
पाकिस्तान सरकार ने अपने खाली खजाने को भरने के लिए बड़े पैमाने पर चीन को गधे का मांस (Donkey Meat) और उससे संबंधित उत्पादों के निर्यात को बढ़ाने की योजना बना रहा है. एक प्रमुख राष्ट्रीय दस्तावेज में यह जानकारी दी गई है. पाकिस्तान आर्थिक समीक्षा 2025-26 को वित्त मंत्री मोहम्मद औरंगजेब ने गुरुवार (11 जून 2026) को एक प्रेस वार्ता में पेश किया.
चीन को गधे का मांस बेचेगा पाकिस्तान
‘गधे के मांस और अन्य उत्पादों के लिए नए निर्यात अवसर’ शीर्षक के तहत समीक्षा में कहा गया, ‘गधे का मांस, खाल और संबंधित उत्पादों का निर्यात एक विशेष बाजार प्रदान करता है. चीन में बढ़ती मांग के दम पर इसमें बढ़ोतरी की काफी संभावनाएं हैं. चीन में गधे का मांस, दूध और एजियाओ (जिलेटिन) को उनके पोषण और औषधीय गुणों के लिए महत्व दिया जाता है. ’ इसमें कहा गया कि इस व्यापार को समर्थन देने के लिए संघीय सरकार ने चीन के साथ स्वच्छता संबंधी दिशा-निर्देशों पर हस्ताक्षर किए हैं. इससे विदेशी निवेश को बढ़ावा मिलेगा, द्विपक्षीय संबंध मजबूत होंगे और स्थानीय किसानों के लिए रोजगार और आजीविका के अवसर उत्पन्न होंगे.
समीक्षा में कहा गया कि ‘ग्वादर फ्री जोन’ में गधों के बूचड़खाने स्थापित करने के लिए एम/एस शहजाद एंड शाओ कंपनी को नया लाइसेंस दिया गया है. इससे लाइसेंस प्राप्त कंपनियों की संख्या एम/एस हेंगेंग ट्रेड के अलावा बढ़कर दो हो गई है. आर्थिक समीक्षा के अनुसार, पाकिस्तान में गधों की संख्या 2024-25 के 60 लाख से बढ़कर 2025-26 में 62 लाख हो गई है.
ग्वादर में खुलेंगे बूचड़खाने
यह संख्या 2023-24 में 59 लाख थी. परंपरागत रूप से, गधों का इस्तेमाल भारी सामान ढोने या खींचने के लिए किया जाता रहा है. वे ग्रामीण परिवारों का अहम हिस्सा रहे हैं क्योंकि कृषि क्षेत्रों में फसल, चारा, लकड़ी व अन्य वस्तुओं की ढुलाई के लिए इनका इस्तेमाल किया जाता है.
पाकिस्तान में पिछले छह वर्षों में गरीबी सात प्रतिशत बढ़ गई है जिससे लगभग 2.7 करोड़ लोग गरीबी के दायरे में आ गए हैं और इसके साथ ही देश में कुल गरीबों की संख्या बढ़कर सात करोड़ हो गई है. देश के राष्ट्रीय आर्थिक सर्वेक्षण में यह बात सामने आई है.
पाकिस्तान में बढ़ी गरीबी
पाकिस्तान आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26, को बृहस्पतिवार को वार्षिक प्रक्रिया के तहत जारी किया गया. यह प्रक्रिया संघीय बजट पेश किए जाने से पहले आर्थिक संकेतकों को साझा करने के लिए की जाती है. इस सर्वेक्षण में सामने आया है कि वर्ष 2018-19 में गरीबी का स्तर 21.9 प्रतिशत था, जो 2024-25 में बढ़कर 28.9 प्रतिशत हो गया. सर्वेक्षण के अनुसार ग्रामीण गरीबी 28.2 प्रतिशत से बढ़कर 36.2 प्रतिशत हो गई जबकि शहरी गरीबी 11 प्रतिशत से बढ़कर 17.4 प्रतिशत तक पहुंच गई.
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