स्वभाव हो सकता है एक कारण
कुछ बच्चे दूसरों की तुलना में ज्यादा शर्मीले स्वभाव के होते हैं. वे आपके परिवार और जान-पहचान के लोगों के बीच सहज महसूस करते और इसलिए भी सभी से खुलकर बातें करते हैं. लेकिन, जब वे नए माहौल में ये फिर नए लोगों के बीच जाते हैं, तो उन्हें थोड़ी से दिक्कत होने लगती है. इस तरह के जो बच्चे होते हैं उन्हें दूसरों से जुड़ने में ज्यादा समय लगता है लेकिन जब ये एक बार जुड़ जाते हैं तो सभी से नार्मल तरीके से बातचीत करना शुरू कर देते हैं.
बच्चा पहले माहौल को समझना चाहता है
कई बच्चे ऐसे भी होते हैं जो नयी जगह जाने पर सबसे पहले आसपास के माहौल को अच्छे से समझने की कोशिश करते हैं. उन्हें पहले यह जानना होता है कि वहां के लोग कैसे हैं और उनके सामने उन्हें किस तरह से व्यवहार करना चाहिए. इस तरह के बच्चे कभी भी जल्दबाजी में बात नहीं करते हैं. यह उनके सोचने और समझने जी आदत का एक हिस्सा हो सकता है.
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कॉन्फिडेंस की कमी भी हो सकती है वजह
अगर आपका बच्चा बाहरी लोगों से बात करने में हिचकिचाहट महसूस करता है या फिर उसे दूसरों से बात करने में डर लगा रहता है कि कहीं वह कुछ गलत न बोल दे, तो यह एक तरफ से कॉन्फिडेंस की कमी का संकेत भी हो सकता है. इस तरह के बच्चों को माता-पिता के मोटिवेशन और पॉजिटिव माहौल की जरूरत होती है ताकि वे धीरे-धीरे खुद पर भरोसा करना सीख जाएं.
सोशल एंग्जायटी के संकेतों पर ध्यान दें
अगर आपके बच्चे बाहर ज्यादा ही चुप रहते हैं तो यह एक तरफ से सोशल एंग्जायटी के भी संकेत हो सकते हैं. अगर आपका बच्चा स्कूल, रिश्तेदारों या फिर अन्य जगहों पर काफी ज्यादा घबराता है, लोगों से दूरी बनाकर रखने की कोशिश करता है या फिर किसी से बात करने के नाम पर उसे स्ट्रेस होने लगता है, तो आपको कभी भी उसके इस व्यवहार को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. ऐसे सिचुएशन में आपको किसी एक्सपर्ट की सलाह लेने की कोशिश करनी चाहिए.
बच्चे पर प्रेशर न बनाएं
अक्सर माता-पिता की यह आदत होती है कि वे बच्चे को बार-बार यह कहकर बोलने को मजबूर करते हैं कि, “इतना चुप क्यों रहते हो?” या फिर “सबके सामने बात किया करो”. बता दें जब आप ऐसा करते हैं तो आपके बच्चे को और भी ज्यादा असहज महसूस होता है. आपके लिए सबसे बेहतर होगा कि आप बच्चे को अपनी गति से लोगों के बीच खुलने का मौका दें.
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