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क्या महंगी होने वाली है आपकी बिजली? पेनल्टी के बने नए नियम, देना होगा भारी जुर्माना!

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New grid penalty rules: भारत में केंद्रीय विद्युत नियामक आयोग (CERC) ने ग्रिड अनुशानसन बनाए रखने या यूं कहे कि सरकार ग्रिड (बिजली की सप्लाई करने वाली मेन लाइन) को सुरक्षित रखने के लिए नए कड़े नियम लेकर आई है. इसके तहत, बिजली बनाने वाली कंपनियों को पहले से बताना जरूरी होगा कि वे कितनी बिजली ग्रिड में भेजेंगी.

अगर कंपनी अपने बताए गए बिजली से कम या ज्यादा बिजली ग्रिड में भेजती है, तो सरकार उस पर भारी जुर्माना लगाएगी. नेशनल सोलर एनर्जी फेडरेशन ऑफ इंडिया के अनुसार, इन जुर्माने से विंड पावर के मामले में 48% तक और सोलर पावर के मामले में 11.1% तक की कमाई का नुकसान हो सकता है, जबकि पुराने सिस्टम में यह नुकसान 1-3% के बीच होता था.

सरकार का क्या है लक्ष्य? 

सरकार चाहती है कि कंपनियां एकदम सही बिजली सप्लाई करें ताकि ग्रिड फेल होने का खतरा न रहे. सरकार का दीर्घकालिक लक्ष्य है कि साल 2031 तक सोलर और विंड पावर प्रोजेक्ट्स को भी कोयले और गैस से संचालित सामान्य बिजली प्लांट की ही तरह माना जाए. इसका मतलब है कि उन्हें भी सामान्य प्लांट की तरह ही ग्रिड अनुशासन और समय पर बिजली देने की जिम्मेदारी उठानी होगी. 

सोलर और विंड एनर्जी कंपनियों के सामने चुनौती

कोयले और गैस से चलने वाले बिजली प्लांट को कंट्रोल किया जा सकता है, लेकिन सोलर और विंड एनर्जी पूरी तरह से मौसम पर निर्भर करती है. ऐसे में कंपनियां एकदम सटीक अंदाजा नहीं लगा पातीं कि कितनी बिजली भेजनी है. ऐसे में अब उन्हें बिना किसी गलती के जुर्माना भरना पड़ेगा. इधर, सरकार चाहती है कि कंपनियां नई और आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करें, जिससे मौसम और उत्पादन का सही अंदाजा लगाया जा सके और ग्रिड को भी अचानक किसी समस्या का सामना न पड़े.  

क्या महंगी होगी बिजली?

अब जाहिर सी बात है कि कंपनियों को जुर्माना भरना पड़ेगा, उन्हें नुकसान होगा, तो उसकी भरपाई करने के लिए कंपनियां बिजली की दरें बढ़ा सकती हैं, जिसका बोझ आम जनता को उठाना पड़ेगा. एक डर इस बात का भी है कि भारी जुर्माने के डर से नई कंपनियां सोलर और विंड प्रोजेक्ट में पैसे लगाने से कतराएंगी. कंपनियां इसी नुकसान से बचने के लिए कर्नाटक हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. अदालत ने फिलहाल नए जुर्माने वाले नियम पर 10 जून, 2026 तक रोक लगा दी है. 

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कोयले की कमी से देश में गंभीर बिजली संकट-ग्रिड फेल होने की स्थिति, क्या है दावे की सच्चाई? 

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