कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने राज्य के सभी पात्र मतदाताओं से एक खास अपील की है। उन्होंने कहा है कि 30 जून से शुरू होने वाले मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (SIR) कार्यक्रम में सभी लोग अनिवार्य रूप से हिस्सा लें। मुख्यमंत्री ने चेतावनी दी कि अगर तय समय के भीतर फॉर्म जमा नहीं किया गया, तो वोट देने का अधिकार खत्म हो सकता है। इससे सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में भी बड़ी दिक्कतें आ सकती हैं।
सरकारी योजनाओं पर पड़ेगा असर
मुख्यमंत्री ने बेंगलुरु में एक मीडिया वार्ता को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि वोट देने का अधिकार जीवन जीने के अधिकार जैसा है। इसलिए हर किसी को अपना वोट सुरक्षित रखना चाहिए। उन्होंने बताया कि जो लोग इस प्रक्रिया में हिस्सा नहीं लेंगे, उन्हें भविष्य में सरकारी कल्याणकारी योजनाओं का लाभ लेने में मुश्किल हो सकती है। इन योजनाओं में वृद्धावस्था पेंशन, विधवा पेंशन, गृह ज्योति, गृह लक्ष्मी, अन्न भाग्य और आवास योजनाएं शामिल हैं। हालांकि, उन्होंने साफ किया कि सरकार अभी किसी की योजना बंद नहीं कर रही है, लेकिन जानकारी का सत्यापन करना बहुत जरूरी है।
प्रक्रिया और समय सीमा
यह विशेष अभियान 30 जून से 29 जुलाई तक चलेगा। इस दौरान चुनाव आयोग की तरफ से नियुक्त बूथ लेवल अधिकारी (BLO) घर-घर जाएंगे। वे मतदाताओं को छपे हुए फॉर्म देंगे, जिसमें मतदाता सूची की मौजूदा जानकारी होगी। हर व्यक्ति को अपना अलग फॉर्म भरकर उस पर अपनी नई फोटो लगानी होगी और इसे 29 जुलाई से पहले जमा करना होगा। अगर कोई व्यक्ति घर पर मौजूद नहीं है, तो परिवार का दूसरा सदस्य उसकी जगह फॉर्म पर हस्ताक्षर कर सकता है। पांच अगस्त को मतदाता सूची का ड्राफ्ट प्रकाशित किया जाएगा।
मुख्यमंत्री के लिए भी नियम समान
डीके शिवकुमार ने जोर देकर कहा कि यह नियम हर नागरिक के लिए है, चाहे उसका पद कुछ भी हो। उन्होंने कहा, ‘भले ही मैं कर्नाटक का मुख्यमंत्री हूं, लेकिन मुझे भी यह फॉर्म भरना और जमा करना होगा। अगर मैं ऐसा नहीं करता हूं, तो मेरा नाम भी मतदाता सूची से हट जाएगा और मेरा वोट मान्य नहीं रहेगा।’
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सहायता केंद्र और जरूरी दस्तावेज
सरकार ने मतदाताओं की मदद के लिए राज्य भर में 37,464 मतदाता सुविधा केंद्र और 11,856 बीएलओ सुविधा केंद्र बनाए हैं। कुल मिलाकर 49,320 हेल्प डेस्क स्थापित किए गए हैं। लोग ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीकों से इस प्रक्रिया को पूरा कर सकते हैं। पहचान के सत्यापन के लिए जन्म प्रमाण पत्र, एसएसएलसी मार्क्स कार्ड, पासपोर्ट, सरकारी आईडी कार्ड, जाति प्रमाण पत्र और निवास प्रमाण पत्र जैसे दस्तावेजों का इस्तेमाल किया जा सकता है। जो युवा 18 साल के हो चुके हैं, वे फॉर्म-6 भरकर अपना नाम नए मतदाता के रूप में जुड़वा सकते हैं।
विरोध पर सरकार का रुख
कुछ संगठनों के विरोध पर मुख्यमंत्री ने कहा कि इस संशोधन के बारे में जागरूकता फैलाना सरकार की जिम्मेदारी है। उन्होंने बताया कि अदालतों ने भी संवैधानिक ढांचे के तहत इस व्यवस्था को सही माना है। इसलिए सरकार लोगों को जागरूक करने का अपना काम जारी रखेगी ताकि किसी का भी वोट न छूटे।

