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खामनेई की आखिरी सलामी में जाने से इन 3 मुस्लिम देशों का इनकार, कैसे तेहरान के चलते बंट गया इस्लामिक वर्ल्ड

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ईरान के दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की अंतिम यात्रा सोमवार (6 जुलाई 2026) सुबह तेहरान के इमाम हुसैन स्क्वायर से शुरू हुई. यात्रा की शुरुआत ईरान का राष्ट्रगान बजाकर की गई. हजारों की संख्या में लोगों का हुजूम सुबह से ही सड़कों पर जुटने लगा. खामेनेई की अंतिम यात्रा में शामिल होने के लिए दुनियाभर से से प्रतिनिधिमंडल ईरान पहुंचे. हालांकि उनकी अंतिम सलामी में शामिल होने को लेकर मुस्लिम देश बंटे हुए नजर आए.

 खामेनेई की अंतिम यात्रा में नहीं पहुंचे ये मुस्लिम देश

ईरान के पूर्व सुपीम लीडर खामेनेई के अंतिम संस्कार में पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ से लेकर उसके अधिकतर मंत्री और आर्मी चीफ आसिम मुनीर पहुंचे हुए थे. चीन की ओर से उसके विशेष दूत और रूस ने वरिष्ठ प्रतिनिधि को भेजा था. तुर्किए के उपराष्ट्रपति खुद इस कार्यक्रम के लिए तेहरान पहुंचे. तीन मुस्लिम देशों संयुक्त अरब अमीरात (UAE), बहरीन और कुवैत ने खामेनेई की अंतिम यात्रा में अपना प्रतिनिधि नहीं भेजा, जिसका बाद दुनिया की राजनीति को लेकर फिर से अलग-अलग कयास लगाए जाने लगे हैं. ये तीनों देश खाड़ी क्षेत्र की राजनीति और अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण स्तंभ भी हैं.

दुनियाभर के देशों ने भेजे अपने प्रतिनिधि

विदेशी मेहमानों में कई देशों के राष्ट्राध्यक्ष, संसद के स्पीकर और मंत्री शामिल थे. इनमें पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख फील्ड मार्शल सैयद असीम मुनीर, अर्मेनियाई प्रधानमंत्री निकोल पाशिनयान, जॉर्जिया के राष्ट्रपति मिखाइल कवेलशविली, इराकी राष्ट्रपति निजार अमेदी, ताजिक राष्ट्रपति इमोमाली रहमोन, इराक के कुर्दिस्तान क्षेत्र के राष्ट्रपति नेचिरवन बरजानी, साथ ही चीन और रूस के वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे. बिहार के गवर्नर लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन और देश राज्य मंत्री पबित्र मार्गेरिटा खामेनेई के अंतिम संस्कार में भारत का प्रतिनिधि किया.

धार्मिक हस्तियां, विद्वान और आदिवासी नेता भी समारोह में शामिल हुए. अंतिम संस्कार की रस्में 9 जुलाई तक चलेंगी, जिसमें तेहरान, कोम और मशहद में जुलूस निकाले जाएंगे, साथ ही इराक में भी रस्में होंगी. ईरानी अधिकारियों ने तेहरान और मशहद में खास तारीखों पर पब्लिक बंद और एयरस्पेस पर रोक लगाने की घोषणा की है और गुरुवार को राष्ट्रीय शोक का दिन घोषित किया गया.

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