विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को विदेशी नेताओं से जुड़ी राजनीतिक टिप्पणियों में संयम और सम्मान बरतने की अपील की। मंत्रालय की यह प्रतिक्रिया कांग्रेस नेता राहुल गांधी की उस टिप्पणी के बाद आई, जिसमें उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश नीति पर निशाना साधते हुए इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी का संदर्भ दिया था। इस टिप्पणी को लेकर भाजपा ने कांग्रेस की आलोचना की और इसे महिलाओं के प्रति अपमानजनक बताया।
प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने भारत और इटली के संबंधों को मजबूत बताते हुए कहा कि हाल के वर्षों में दोनों देशों के रिश्ते हर स्तर पर और मजबूत हुए हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी मुद्दे को सम्मान के साथ उठाया जाना चाहिए। जायसवाल ने कहा, “भारत के इटली के साथ मजबूत संबंध हैं। हम इन संबंधों को और मजबूत करना चाहते हैं। किसी भी मुद्दे को सम्मान के साथ उठाया जाना चाहिए।” जायसवाल ने कहा, “यह महत्वपूर्ण है कि राजनयिक परंपरा के तहत हम एक-दूसरे का सम्मान करते हुए और दोनों पक्षों के बीच आपसी समझ को ध्यान में रखते हुए अपने संबंधों को मजबूत करें।”
Delhi: MEA Spokesperson Randhir Jaiswal says, “We have strong ties with Italy. Our ties with Italy in recent years have expanded and strengthened in every which way. And it’s important that as part of diplomatic practice that we strengthen our ties, keeping in mind and being… pic.twitter.com/RmdNcyVrbf
— IANS (@ians_india) August 14, 2026
संदीप दीक्षित और राहुल गांधी के बीच क्या हुआ, जिस पर मचा बवाल?
विदेश मंत्रालय की यह प्रतिक्रिया राहुल गांधी के रचनात्मक कांग्रेस राष्ट्रीय अधिवेशन में दिए बयान के एक दिन बाद आई। राहुल ने प्रधानमंत्री मोदी की विदेश नीति पर निशाना साधते हुए कहा था कि ऐसा लगता है कि उन्होंने इसे नेताओं को गले लगाने तक सीमित कर दिया है।
राहुल गांधी ने अपनी बात समझाने के लिए मंच पर रचनात्मक कांग्रेस के अध्यक्ष संदीप दीक्षित को गले लगाया। उन्होंने कहा, “कल्पना कीजिए कि कितनी अज्ञानता है> उन्हें यह विचार कहां से आया कि विदेश नीति नेताओं को गले लगाने के बारे में है?” इसके बाद संदीप दीक्षित ने राहुल गांधी से पूछा, “एक चीज पूछ सकता हूं? मेलोनी समझ के तो नहीं पकड़ा था?” राहुल गांधी ने जवाब दिया, “मैं अभी वहां तक नहीं पहुंचा हूं।”
राहुल ने मोदी की विदेश नीति पर उठाए सवाल
अपने संबोधन में राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी विदेश नीति के जरिए भारत के हितों की रक्षा करने में विफल रहे हैं। उन्होंने वैश्विक नेताओं के साथ प्रधानमंत्री के संबंधों को लेकर भी सवाल उठाए। राहुल गांधी ने अपनी दादी और पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के अमेरिका के साथ संबंधों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि भारतीय विदेश नीति व्यक्तिगत संबंधों के बजाय राष्ट्रीय हितों से निर्देशित होनी चाहिए।
उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री मोदी के दिमाग में यह बात कहां से आई कि वे नेता मेरे दोस्त हैं?” राहुल गांधी ने अमेरिका-ईरान संघर्ष का भी जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि भारत दोनों पक्षों को साथ लाने में भूमिका निभा सकता था। उन्होंने कहा, “अमेरिका-ईरान युद्ध हुआ। ऐसी स्थिति में अगर इंदिरा गांधी जैसा नेतृत्व होता तो हमारे पास सबसे बड़ा अवसर होता। क्योंकि ईरान हमारा पुराना मित्र है, अमेरिका और रूस भी हमारे मित्र हैं, इसलिए हम उनके बीच मित्रता कायम करने में मध्यस्थता कर सकते थे। लेकिन पाकिस्तान आगे आया और उसने हमारी जगह ले ली और नरेंद्र मोदी खड़े होकर देखते रहे।”
भाजपा ने राहुल गांधी पर किया पलटवार
भाजपा ने भी राहुल गांधी की टिप्पणियों पर हमला बोला। पार्टी प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने उन पर राजनीतिक विमर्श की मर्यादा पार करने का आरोप लगाया। त्रिवेदी ने कहा कि राहुल गांधी का अहंकार अब पागलपन में बदलता हुआ दिखाई दे रहा है। उन्होंने राहुल की टिप्पणियों को अशिष्ट और अभद्र बताया।
भाजपा नेता ने राहुल गांधी की उस टिप्पणी की भी आलोचना की, जिसमें उन्होंने भाजपा और आरएसएस को जोकरों के समूह के साथ विदूषक बताया था, जिन्हें भारत की कोई समझ नहीं है। राहुल गांधी ने अपने भाषण में आरएसएस पर भी निशाना साधा था। उन्होंने आरोप लगाया कि आरएसएस को बड़े पूंजीपतियों ने अपने कब्जे में लेकर इस्तेमाल किया है।
राहुल गांधी क्यों बोले- पीएम मोदी और अमित शाह को देना पड़ेगा इस्तीफा
राहुल गांधी ने कहा कि कांग्रेस सरकार के खिलाफ अपना अभियान तब तक जारी रखेगी, जब तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह इस्तीफा नहीं दे देते। उन्होंने कहा, “जब तक प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री अमित शाह इस्तीफा नहीं देते, वे सो नहीं पाएंगे, हम उन्हें जगाए रखेंगे। हम यह बिना नफरत और हिंसा के करेंगे।” उन्होंने कहा कि कांग्रेस “प्रेम, भाईचारे और अहिंसा” पर आधारित राजनीतिक संस्कृति के लिए लड़ रही है।

