कावेरी नदी के पानी के बंटवारे को लेकर गुरुवार को कर्नाटक में राज्यव्यापी बंद बुलाया गया है। इस दौरान कोप्पल में लोगों ने अनोखे तरीके से विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने तमिलनाडु नंबर के ट्रकों के चालकों को गुलाब दिए। उन्होंने चालकों से कहा कि कावेरी का पानी छोड़ने को लेकर जारी विवाद के बीच कर्नाटक को ‘उकसाने’ की कोशिश न करें।
तमिलनाडु के ट्रक चालकों को दिए गुलाब
यह प्रदर्शन कोप्पल तालुक के हिटलनाल टोल गेट पर हुआ। यह जगह राष्ट्रीय राजमार्ग पर है। कर्नाटक बंद के तहत केरावे युवा सेना के नेता विजयकुमार के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने तमिलनाडु नंबर के ट्रकों को रोका। प्रदर्शनकारियों ने ट्रक चालकों से भिड़ने के बजाय उन्हें गुलाब दिए। यह गुलाब देना एक प्रतीकात्मक तरीके से विरोध जताने का हिस्सा था। फूल देते हुए विजयकुमार ने ट्रक चालकों से कहा, हम शांति पसंद करने वाले लोग हैं। हमें उकसाने की कोशिश न करें।
प्रदर्शनकारियों ने तमिलनाडु सरकार के खिलाफ नारे भी लगाए। उन्होंने कावेरी जल नियमन समिति यानी सीडब्ल्यूआरसी के एक निर्देश का विरोध किया। इस निर्देश में कर्नाटक को 15 दिनों तक तमिलनाडु के लिए 12 हजार क्यूसेक पानी छोड़ने को कहा गया है।
बंद का आह्वान किसने किया था?
प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों ने नारे लगाए- फूल ले लो, पानी मत मांगो। इसके बाद पुलिस ने प्रदर्शन में दखल दिया। पुलिस ने प्रदर्शन के आयोजकों को हिरासत में ले लिया और अपने साथ ले गई। कोप्पल में हुआ यह प्रदर्शन 13 अगस्त को कर्नाटक ओक्कुटा संगठन की ओर से बुलाए गए राज्यव्यापी बंद का हिस्सा था। यह बंद सीडब्ल्यूआरसी के पानी छोड़ने के निर्देश के विरोध में बुलाया गया था।
कोप्पल जिला इकाई की ओर से जारी एक पत्र के मुताबिक, बंद का नेतृत्व कर्नाटक ओक्कुटा के प्रदेश अध्यक्ष वाटाल नागराज कर रहे थे। प्रदर्शन का तालमेल कर्नाटक रक्षणा वेदिके युवा शाखा के प्रदेश अध्यक्ष बीजन्ना राजन्ना और सुवर्ण कर्नाटक युवा सेना के प्रदेश अध्यक्ष टीके नायक को करना था।
संगठनों ने राज्यभर में सुबह 6 बजे से प्रदर्शन करने का आह्वान किया था। ये प्रदर्शन टोल गेट, राष्ट्रीय राजमार्ग और राजमार्ग पर किए जाने थे। संगठनों ने कहा कि बंद बुलाने का फैसला कर्नाटक की अपनी पानी की जरूरतों को लेकर चिंता के कारण लिया गया। खासकर उन जिलों में जहां पीने के पानी और सिंचाई के पानी की कमी है।
तमिलनाडु से कर्नाटक में सरकारी बसों का प्रवेश जारी
बंद के चलते बंगलूरू समेत कई जगहों पर सुरक्षा बढ़ा दी गई है। बंगलूरू पुलिस ने शहर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है, ताकि बंद के दौरान किसी तरह की अप्रिय घटना न हो।वहीं, तमिलनाडु में स्थिति अलग है। मेकेदातु बांध के मुद्दे पर कन्नड़ संगठनों के एक दिन के बंद के बावजूद तमिलनाडु की सरकारी बसें होसुर शहर के रास्ते कर्नाटक में प्रवेश कर रही हैं।
क्या है कावेरी जल विवाद?
कावेरी नदी कर्नाटक से निकलकर तमिलनाडु होते हुए बंगाल की खाड़ी में मिलती है। दोनों राज्यों के बीच दशकों से इस बात को लेकर विवाद रहा है कि नदी का पानी किस अनुपात में बांटा जाए। इस विवाद के समाधान के लिए कावेरी जल विवाद न्यायाधिकरण का गठन किया गया था और बाद में कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण बनाया गया, जो जरूरत के अनुसार पानी छोड़ने के निर्देश देता है। हालांकि, कम बारिश या जलाशयों में पानी कम होने की स्थिति में यह मुद्दा अक्सर फिर से विवाद का कारण बन जाता है।
अब तमिलनाडु के सुप्रीम कोर्ट जाने के फैसले से यह मामला एक बार फिर कानूनी और राजनीतिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बन गया है। अदालत के अगले कदम और दोनों राज्यों के रुख पर पूरे विवाद की दिशा निर्भर करेगी।
मुख्यमंत्री शिवकुमार ने क्या कहा ?
पिछले हफ्ते कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने इस मुद्दे पर एक सर्वदलीय बैठक की अध्यक्षता की थी। इस दौरान उन्होंने कहा था कि सरकार और वह खुद कावेरी मामले में राज्य के लोगों और किसानों के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं।
उन्होंने कहा था कि हर परिस्थिति में राज्य के हितों की सुरक्षा की जाएगी। डीके शिवकुमार ने कहा कि कर्नाटक अभी भी सूखे जैसी स्थिति का सामना कर रहा है। राज्य में अनुमानित बारिश का केवल करीब 30-35 फीसदी ही बारिश हुई है। उन्होंने किसानों से अपील की थी कि जब तक सरकार दिशा-निर्देश जारी नहीं करती, तब तक वे धैर्य बनाए रखें।
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मुख्यमंत्री ने कहा था कि कावेरी जल विनियमन समिति (सीडब्ल्यूआरसी) और कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण ने राज्य को 3,500 क्यूसेक पानी छोड़ने का निर्देश दिया है। उन्होंने बताया कि कबिनी जलाशय में 24 हजार क्यूसेक पानी आ रहा है, जबकि कृष्णा राजा सागर (केआरएस) जलाशय में 22 हजार क्यूसेक पानी की आवक हो रही है। उन्होंने कहा कि कल दोपहर बांध की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जलाशय से पानी छोड़ा गया।
डीके शिवकुमार ने कहा कि सभी दलों ने सरकार के इस फैसले का सर्वसम्मति से समर्थन किया। उन्होंने कहा कि जब भाजपा नेताओं ने केआरएस बांध का दौरा किया तो उन्होंने भी स्थिति को समझा। मुख्यमंत्री ने कहा था कि वह सभी कन्नड़ संगठनों से बात करेंगे। उन्होंने संगठनों से बंद का आयोजन न करने की अपील की थी।


