UPI और डिजिटल पेमेंट्स पर हम इतने निर्भर हो गए हैं कि कैश रखना ही छोड़ दिया है. अब कहीं जाने के लिए कार्ड या कैश की जरूरत ही नहीं होती है. केवल अपना फोन उठाया और जहां जाना है चलते बने, क्योंकि अब इंडिया केवल इंडिया नहीं बल्कि डिजिटल इंडिया जो बन गया है. बड़े- बड़े शोरूम्स से लेकर छोटे हाथ ठेले और रिक्शा वाले तक यूपीआई के जरिए पेमेंट ले पा रहे हैं. लेकिन क्या आपके दिमाग में भी ये सवाल घूमता है कि यूपीआई पमेंट्स की वजह से आपका सिविल स्कोर खराब हो रहा है? अगर हां, तो आइये देते हैं आपको इस सवाल का जवाब.
क्या UPI पेमेंट्स से पड़ता है CIBIL स्कोर पर फर्क?
जब भी आप किसी लोन के लिए अप्लाय करते हैं, खासतौर से पर्सनल लोन या कोई अनसेक्योर्ड लोन के लिए, तब लेंडर्स आपका सिर्फ क्रेडिट स्कोर नहीं देखते हैं. बल्कि वो और भी गहराई से जांच करते हुए बैंक स्टेटमेंट पर भी नजर रखते हैं कि आप किस तरह से अपने पैसों का मैनेजमेंट करते हैं. यहीं पर आपकी डिजिटल पेमेंट्स भी नजर आती हैं. ऐसे में ये सीधे तौर पर तो आपके CIBIL स्कोर पर कोई असर नहीं डालती हैं.
जीरो बैलेंस कर सकता है दिक्कत
लोन देने वाले हमेशा आपके अकाउंट को जब गहराई से देखते हैं तो उन्हें आपका एक साइकल नजर आता है. जिसमें आपके अकाउंट में एक पर्टिकुलर तारीख पर सैलरी आती है, उसके बाद आप बिल्स भरते हैं पेमेंट्स करते हैं. तब ये लेंडर्स देखते हैं कि आपके खाते में फ्रीक्वेंटली जीरो बैलेंस तो नहीं बना है, या आपके पैसे आते ही खर्च हो जाते हैं. ये सभी बातें थोड़ा सा ध्यान लेंडर्स का अपनी ओर खींचती हैं. हालांकि ये डाटा आपके स्कोर को तो इफैक्ट नहीं करता लेकिन इसे देखकर लेंडर्स अपना डिसीजन बदल सकते हैं.
क्या मायने रखता है क्रेडिट स्कोर?
CIBIL या क्रेडिट स्कोर पर UPI का डायरेक्टली तो कोई फर्क नहीं पड़ता है. यूपीआई पेमेंट्स आप कितनी भी कर लें, इससे ना आपका क्रेडिट स्कोर कम होगा ना ही बढ़ेगा. हां लेकिन आपकी ट्रांसेक्शन हिस्ट्री आपके बारे में बहुत कुछ बताती है. इससे लोन देने वाले इस बात का अंदाजा लगा लेते हैं कि आप लोन चुका पाएंगे कि नहीं या फिर आपकी ब्याज दर पर भी इसका फर्क पड़ता है.


