कोविड-19 के झटकों के बाद घरेलू सैलानियों की बदौलत देश की विकास दर में भारत के पर्यटन उद्योग का योगदान 5.2 फीसदी तक पहुंच गया है। वित्त वर्ष 2024 में विदेशी पर्यटकों ने जहां 32.5 अरब डॉलर खर्च किए, वहीं घरेलू सैलानियों ने उनसे पांच गुना यानी 162.9 अरब डॉलर खर्च किए। इस मामले में उत्तर प्रदेश सबसे अव्वल रहा, जहां संपूर्ण भारत के 4.29 अरब दौरों के मुकाबले घरेलू पर्यटकों के दौरे सर्वाधिक 1.56 अरब बार हुए।


यह स्थिति तब है जब पांच सितारा होटलों समेत बुनियादी सुविधाओं की भारी किल्लत है। पर्यटन से इस समय देश में 8.46 करोड़ लोगों को रोजगार मिल रहा है। वर्ल्ड ट्रैवल एंड टूरिज्म काउंसिल के अनुसार, 2035 तक भारतीय पर्यटन क्षेत्र में 1.10 करोड़ कर्मियों की जरूरत होगी। वर्ष 2047 तक पर्यटन अर्थव्यवस्था को 289 लाख करोड़ तक पहुंचाने का लक्ष्य है।
यूपी में तीर्थयात्री बढ़े, मगर पांच सितारा होटल सिर्फ 32
यूपी में देश के 36 फीसदी घरेलू सैलानी और 20 फीसदी ऐतिहासिक धरोहरें हैं। फिर भी यहां देश के 761 पांच सितारा होटलों में से महज 4 फीसदी यानी 32 होटल हैं। अयोध्या में राममंदिर निर्माण के बाद 2024 में रिकॉर्ड 16.4 करोड़ पर्यटक पहुंचे। प्रदेश सरकार ने 21.1 करोड़ डॉलर के पर्यटन बजट में से लगभग 4.2 करोड़ अयोध्या, मथुरा और नैमिषारण्य जैसे धार्मिक पर्यटन स्थलों के लिए ही आवंटित किया है।
तीर्थाटन से रियल एस्टेट में मिल रहे नए अवसर
तीर्थाटन और नए क्षेत्रों में पर्यटन से रियल एस्टेट क्षेत्र को नई धार मिल रही है। बढ़ते रेल और राजमार्ग नेटवर्क से पर्यटक एक साथ कई पर्यटन क्षेत्रों का दौरा कर रहे हैं। निवेशकों के लिए इन क्षेत्रों में होटल, रिसॉर्ट्स, इवेंट इंफ्रास्ट्रक्चर और वेलनेस संपत्तियों जैसे रियल एस्टेट कारोबार में अवसरों का दायरा बढ़ रहा है। बेहतर आवास सुविधा की मांग भी बढ़ी है।
चारधाम महामार्ग, शक्तिपीठ एक्सप्रेसवे और सोमनाथ-द्वारका एक्सप्रेसवे जैसी आगामी परियोजनाएं रियल एस्टेट कारोबार को तेजी ला सकती हैं। सैलानियों में 60% तीर्थयात्री हैं, मेडिकल और ग्रीन टूरिज्म भी बढ़ा है।
